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धुंधलाई meaning in Hindi

pronunciation: [ dhunedhelaae ]
धुंधलाई meaning in English

Examples

  1. हाँ , कई बार यह भी देखा जाता है कि जवानी से लबरेज सुन्दरियाँ आराम से महिला बनी बैठी रहती हैं और सत्तर पार की वृद्धाएं बगैर महिलापद पाए हिलते-काँपते पैरों से महिला सीट को ललचाई - धुंधलाई नजरों से देखती रह जाती हैं।
  2. इस धूल के गुबार से धुंधलाई आँखो को आज खोलकर हकीकत देखनी होगी वरना अंत मे मासूमो की लाशों के ढ़ेर पर बैठकर फिर से अपनो के मातम के आँसू रोने होगें , शायद तब यह आँसू धोखा दे जाए, क्योंकि यह कम्बख़त भी कितना बहेगें।
  3. आज फिर एक सूफी गीत - करण समस्तीपुरीमन का पंछी उड़ना चाहे , लेकिन उड़ ना पाये !हाय !किसको दर्द सुनाये !!कतरे गए पंख कोमल औरआँखें हैं धुंधलाई !धुंधली आंखो में सतरंगी,सपने बहुत छुपाये !!हाय !किसको दर्द सुनाये !!कहाँ बसेरा, कहाँ ठिकाना,किस पथ से किस नभ को जाना...
  4. आज फिर एक सूफी गीत - करण समस्तीपुरीमन का पंछी उड़ना चाहे , लेकिन उड़ ना पाये !हाय !किसको दर्द सुनाये !!कतरे गए पंख कोमल औरआँखें हैं धुंधलाई !धुंधली आंखो में सतरंगी,सपने बहुत छुपाये !!हाय !किसको दर्द सुनाये !!कहाँ बसेरा, कहाँ ठिकाना,किस पथ से किस नभ को जाना
  5. इस धूल के गुबार से धुंधलाई आँखो को आज खोलकर हकीकत देखनी होगी वरना अंत मे मासूमो की लाशों के ढ़ेर पर बैठकर फिर से अपनो के मातम के आँसू रोने होगें , शायद तब यह आँसू धोखा दे जाए , क्योंकि यह कम्बख़त भी कितना बहेगें।
  6. बहुत सी अच्छी तस्वीरे और कमाल के शोट्स धुंधलाई के भेट चढ़ जाते है जो की अक्सर कैमरा धारक की शरीर में होने वाले बदलावों और कम्पन के वजह से होती है वहाँ कुछ चीजें है कि आप धुँधली तस्वीरें की संभावना को कम कर सकते हैं।
  7. क्या हम बौद्धिक तबके को नई दिशा दे रहे हैं , जो लोगों में नया रुख और दृष्टिकोण पैदा करने में सहायक होगा ? मैं भयभीत हूं कि आज कोई भी ये सवाल नहीं पूछ रहा है , जबकि राष्ट्रीय पटल पर मुंबई हमले की स्मृतिया अभी धुंधलाई नहीं हैं।
  8. मुक्त रुबिया का हो जाना निर्णय ग़लत हुआ हमसे और तभी पूरी घाटी धुंधलाई आतंकी तम से हमने अपनी खुद्दारी के सही जलजले नहीं किये और हमारे दरबारों ने लौह-फ़ैसले नहीं किये अर्जुन मछली की आँखों पर तीर चलाना चूक गये मुट्ठी भर जुगनू सूरज के ज्योति-कलश पर थूक गये
  9. मालगुड़ी का स्टेशन , वहां के बाज़ार , स्कूल , सैलून , डाकख़ाना , हलवाई , नानबाई , मोची , मोटर मैकेनिक , टीचर , पेंटर , बुक सेलर और ऐसे ही तमाम पात्र पढने वालों के ज़ेहन में इस क़दर पैवस्त हैैं कि वक़्त की गर्द में भी उनकी याद कभी धुंधलाई नहीं।
  10. नाटक समन्दर पार कंटीली झाड़ी के पीछे झोपड़ी के आंगन में भले सताती चिन्तायें और बढ़ती धड़कन पर जहां मिलती थी प्रेम की सौगात चाहता तो ले लेता हँसते हुये लेकिन ठहराव से विद्रोह कर के यहां तो फंस गया दुविधा में धुंधलाई शाम में बीयर की बोतल खुलने पर चांद ने जब अंधियारे
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