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परलोक गमन meaning in Hindi

pronunciation: [ perlok gamen ]
परलोक गमन meaning in English

Examples

  1. एक दिन अजामल का पिता परलोक गमन कर गया | उसके पश्चात राजा ने अजामल को राजपुरोहित बना दिया | राजपुरोहित बनने पर उसकी जिम्मेदारी और बढ़ गई | वह धर्म , समाज और राज्य का अध्यक्ष बन गया |
  2. जीवात्मा का परलोक गमन व पुर्नजन्म पं . सुनील जोशी जुन्नरकर जहां पूर्व जन्म और पुनर्जन्म इस जीवन रूपी सरिता के दो तट हैं , वहीं इन दोनों के बीच की कुछ अवधि प्रत्यक्ष शरीर की रूप-रेखा से दूर रहती हैं।
  3. हम बच्चे थे जब डॉ खुराना को नोबल पुरस्कार मिल था , हमारे सीने भी गर्व से चौड़े हो गए थे की एक भारतवंशी को यह श्रेय मिल सका .जो भी हो विज्ञानं के एक साधक के परलोक गमन पर हार्दिक श्रद्धांजलि.
  4. कुछ तो अपनी बुद्धि और चेतना के लिए रासायनिक पदार्थों का भी उपयोग करते हैं , लेकिन इस विधि में चेतन के साथ श्रीमती कि आग रूपी गालियाँ भी मिलती है जिससे वाष्प रूपी चेतन परलोक गमन कर जाते हैं .
  5. मंदिरों में बजने वाली घंटी की आवाज जिस प्रकार वैतरणी नदी को पार करा देती है उसी प्रकार पशुओं के गले से बंधी घंटी की आवाज संसार-सागर से पार उतार देती है | ( पशुपालन से अर्थ व्यवस्था व भगवान् के भजन से परलोक गमन की बाधाएं दूर होती है )
  6. जपुजी साहिब ” का पाठ करके भाई लंगाह आदि सिखों को कहा कि अब हमरी परलोक गमन कि तैयारी है | आप जी श्री हरिगोबिंद को धैर्य देना और कहना कि शोक नहीं करना , करतार का हुकम मनना | हमारे शरीर को जल प्रवाह ही करना , संस्कार नहीं करना |
  7. शबरीमलै यात्रा के समय पर घटित दुर्घटनाओं में मृत्यु को प्राप्त हुये एवम् प्राकृतिक आपदाओं , आतंकवाद , नक्सलवाद आदि में हिसांत्मक कार्यवाही के चलते परलोक गमन कर गए ऐसे सभी बंन्धुओं के परिवार जनों के प्रति हम संवेदना व्यक्त करते हैं और दिवंगत महानुभावों को हम श्रध्दांजलि अर्पण करते हैं ।
  8. प्रिय संतोष जी अब ये मूरख मंच से शुद्ध भाषा-मजा हुआ तीर -तीखी गोली भी उनके गले में न उतरे तो और क्या कहें -श्री लाल शुक्ल जी के परलोक गमन की सुन सच में बड़ा दर्द हुआ मन को -अच्छा है की आप जैसे कई व्यंग्यकार अभी लेखनी थामे राजा को भी दर्पण दिखा रहे हैं . .
  9. केंदल नगर में रहते हुए भक्त जी आयु बहुत बढ़ जाने से वृद्ध हो गए | उनका अंतिम समय निकट आ गया तथा एक दिन भजन करते हुए ही ज्योति जोत समा गए | उनका ज्योति जोत समाना सुन कर पद्मावती भी परलोक गमन कर गई तथा दोनों की आत्माएं स्वर्गपुरी को चली गईं | जै जै कार होती रही |
  10. बारहवाँ प्रायश्चित - स्वामी जी के परलोक गमन के पश्चात श्रीमती परोपकारिणी सभा ने कराया अर्थात श्री अबदुल अजीज साहिब को जो पंजाब यूनिवर्सिटी की मौलवी कालिज की डिग्री प्राप्त कर चुके हैं और जो अब गुरदासपुर ( पंजाब ) में असिस्टैंट कमिश्नर हैं [ फुट नोट - यह घटना आर्य पथिक की अपने काल की है - अनुवादक ] शुद्ध किया और आर्य बनाया जिन का शुभ नाम अब राय बहादुर हरदस राम जी है।
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