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टोंटा meaning in Hindi

pronunciation: [ tonetaa ]
टोंटा meaning in English

Examples

  1. इस प्रक्रिया से सूखे मांस का भंडारण बढ़ता जाता और साल के उन महीनों में जब खाने की वस्तुओं का टोंटा पड़ जाता तो सूखे मांस को नये तरीके से पका पका कर परिवार के लोग अपना पेट भरते।
  2. वैसे , जो साहित्यकार भयवश ज़िंदगी के झंझावात में कूदने से भागते रहे हैं और इसीलिए उनके पास ताज़ा अनुभवों का हमेशा टोंटा रहता है , उनके लिए अब हिंदी ब्लॉगरों के आने से काफी सहूलियत हो गई है।
  3. सुल्तानपुर : स्वास्थ विभाग जनता के इलाज के लिए कई लाख की दवाएं अस्पताल में भेजती है इसके बाद भी अस्पताल में दवाओं का टोंटा है अधिकारीयों और मंत्री से बेख़ौफ़ डॉक्टर खुले आम बाज़ार की दवा लिख रहे है !
  4. एक से बढ़कर एक , शायद ही कोई नारी बिना गोदना के होती थी....उसमे भी जिस गरीब जनानी के पास जेवर का सबसे अधिक टोंटा रहता था ,उसके शरीर पर उठें अधिक सुन्दर सुन्दर जेवरों का डिजाइन गोदने के रूप में गोदाया रहता था...
  5. इसके बाद भी राज् य के अधिकारों को लेकर लड़ने वाले नेताओं का तो आज भी टोंटा लगता है जिससे लगता है कि राज् य में राजनेताओं की तो फौज ही फौज है पर नेतृत् व के नाम पर बौने साबित हो रहे हैं।
  6. खच्चित आबे = जरूर आना , कुंदरा = झोपड़ी, काखरो घर छूट गे होही = किसी का घर छूट गया हो तो, ए दारी = अबकी बार, चिन्हारी = पहचान, टोंटा ल रेत के रेंग दिही = गला काट कर भग जाएगा अन्न-कूट गोवर्धन पूजा की हार्दिक बधाई अन्न-कूट गोवर्धन पूजा
  7. ये बातें पहले भी कई बार हो चुकी हैं कि स्थापित ब्लागरों की पोस्ट पर टिप्पणियों की बौछार होजाती है और नए कितना भी अच्छा लिख लें टिप्पणियों का टोंटा रहता है , लेकिन मेरा सोचना है कि स्थापित ब्लागरोंके पास यदि पाठक हैं टिप्पणियां आ रही हैं तो कुछ तो उनकी कलम में भी दम होगा।
  8. सरकारी डॉक्टर खुलेआम लिख रहे बाहर की दवा रिपोर्ट-इस्मत खान छायाकार-अशोक गौतम सुल्तानपुर : स्वास्थ विभाग जनता के इलाज के लिए कई लाख की दवाएं अस्पताल में भेजती है इसके बाद भी अस्पताल में दवाओं का टोंटा है अधिकारीयों और मंत्री से बेख़ौफ़ डॉक्टर खुले आम बाज़ार की दवा लिख रहे है ! और बेचारे गरीब मरीज़ बाहर की दवा ...
  9. पूरा संसार मा जउन आज दिखत हे , खासकर तोर भक्तन के देस भारत मा, जैसे - मार- काट, कोन पराया ये कोन अपन, तेखर चिन्हारी नई ये, कब टोंटा ल रेत के रेंग दिही भरोसा नई ये, मंहगाई अलग ये सब कराये बर उकसाथे, भ्रष्टाचार हा त आदमी के रग रग मा समा गे हे, तउन ल दाई तंही भगा सकत हस.
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