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कुंचित meaning in Hindi

pronunciation: [ kunechit ]
कुंचित meaning in English

Examples

  1. थोड़ी देर बाद एक धमकी से चीख दब गयी , फिर कोठे की मुँडेर पर कुसुम का चेहरा आ गया , जिसके ओठ अब भी सुबकियों से कुंचित हो-हो उठते थे , पर जिसकी आँखें निर्निमेष नीचे देख रही थीं।
  2. कुछ सोचने के बाद उसने गर्दन कुछ टेढ़ी की और बिली को भवें कुंचित कर , सीधी , सतर दृष्टि से देखते हुये शांत , गंभीर स्वर में कहा , “ आइ विल अक्सेप्ट जस्ट अन अपोलोजी फ़्राम यू , बिली ” ।
  3. उनको आप जहां भी देखें और जब भी देखें , उनकी भृकुटियां तनी हुई हैं , मुट्ठियां बंधी हुई हैं , ललाट कुंचित हैं , अधरोष्ठ दांतों की उपान्तरेख के समानान्तर जमा हुआ है - मानो ये अभी दुनिया को भस्म कर देना चाहते हैं।
  4. मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे अपराध पर विचार करते समय भवें कुंचित कर , अपनी नीली आँखों की प्रखर दृष्टि को मुझ पर केंद्रित कर वह यही कहेगा , “ आइ विल जस्ट अक्सेप्ट अन अपालाजी , फ़्राम यू , मिसेज़ कुमार ” ।
  5. अब अकेला ही पसरा हूँ अपने ख्यालों के साथ संवेदिक स्मरणशक्ति प्रयत्न करती है तुम्हे फिर जिलाने को अवयव उलझे , कुंचित , आश्वासक हैं शायद मैं भी धीरे धीरे खो जाऊं निद्रा में और खो जाऊं महत्वाकांशी स्वप्न नगरी में वापस तुम्हारे पा स. ..
  6. अब अकेला ही पसरा हूँ अपने ख्यालों के साथ संवेदिक स्मरणशक्ति प्रयत्न करती है तुम्हे फिर जिलाने को अवयव उलझे , कुंचित , आश्वासक हैं शायद मैं भी धीरे धीरे खो जाऊं निद्रा में और खो जाऊं महत्वाकांशी स्वप्न नगरी में वापस तुम्हारे पा स. ..
  7. झारखण्ड के जंगलों जैसी दाढ़ी वाले एंकर को आप इस तरह भी पहचान सकते हैं कि वह महादेवी वर्मा जैसा चश्मा लगाए रहता था - आप कह सकते हैं वह छायावादी लगता था वैसा ही रोमांटिक वैसा ही आल बाल जाल वैसा ही केश कुंचित भाल
  8. मूझे पता चला मधुरे तू भी पागल बन रोती है , जो पीङा मेरे अंतर में तेरे दिल में भी होती है लेकिन इन बातों से किंचिंत भी अपना धैर्य नही खोना मेरे मन की सीपी में अब तक तेरे मन का मोती है, ओ सहज सरल पलकों वाले! ओ कुंचित घन अलकों वाले!
  9. किन्तु तपोबल से अपनाया हुआ अन्धापन भी दूर होता ही है-उर्वशी और तिलोत्तमा को देखकर नहीं , ऊब से फैले हुए जमुहाए मुख-विवरों को और तिरस्कार से कुंचित भवों को देखकर ! एक क्षण ऐसा आया कि शेखर समूची सभा की उपेक्षा की और अनदेखी नहीं कर सका-अपनी बात की गति दूनी तेज करके भी नहीं ...
  10. कानन कुंडल कुंचित केसा॥ ४ ॥ आप महान वीर और बलवान हैं , वज्र के समान अंगों वाले , ख़राब बुद्धि दूर करके शुभ बुद्धि देने वाले हैं , आप स्वर्ण के समान रंग वाले , स्वच्छ और सुन्दर वेश वाले हैं , आपके कान में कुंडल शोभायमान हैं और आपके बाल घुंघराले हैं॥ हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै।
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