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कुजा meaning in Hindi

pronunciation: [ kujaa ]
कुजा meaning in English

Examples

  1. खोजने वाला हो तो मैं तो पल भर की तलाश में मिल जाऊंगा। ' - कबीर तसव्वुफ़ की परम्परा में और उर्दू और फ़ारसी शायरी में इस ख़याल की मिसालें देखें : ऐ तमाशागाहे-आलम रूए-तुस्त, तू कुजा बहरे तमाशा मी रवी।
  2. अगर हम चिराग़-ए-रुखे ज़ेबा ( चिराग-ए-रोशन)) लेकर ढूढने भी निकलें तो मुश्ताक़ यूसूफ़,कलीम अहमद अज़ीज़,शम्सुल रहमान फ़ारुक़ी,और २-३ मजीद (अतिरिक्त) नामोंके अलावा आप किसी बन्दपा(पूज्य) शायर,अदीब ,नक़्क़ाद या अफ़सानानिगार का नाम नहीं ले सकेंगे।' “ ब-बीं तफ़ावुत-ए-रेह-अज़ कुजा अस्त ता ब कुजा”
  3. उसके बाद से जब भी लोगों को कोई ऐसा व्यक्ति दिखाई देता है जो किसी पिछड़े स्थान पर जीवन व्यतीत कर रहा है या कम आय के साथ भी प्रसन्न है तो कहते हैं कि कुजा ख़ुश अस्त ? आंजा के दिल ख़ुश अस्त।
  4. तेरी बातों से पड़ी जाती है कानों में ख़राश ' ' कुफ्र-ओ-ईमां '' '' कुफ्र-ओ-ईमां '' ता कुजा ख़ामोशबास हुब् बे-इंसां , ज़ौक़े-हक़ , ख़ौफ़े-ख़ुदा कुछ भी नहीं तेरा ईमां चंद वहमों के सिवा कुछ भी नहीं तेरे झूठे कुफ़्र-ओ-ईमां को मिटा डालूंगा मैं हड्डियां इस कुफ़्र-ओ-ईमां की चबा डालूंगा मैं
  5. उसके बाद से जब भी लोग किसी एसे को देखते हैं कि जो अनुचित स्थान पर जीवन व्यतीत करता है या उसकी आय कम है और बड़ी कठिनाइयों में जीवन व्यतीत करता हो फिर ही वह प्रसन्न हो तो एसे में यह कहावत कही जाती है कि , कुजा खुश अस्त , आन्जा के दिल ख़ुश अस्त।
  6. उसके बाद से जब भी लोग किसी एसे को देखते हैं कि जो अनुचित स्थान पर जीवन व्यतीत करता है या उसकी आय कम है और बड़ी कठिनाइयों में जीवन व्यतीत करता हो फिर ही वह प्रसन्न हो तो एसे में यह कहावत कही जाती है कि , कुजा खुश अस्त , आन्जा के दिल ख़ुश अस्त।
  7. सिलसिला छिड़ गया जब यास के फ़साने काशमा गुल हो गयी दिल बुझ गया परवाने कावाए हसरत कि ताल्लुक़ न हुआ दिल को कहींन तो काबे का हुआ मैं न तो सनम-खाने काखिल्वत-ए-नाज़ कुजा और कुजा अहल-ए-हवसज़ोर क्या चल सके फ़ानूस से परवाने कावाह किस नाज़ से आता है तेरा दौर-ए-शबाबजिस तरह दौर चले बज़्म में परवाने का
  8. सिलसिला छिड़ गया जब यास के फ़साने काशमा गुल हो गयी दिल बुझ गया परवाने कावाए हसरत कि ताल्लुक़ न हुआ दिल को कहींन तो काबे का हुआ मैं न तो सनम-खाने काखिल्वत-ए-नाज़ कुजा और कुजा अहल-ए-हवसज़ोर क्या चल सके फ़ानूस से परवाने कावाह किस नाज़ से आता है तेरा दौर-ए-शबाबजिस तरह दौर चले बज़्म में परवाने का
  9. चण्डीगढ़ , 1 अप्रैल ( नरेन्द्र नूनियाँ / हरभगवान भारद्वाज ) : अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव व हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रान्तीय अध्यक्ष बजरंग दास गर्ग , स्वर्णकार एसो . के प्रधान रामनिवास सोनी व हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश उपप्रधान व सरार्फा एसो . के संरक्षक अशोक वर्मा ( काका ) ने संयुक्त जारी बयान में बताया कि 2 अप्रैल 2012 को कुजा महाजनी चांदनी चौक , दिल्ली में आल इन्डिया सरार्फा एसो . की एक अवश्यक बैठक बुलाई गई है।
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