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गुरु अर्जन देव meaning in Hindi

pronunciation: [ gauru arejn dev ]
गुरु अर्जन देव meaning in English

Examples

  1. जहाँगीर ने श्री गुरु अर्जन देव जी को सन्देश भेजा | बादशाह का सन्देश पड़कर गुरु जी ने अपना अन्तिम समय नजदीक समझकर अपने दस-ग्यारह सपुत्र श्री हरिगोबिंद जी को गुरुत्व दे दिया | उन्होंने भाई बुड्डा जी , भाई गुरदास जी आदि बुद्धिमान सिखों को घर बाहर का काम सौंप दिया | इस प्रकार सारी संगत को धैर्य देकर गुरु जी अपने साथ पांच सिखों-
  2. नक्षत्र , हर्षण योग, सूर्य राशि वृष....... पूरा पढ़ेंव्रत-त्योहारआने वाले व्रत-त्योहारहिंदूमुस्लिमसिखईसाईअन्यव्रत-त्योहारः 13 मई-19 मई, 2013अगर किसी का विवाह सारे साल में नहीं सूझ रहा हो तो अक्षय तृतीया के दिन...और >>उर्स मेला प्रारंभप्रतिवर्ष अजमेर की दरगाह शरीफ में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार पर दो दिन का और >>गुरु अर्जन देव शहादत दिवससिख धर्म के पांचवें गुरु अर्जन देव जी का शहादत दिवस जून महीने में पड़ता है।
  3. श्री गुरु अर्जन देव जी ने अपने गुरु पिता के वचन याद किए कि हमारी सेवा इन तीर्थों की सेवा है | इस प्रकार अमृत सरोवर के बाद संतोखसर तीर्थ की सेवा आरम्भ करने का विचार बनाया | इस सरोवर को श्री गुरु राम दास जी द्वारा आरम्भ कराया गया था | खोदे हुए गड्डे में वर्षा का पानी एकत्रित हो गया तथा चारों और बेरियों और वृक्षों के झुण्ड थे |
  4. बाबा बुड्डा जी के वचनों के कारण जब माता गंगा जी गर्भवती हो गए , तो घर में बाबा पृथीचंद के नित्य विरोध के कारण समय को विचार करके श्री गुरु अर्जन देव जी ने अमृतसर से पश्चिम दिशा वडाली गाँव जाकर निवास किया | तब वहाँ श्री हरिगोबिंद जी का जन्म 21 आषाढ़ संवत 1652 को रविवार श्री गुरु अर्जन देव जी के घर माता गंगा जी की पवित्र कोख से वडाली गाँव में हुआ |
  5. बाबा बुड्डा जी के वचनों के कारण जब माता गंगा जी गर्भवती हो गए , तो घर में बाबा पृथीचंद के नित्य विरोध के कारण समय को विचार करके श्री गुरु अर्जन देव जी ने अमृतसर से पश्चिम दिशा वडाली गाँव जाकर निवास किया | तब वहाँ श्री हरिगोबिंद जी का जन्म 21 आषाढ़ संवत 1652 को रविवार श्री गुरु अर्जन देव जी के घर माता गंगा जी की पवित्र कोख से वडाली गाँव में हुआ |
  6. एक दिन सभी दुकानदार जो गुरु बाज़ार में रहते थे मिलकर गुरु अर्जन देव जी के पास आए और प्रार्थना करना लगे महाराज ! आप जी ने हम पर बड़ी कृपा की है | हमें यहाँ बसाया है और काम-काज बक्शा है | पर यहाँ कोई ग्राहक आता है और न ही कोई व्यापर होता है | काम काज न होने के कारण गुजारा करने में बहुत दिक्कत आती है | अब आप ही बताएँ की क्या किया जाए ?
  7. एक दिन समुंदे ने गुरु अर्जन देव जी से प्रार्थना की कि महाराज ! हमारे मन में एक शंका है जिसका आप निवारण करें | उन्होंने कहा सनमुख कौन होता है और बेमुख कौन ? गुरु जी पहले उसकी बात को सुनते रहे फिर उन्होंने वचन किया , भाई सनमुख वह होता है जो सदैव अपनी मालिक की आज्ञा में रहता है | जैसे परमात्मा ने मनुष्य को नाम जपने व स्नान करने के लिए संसार में भेजा है |
  8. साहिबजादे की जन्म की खुशी में श्री गुरु अर्जन देव जी ने वडाली गाँव के पास उत्तर दिशा में एक बड़ा कुआँ लगवाया , जिस पर छहरटा चाल सकती थी | गुरु जी ने छहरटे कुएँ को वरदान दिया कि जिस स्त्री के घर संतान नहीं होती या जिसकी संतान मर जाती हो , वह स्त्री अगर नियम से बारह पंचमी इसके पानी से स्नान करे और नीचे लीखे दो शब्दों के 41 पाठ करे तो उसकी संतान चिरंजीवी होगी |
  9. एक दिन मिट्टी के नीचे से एक गोलाकार मठ निकला जिसमे योगी समाधि लगाये बैठा था | गुरु जी ने उसको मखन , कस्तूरी व केसर की मालिश उसके सिर व पैरों पर कराकर समाधि खुलवाई | जब उस योगी ने बाबा बुड्डा जी व गुरु जी को सामने खड़ा पाया तो पूछने लगा कि यह कोनसा युग है और आप कौन हैं | बाबा जी ने बताया अब कलयुग है तथा जो उनके पास खड़े हैं वह श्री गुरु नानक देव जी की गद्दी पर विराजमान पाँचवे गुरु अर्जन देव जी हैं |
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