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कुईं meaning in Hindi

pronunciation: [ kueen ]
कुईं meaning in English

Examples

  1. कुआं भूजल तक पहुँचने या पाने के लिए बनता है , पर कुईं भूजल से ठीक वैसे नहीं जुड़ती जैसे कुआं , बल्कि कुईं वर्षा के जल को बड़े विचित्र ढंग से समेटती और सँजोती है।
  2. असल में कुईं के फूलों की तुलना में खरबत की झील और खरबत पहाड़ के बीच के मैदान में ललछौहें रंग के जो गोल-गोल पत्थर पड़े थे , उनमें हम लोगों का मन ज्यादा अटका हुआ था।
  3. मैं सिर्फ ' ' भ्रमर कोई कुमुदिनी पर मचल बैठा तो हंगामा '' पर बात करता हूँ ! ' कुमुदिनी ' सफ़ेद कुईं फूल है , रात में चन्द्र-प्रकाश में खिलता है ! इस हेतु चंद्रमा कुमुदिनी-पति भी कहा जाता है !
  4. “ ( पृ-314) लेखिका ने इसमें पानी से निर्मित राजस्थान की सामाजिकता, यहाँ की मान्यताएं, पानी का शास्त्र, कुईं बनाने की विधि, इसके पौराणिक संदर्भ, पानी से होने वाले रोग, लोगों की बेहाली का जो चित्र खींचा है वह यथार्थ का ऐसा चिट्ठा है जिसका न तो इन्कार किया जा सकता है और नही उससे मुँह चुराया जा सकता है।
  5. झील में कुमुदिनी के फूलों की कमी नहीं थी- कुमुदिनी को वहां के लोग कुईं कहते अर्थात् मुझसे पहले भी मेरी वय के लड़के वहां पहुंचे थे , उन्होंने जल में अपना प्रतिबिंब निहारा था और इस प्रतिबिंब को छूने या चूमने के लिए नीचे झुके थे और गुड़प- उनकी वहां जल समाधि हो गई होगी और कालांतर में वहां कुईं का फूल उग आया होगा।
  6. झील में कुमुदिनी के फूलों की कमी नहीं थी- कुमुदिनी को वहां के लोग कुईं कहते अर्थात् मुझसे पहले भी मेरी वय के लड़के वहां पहुंचे थे , उन्होंने जल में अपना प्रतिबिंब निहारा था और इस प्रतिबिंब को छूने या चूमने के लिए नीचे झुके थे और गुड़प- उनकी वहां जल समाधि हो गई होगी और कालांतर में वहां कुईं का फूल उग आया होगा।
  7. ( पृ- 314 ) लेखिका ने इसमें पानी से निर्मित राजस्थान की सामाजिकता , यहाँ की मान्यताएं , पानी का शास्त्र , कुईं बनाने की विधि , इसके पौराणिक संदर्भ , पानी से होने वाले रोग , लोगों की बेहाली का जो चित्र खींचा है वह यथार्थ का ऐसा चिट्ठा है जिसका न तो इन्कार किया जा सकता है और नही उससे मुँह चुराया जा सकता है।
  8. ( पृ- 314 ) लेखिका ने इसमें पानी से निर्मित राजस्थान की सामाजिकता , यहाँ की मान्यताएं , पानी का शास्त्र , कुईं बनाने की विधि , इसके पौराणिक संदर्भ , पानी से होने वाले रोग , लोगों की बेहाली का जो चित्र खींचा है वह यथार्थ का ऐसा चिट्ठा है जिसका न तो इन्कार किया जा सकता है और नही उससे मुँह चुराया जा सकता है।
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