घामड़ meaning in Hindi
pronunciation: [ ghaamed ]
Examples
- ये सज् जन अपने समय और श्रम का समाज के हित में बेहतर इस् तेमाल कर सकते हैं , इस तरह के पागलपन की जगह और इस तरह के परम मूर्ख पुत्र को जन् म देने वाली वह घामड़ औरत किस हद तक क्रूर और आत् मग्रस् त होगी यह सोचकर मैं सिहर उठा हूं।
- घामड़ मुहम्मद ने सुलेमान के बारे में बेहूदा कहानी गढ़ी है देखिए कि देवों के देव , महादेव ने किस तरह मलकाए शीबा का तख़्त पलक झपकते ही सुलेमान के क़दमों पर रख दिया ? अगर इसी कुरानी हालात में एक हिन्दू कहता है कि परबत को लेकर हनुमान जी उड़े तो मुसलमान हसेंगे और लाहौल पढेंगे .
- जो एक बार ख़फा़ भी न हो सकी मुझसे वो जिसको जूठा लगा मुँह कभी दिखा न सका कसाफ़तों ( गन्दगी) प मेरी जिसको प्यार आ न सका जो मिट्टी खाने प मुझको कभी न पीट सकी न हाथ थाम के मुझको कभी घसीट सकी वो माँ जो गुफ्तगू की रौ में सुन के मेरी बड़ कभी जो प्यार से मुझको न कह सकी घामड़!
- और वो नादान विलेन उसे पहचान भी नहीं पाता था | और तो और , पूरी फिल्म में इक से इक चालाकियां दिखाने के बाद विलेन आखिर में हीरो को गोली ना मारकर , गैस चेंबर में डाल कर या टाईम बम्ब से उड़ाने की बेवकूफी भी कर दिखाते थे | अरे घामड़ , दो रूपए की गोली के बदले हजारों रूपए का टाईम बम् ब. .
- अल्लाह को ज़रुरत पेश आई यकीन दिलाने की कहता है “बिलकुल सच है ' ' यह तो इंसानी कमज़ोरी है , इस लिए कि “लेकिन बहुत से आदमी ईमान नहीं लाते .” उम्मी आसमान को छत तसव्वुर करते हैं जब कि इनसे हज़ार साल पहले ईसा पूर्व सुकरात और अरस्तू के ज़माने में सौर्य मंडल का परिचय इन्सान पा चुका था और यह अपने अल्लाह को ऐसा घामड़ साबित कर रहे हैं कि उसको अभी तक इसका इल्म नहीं .
- अल्लाह को ज़रुरत पेश आई यकीन दिलाने की कहता है ' ' बिलकुल सच है '' यह तो इंसानी कमज़ोरी है , इस लिए कि '' लेकिन बहुत से आदमी ईमान नहीं लाते . '' उम्मी आसमान को छत तसव्वुर करते हैं जब कि इनसे हज़ार साल पहले ईसा पूर्व सुकरात और अरस्तू के ज़माने में सौर्य मंडल का परिचय इन्सान पा चुका था और यह अपने अल्लाह को ऐसा घामड़ साबित कर रहे हैं कि उसको अभी तक इसका इल्म नहीं .
- वह कहते हैं कि जिब्रील फ़रिश्ता आया और उसने उनको दबोच लिया , फिर छोड़ कर बोला “पढ़” (न उसके हाथ में कोई तख्ती थीं, न किताब, न कापी, न कोई तहरीर, अजीब जंगली जीव था फ़रिश्ता, बगैर लिखा दिखलाए पढने को कह रहा था.) “मुहम्मद बिना तहरीर देखे ही दुहाई देने लगे कि “मैं अनपढ़ हूँ.” असभ्य और घामड़ फ़रिश्ते ने फिर मुहम्मद को दबोच लिया और छोड़ते हुए कहा “पढ़” “अजीब अहमक मखलूक आसमान से नाज़िल हुए है आप, हवा में क्या लिखा है जिसे देख कर मैं बतलाऊँ 'बे से बकरी होगी.'