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चमरी meaning in Hindi

pronunciation: [ chemri ]
चमरी meaning in English

Examples

  1. कहते हैं हाथी वाली चमरी और गधे वाला दिमाग ही आज नेताओं की पहचान है / अच्छी सार्थक प्रस्तुती / कुवर जी आज हमें सहयोग की अपेक्षा है और हम चाहते हैं की इंसानियत की मुहीम में आप भी अपना योगदान दें / पढ़ें इस पोस्ट को और हर संभव अपनी तरफ से प्रयास करें -
  2. अजगर , उष्ट्र, ऊद, कछुआ, कपोत, कपोतक, (पंडुक), कस्तूरी, कस्तूरीमृग, कलविंकक, कुत्ता, कोकिल, खंजन, गवल, गिद्ध, गिलहरी, गेंडा, गौर, गौरैया, गोह, घड़ियाल, चकोर, चक्रवाक, चमरी, चमगादड़, चातक, चित्रगर्दभ, चींटी, चीता, चील, छिपकली, जलकाक जलपरी, टिड्डी, तेंदुआ, तोता, त्रिखंड, दिमक, धेनश, नाग, नागराज, नीलगाय, बाघ, बिच्छू, बिल्ली, बुलबुल, भालू, भेड़, भैंसा, महाश्येन, मैना, मोर, बानर, शशक, श्येन, सिंह, सूअर और हाथी।
  3. उन चाटुकारों ने गोरी चमरी के चरण चुम्बन कर के विनीत भावः से कहा “हम सब ( कांग्रेस्स्य) तो मुर्ख और अग्गयानी हैं हे गोरी चमरी की मालकिन तुम हमारी शासक बन जाओ और हम पर राज करो, यह सुन कर कुछ देश भक्तों ने उन चाटुकारों को फटकारा तो उस गोरी चमरी की मालकिन ने बरी दरिया दिली से कहा की मैं तुम्हारी शासक नहीं बनना चाहती.
  4. उन चाटुकारों ने गोरी चमरी के चरण चुम्बन कर के विनीत भावः से कहा “हम सब ( कांग्रेस्स्य) तो मुर्ख और अग्गयानी हैं हे गोरी चमरी की मालकिन तुम हमारी शासक बन जाओ और हम पर राज करो, यह सुन कर कुछ देश भक्तों ने उन चाटुकारों को फटकारा तो उस गोरी चमरी की मालकिन ने बरी दरिया दिली से कहा की मैं तुम्हारी शासक नहीं बनना चाहती.
  5. उन चाटुकारों ने गोरी चमरी के चरण चुम्बन कर के विनीत भावः से कहा “हम सब ( कांग्रेस्स्य) तो मुर्ख और अग्गयानी हैं हे गोरी चमरी की मालकिन तुम हमारी शासक बन जाओ और हम पर राज करो, यह सुन कर कुछ देश भक्तों ने उन चाटुकारों को फटकारा तो उस गोरी चमरी की मालकिन ने बरी दरिया दिली से कहा की मैं तुम्हारी शासक नहीं बनना चाहती.
  6. इसी तरह एक रात जब मैं अपने लण्ड को खड़ा करके हलके हलके अपने लण्ड की चमरी को ऊपर निचे करते हुए अपनी प्यारी दीदी को याद करके मुठ मारने की कोशिश करते हुए , अपनी आँखों को बंद कर उसके गदराये बदन की याद में अपने को डुबाने की कोशिश कर रहा था तो मेरी आँखों में पड़ती हुई रौशनी की लकीर ने मुझे थोड़ा बैचैन कर दिया और मैंने अपनी आंखे खोल दी .
  7. तो हर प्रतियोगिता परिक्षा देने के बाद , नौकरी खोजता हुआ पहुँच गया विचित्र शहर में , जहाँ हर घर की अलगनी पर सूख रहे व्याघ्रचर्म , मैं हुआ हतप्रभ की यह कैसा सहर है , जहाँ के लोगों को अपनी ही चमरी पर नहीं है विश्वास , यह अभिनय प्रवीण लोगों का तो सहर नहीं है , एक कार्यालय में संपर्क कराने पर , मझे भी मिल गयी नौकरी , भार दिया गया मुझे सच को झूठ और झूठ को सच में बदलने का ;
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