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गमछी meaning in Hindi

pronunciation: [ gamechhi ]
गमछी meaning in English

Examples

  1. हमरो इहो इयाद बा कि पोखरवा में नहाये के बेरिया हम डूबे लगलीं त तूं कतना चिचियात रहलऽ ? तूं त आपन गमछी फेंकलऽ बाकिर तूहूँ फेंका गइल आ लगल तूहूं डूबे.
  2. पवित्र रमजान के समय हमारे नेता टोपी , पायजामा-कुरता, लाल या काली गमछी पहन-ओढ कर नमाजियों के संग एकता जताने के लिए जुट जाते हैं व उनके पवित्र रोजा खोलने को इफतार पार्टी बना डालते हैं.
  3. पर सूरज अभी भी नहीं ढला था और लग भी नहीं रहा है कि जल्दी जाने का उनका कोई मूड हो … सामने वाली कुर्सियों पर कुछ लोग गमछी रख कर सीट छेक चुके हैं।
  4. पवित्र रमजान के समय हमारे नेता टोपी , पायजामा-कुरता , लाल या काली गमछी पहन-ओढ कर नमाजियों के संग एकता जताने के लिए जुट जाते हैं व उनके पवित्र रोजा खोलने को इफतार पार्टी बना डालते हैं .
  5. लालमोहर ने हिरामन की गमछी सूँघ ली - ‘ ए-ह ! ' हिरामन चलते-चलते रूक गया - ‘ क्या करें लालमोहर भाई , जरा कहो तो ! बड़ी जिद्द करती है , कहती है , नौटंकी देखना ही होगा।
  6. अपनी फटी हुई गमछी पहन करशहर आ गयाबूधन बिरिजियाजब शहर में चारों ओर छाई थीऐश्वर्या रायऔर उनका नौलखा परिधानराजपथ पर सवारी निकली थीऐश्वर्या राय कीफुटपाथों पर कटआऊट्स खड़े थेमैदानों में मंच सजा थाऐश्वर्या राय काटीवी स्क्रीन से निकल करहर घर में मटक रही थी
  7. अपनी फटी हुई गमछी पहन करशहर आ गयाबूधन बिरिजियाजब शहर में चारों ओर छाई थीऐश्वर्या रायऔर उनका नौलखा परिधानराजपथ पर सवारी निकली थीऐश्वर्या राय कीफुटपाथों पर कटआऊट्स खड़े थेमैदानों में मंच सजा थाऐश्वर्या राय काटीवी स्क्रीन से निकल करहर घर में मटक रही थी . ..
  8. Prabhat Ranjan जी भी कई बार कह चुके हैं एक बार वे उदय जी के घर गए तो वे भीगी गमछी पहनकर हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे , और पूछने पर उन्होंने बताया था कि हाँ उन्हें एक भगवान् की जरुरत है क्योंकि वे पत्नी के सामने नहीं रो सकते।
  9. गाड़ी चले के रहे तब तक एगो आदमी अइलन . .. अरे रूक रू क. .. हमरो चले के बा ... ड्राइवर बोलल ... आईं मलिका र. .. सफेद पायजामा कुरता कान्ह पर गमछी लेले उ आदमी पान खात अउर मोंछ पर ताव दे रहे ... हम त आगे हीं बइठब ....
  10. अभी तो , तीन दिन-तीन रात अनवरत चलने से तुम्बे से सूज गए पैरों की चीत्कार है परसों दोपहर को निगले गए मड़ुए की रोटी की रिक्तता है फटी गमछी और मैली धोती के टुकड़े बूढ़ों की फटी बिवाइयों के बहते खून रोकने में असमर्थ हैं निढ़ाल होती देह है किन्तु पिछुआती बारूदी गंध गोदावरी पार ठेले जा रही है
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