उपस्थ meaning in Hindi
pronunciation: [ upesth ]
Examples
- राजसिक अहंकार के द्वारा अग्नि , इन्द्र, भगवान विष्णु, मित्र और प्रजापति का प्रादुर्भाव हुआ जो वाक्, हस्थ, पाद, पायु, और उपस्थ -इन कर्मेन्द्रियों के अधिष्ठातृ देवता हैं।
- नयी हँसी ' - महासंघ का मोटा अध्यक्ष / धरा हुआ गद्दी पर खुजलाता है उपस्थ / सर नहीं , / हर सवाल का उत्तर देने से पेश्तर।
- 10 . सात्विक अहंकार से ही उत्पन्न पाँच कर्मेन्द्रियाँ 1 . वाक , 2 . पाणि , 3 . पाद , 4 . पायु और 5 . उपस्थ हैं।
- 10 . सात्विक अहंकार से ही उत्पन्न पाँच कर्मेन्द्रियाँ 1 . वाक , 2 . पाणि , 3 . पाद , 4 . पायु और 5 . उपस्थ हैं।
- सात्विक अहंकार से उत्पन्न पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ श्रोत्र , त्वक , चक्षु , रसन और प्राण हैं तथा पाँच कर्मेन्द्रियाँ वाक , पाणि , पाद , पायु और उपस्थ हैं।
- अपान - > गुदा , और उपस्थ में ( रज , वीर्य , गर्भ , मॉल , मूत् र.क ो निकालना ) समान - > शरीर के मध्यभाग - नाभि में .
- यही नहीं , इन स्थूल तत्वों से पौष्टिक पदार्थों के अवशोषण के पश्चात् जो कुछ भी मल बचता है , उसे बाहर निकालने के लिए उपस्थ और गुदा इंद्रिय की भी व्यवस्था प्रकृति ने की है।
- दाहिना पैर घुटने से मोड़कर एड़ी उपस्थ और गुदा के मध्य के दाहिने भाग में और बायां पैर मोड़कर एड़ी सीवन के बायें भाग में इस प्रकार रखें कि दोनों पैर के तलवे एक दूसरे को लगकर रहें।
- १ . वाक् ( वाणी ) , २ . हस्त , ३ . उपस्थ , ४ . गुदा एवं ५ . पाद ( पैर ) ये पाँच कर्मेन्द्रियाँ तथा एक मन जो ज्ञानेन्द्रि एवं कर्मेन्द्रि दोनों है , उत्पन्न होते हैं ।
- १ . वाक् ( वाणी ) , २ . हस्त , ३ . उपस्थ , ४ . गुदा एवं ५ . पाद ( पैर ) ये पाँच कर्मेन्द्रियाँ तथा एक मन जो ज्ञानेन्द्रि एवं कर्मेन्द्रि दोनों है , उत्पन्न होते हैं ।