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ढारस meaning in Hindi

pronunciation: [ dhaares ]
ढारस meaning in English

Examples

  1. और इदर मर्कज़ ( केन्द्र ) के खाली हो जाने की वजह से यह तवक़्क़ों ( अपेक्षा ) भी न की जा सकेगी कि अक़ब ( पीछे ) से मज़ीद ( और भी ) फ़ौजी कुमक आ जायेगी कि जिस से लड़ने भिड़ने वालों की ढारस बंधी रहे।
  2. 18 सूरए कहफ़ -दूसरा रूकू हम उनका ठीक ठीक हाल तुम्हें सुनाएं , वो कुछ जवान थे कि अपने रब पर ईमान लाए और हमने उनको हिदायत बढ़ाई { 13 } और हमने उनकी ढारस बंधाई जब ( 1 ) ( 1 ) दक़ियानूस बादशाह के सामने .
  3. प्रत्येक स्थिति में , दुखी मन के साथ भी लोग ईदे फ़ित्र की नमाज़ पढ़ने तो जायेंगे ही क्योंकि यह नमाज़ सब को एकत्रित करके उन्हें यह ढारस बंधाएगी कि वे अकेले नहीं हैं और सबसे बढ़कर ईश्वर उनकी स्थिति को अवश्य ही उत्तम रूप में परिवर्तित करेगा तथा अत्याचारियों से प्रतिशोध अवश्य लेगा।
  4. क्या धर्म है , क्या अधर्म है ज़ीवन के अनसुलझे कई मर्म है जब रोम-रोम तेरा पुलकित हो बस वही तो सच्चा कर्म है जो लोग कहे कुछ , कहने दे रुसवाई से क्या शर्म यहाँ एक हाथ थाम , एक हाथ बढा़ बस जीवन का दो कश लगा और खुद को ढारस आप बँधा ।
  5. यह स्वर्ग है , यही नरक है बस नाम मात्र का फर्क है गाहे-बगाहे के बाकी तर्क है जो चमक गया वो अर्क है जो फिसल गया वो गर्क है फिसल पडा़ तू , तो क्या शर्म यहाँ एक हाथ थाम , एक हाथ बढा़ जीवन का बस दो कश लगा और खुद को ढारस आप बँधा ।
  6. हर दिल यहाँ मुश्ताक है हर मोढ पर कुछ अवसाद है और कुछ समय समय की बात है जो चल पडा़ वो उस्ताद है जो थक गया वो नाशाद है थक गया तू , तो क्या शर्म यहाँ एक हाथ थाम , एक हाथ बढा़ बस जीवन का दो कश लगा और खुद को ढारस आप बँधा ।
  7. याद रखो के परवरदिगार ने हर ख़ैर के लिये अहल क़रार दिये हैं और हर हक़ के लिये सुतून और हर इताअत के लिये वसीलाए हिफ़ाज़त क़रार दिया है और तुम्हारे लिये हर इताअत के मौक़े पर ख़ुदा की तरफ़ से एक मददगार का इन्तेज़ाम रहता है जो ज़बानों पर बोलता है और दिलों को ढारस इनायत करता है।
  8. चूंकि मौत ( मृत्यु ) उस की निगाह ( दृष्टि ) से ओझल है , और उम्मीदें ( आशायें ) फ़रेब ( कपट ) देने वाली हैं और शैतान उस पर छाया हुआ है , जो गुनाहों ( पापों ) को साज कर उस के सामने लाता है कि वह उस में मुब्तला ( ग्रस्त ) हो और तौबा की ढारस बंधाता रहता है कि वह उसे तअवीक़ ( विलम्ब ) में डालता रहे।
  9. धर्मगुरुओं तथा धार्मिक नेताओं ने लगभग हर स्थान पर ही जनता के वैचारिक केन्द्र और भावनात्मक ढारस के ध्रुव की भूमिका निभाई है और जहां भी बड़े परिवर्तनों के अवसर पर वह मार्गदर्शन तथा नेतृत्व के लिए आगे आए और ख़तरों के सामने डटकर जनसमाजों का नेतृत्व किया उनसे जनता का वैचारिक रिश्ता और भी मज़बूत हो गया और जनता के मार्ग के निर्धारण से संबंधित उनके इशारों में और भी असर उत्पन्न हो गया।
  10. ऐ माओं , बहनों , बेटियो , दुनिया की ज़ीनत तुमसे है मुल्कों की बस्ती हो तुम्ही , क़ौमों की इज्ज़त तुमसे है तुम हो तो ग़ुरबत है वतन , तुम बिन है वीराना चमन हो देस या परदेस जीने की हलावत तुम से है मोनिस हो ख़ाविन्दों की तुम , ग़म ख्वार फरजन्दों की तुम तुम बिन है घर वीरान सब , घर भर की बरकत तुम से है तुम आस हो बीमार की , ढारस हो तुम बेकार की दौलत हो तुम नादार की , उसरत में इशरत तुम से है
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