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द्विपाद meaning in Hindi

pronunciation: [ devipaad ]
द्विपाद meaning in English

Examples

  1. ' वह इसलिए है कि तुम्हारे बारहवें ग्रह यानी द्वादश में बुध के साथ-साथ शनि भी उपस्थित है , जहाँ से वह चौथे और नौवें स्थान को द्विपाद दृष्टि से देख रहा है।
  2. परंतु त्रेता , द्वापर एवं कलि में वह क्रमशः ( तप , यज्ञ , दान ) द्विपाद ( यज्ञ एवं दान ) तथा एकपाद ( दान ) रूप में ही स्थिर रहता है।
  3. हम इसी जोगाड में एक मोहतरमा का फ़ोटो खींच रहे थे कि रात को आप सब लोगों के जाने के बाद अल्पना वर्मा जी कल की पहेली पर द्विपाद प्राणी वाला विषय देखकर रामप्यारी को भडका गई . .
  4. जन्मांक चक्र में यह जिस भाव में बैठता है उस स्थान से तृतीय व दशम भाव को एक पाद दृष्टि से , पंचम व नवम भाव को द्विपाद दृष्टि से तथा तृतीय , सप्तम व दशम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है।
  5. तेलुगु रामायण ( द्विपाद रामायण ) के अनुसार , लक्ष्मण जब राम के साथ वन जाने लगे , तब उन्होंने निद्रा-देवी से दो वरदान प्राप्त किये-एक तो पत्नी उर्मिला के लिए चौदह वर्ष की नींद तथा दूसरा अपने लिए वनवास के अंत तक जागरण।
  6. शरीर से आदमी जैसे दिखने वाले प्राणियों के लक्षणों पर विचार किया होगा तो वे बग़ैर किसी दिक्क़त के समझ गये होंगे कि हो न हो आज मन बन्दर जैसा रखने वाले ये द्विपाद प्राणी शरीर से भी कभी ज़रूर बन्दर रहे होंगे ।
  7. शरीर से आदमी जैसे दिखने वाले प्राणियों के लक्षणों पर विचार किया होगा तो वे बग़ैर किसी दिक्क़त के समझ गये होंगे कि हो न हो आज मन बन्दर जैसा रखने वाले ये द्विपाद प्राणी शरीर से भी कभी ज़रूर बन्दर रहे होंगे ।
  8. क्योंकि मनुष्य एक द्विपाद और सीधी मुद्रा वाला प्राणी है , और श्रोणी के आकार के हिसाब से, स्तनधारी प्राणियों में मनुष्य का सर सबसे बड़ा होता है, महिलाओं के श्रोणी और मनुष्य के भ्रूण को इस तरह से बनाया गया है की जन्म संभव हो सके.
  9. क्योंकि मनुष्य एक द्विपाद और सीधी मुद्रा वाला प्राणी है , और श्रोणी के आकार के हिसाब से, स्तनधारी प्राणियों में मनुष्य का सर सबसे बड़ा होता है, महिलाओं के श्रोणी और मनुष्य के भ्रूण को इस तरह से बनाया गया है की जन्म संभव हो सके.
  10. जन्म कुंडली में शनि जिस भाव में बैठे होते हैं , वहाँ से तृतीय तथा दशम भाव को एकपाद दृष्टि से पंचम तथा नवम भाव को द्विपाद दृष्टि से , चतुर्थ तथा अष्टम भाव को त्रिपाद दृष्टि से , सप्तम , तृतीय एवं दशम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखते हैं।
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