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किंकर्त्तव्यविमूढ़ meaning in Hindi

pronunciation: [ kinekrettevyevimudh ]
किंकर्त्तव्यविमूढ़ meaning in English

Examples

  1. जिस समय प्रभाष जोशी जी के निधन का समाचार आया उस समय मेरी मनस्थिति काफी किंकर्त्तव्यविमूढ़ हो गई लेकिन यह विश्वास अभी भी नहीं हो पा रहा है कि पत्रकारिता के महान विजेता प्रभाष जोशी अब हमारे बीच मे नहीं हैं।
  2. जिस समय प्रभाष जोशी जी के निधन का समाचार आया उस समय मेरी मनस्थिति काफी किंकर्त्तव्यविमूढ़ हो गई लेकिन यह विश्वास अभी भी नहीं हो पा रहा है कि पत्रकारिता के महान विजेता प्रभाष जोशी अब हमारे बीच मे नहीं हैं।
  3. एसके जूते का नाम था अविमृष्यकारिता , उसकी छतरी का नाम था प्रत्युत्पन्नमतित्व , उसके लोटे का नाम था परमकल्याणवरषु - पर जैसे ही उसने अपने घर का नाम रखा किंकर्त्तव्यविमूढ़ - बस एक भूकंप आया और घर वर सब गिर पड़ा।
  4. उसने झटपट दुकान खोली और रेणु के हाथों में शराब की कुछ बोतले थमाते हुए पूछा- तीसरी कसम के नायक हीरामन के जुबान पर सादगी भरे लहजे में लजालू अभिव्यक्ति सूचक इस्स्स चढ़ाने की सूझी कैसे आपको . रेणु किंकर्त्तव्यविमूढ़ , क्या जवाब देते..बस हंसते रहे………
  5. परन्तु जहाँ पहले जब उनके घर में दुर्भाग्य से कोई प्रेमी जन्म लेता / लेती थी तो वे किंकर्त्तव्यविमूढ़ से हो असहाय से हो जाते थे या सदमे के मारे कुछ अधिक नहीं कर पाते थे वहीं अब वे लामबद्ध होकर एक सोची समझी नीति के अन्तर्गत उनकी हत्या कर देते हैं।
  6. पहले से ही गहराते आन्तरिक संकट और 1985 - 90 के बीच विश्व स्तर पर होने वाले महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों ( जैसे रूसी सामाजिक साम्राज्यवादी खेमे और युगोस्लाविया का बिखराव , साम्राज्यवादी देशों में संकट का गहराते जाना और तीसरी दुनिया के देशों का कर्ज जाल में फँसना ) ने यहाँ के शासक वर्गों और उनके रहनुमाओं को किंकर्त्तव्यविमूढ़ बना दिया।
  7. अंगारों के घने ढेर पर यद्यपि सभी खड़े हैं किन्तु दम्भ भ्रम स्वार्थ द्वेषवश फिर भी हठी खड़े हैं क्षेत्र विभाजित हैं प्रभाव के बंटी धारणा-धारा वादों के भीषण विवाद में बंटा विश्व है सारा शक्ति संतुलन रूप बदलते घिरता है अंधियारा किंकर्त्तव्यविमूढ़ देखता विवश मनुज बेचारा झाड़ कंटीलों की बगिया में श्रीहत फूल पड़े हैं अंगारों के बने ढेर पर . ....
  8. चरित्र के प्रारंभिक लक्षण- सबको खुश रखने की चाहत होना , अन्य लोगों तथा संबंधियों पर अत्यधिक निर्भरता, स्वयं तथा जीवन के मध्य असंतुलन, अस्थिर चित्त, अनिर्णायक, ढुलमुल प्रवृत्ति, दो पाटों के मध्य पिसना, या तो स्वयं को या फिर भागीदार को अत्यधिक महत्व देना, शारीरिक जीवन और आत्मिक जीवन के मध्य किंकर्त्तव्यविमूढ़, स्वयं की अच्छाइयों की जानकारी न होना, यह अहसास करने में असमर्थ होना कि आपका भागीदार स्वयं की अचेतना को अपने व्यवहार में अभिव्यक्त करता है।
  9. गज समस्या का उठाता सूंढ़ है जीविका का प्रश्न पूरा रूढ़ है एक भद्दा अंग भी ढंकता नहीं चीथड़ों की हो गई हड़ताल मौत की मछली फंसाने के लिए भूख बुनती हड्डियों के जाल वैताल सा निर्वाह लटका गूढ़ है हर शहर है बागपत की आत्मा अलीगढ़ , दिल्ली , मुरादाबाद , गांव की हर गली में है घूमता जातीयता का क्रूरतम उन्माद हार बैठा मूढ़ छप्पर ढूंढ़ है राजनैतिक दल जलाने को खड़े आसाम की यह अर्द्ध जीवित लाश आदमी के तांडव की देख क्षमता तड़तड़ा कर टूटता आकाश बुद्धिजीवी किंकर्त्तव्यविमूढ़ है *** *** ***
  10. फिर बाबा ने उसी सटके का एक सिरा पकड़कर नाभि में लगाया और दूसरा सिरा जमीन पर रख उसे अपने पेट से जोर-जोर से दबाने लगे | सटका दो-तीन फुट लम्बा था | यह दृश्य देखकर सब लोग और भी ज्यादा डर गये कि यदि यह सटका पेट में घुस गया तो ? अब क्या किया जाये , किसी की समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था | बाबा सटके के और ज्यादा पास होते जा रहे थे | यह देख सब लोग किंकर्त्तव्यविमूढ़ थे और भय-मिश्रित आश्चर्य से बाबा की इस लीला को देख रहे थे |
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