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उपपुराण meaning in Hindi

pronunciation: [ upepuraan ]
उपपुराण meaning in English

Examples

  1. देवर्षि नारद जी के द्वारा रचित अनेक ग्रन्थों का उल्लेख मिलता है ः- जिसमें प्रमुख हैं नारद पंचरात्र , नारद महापुराण , वृहन्नारदीय उपपुराण , नारद स्मृति , नारद भक्ति सूत्र , नारद परिव्राजकोपनिषद् आदि।
  2. कुछ लोगों का कहना है कि वायुपुराण ही शिवपुराण है क्योंकि आजकल जो शिवपुराण नामक पुराण या उपपुराण है उसकी श्लोक संख्या २ ४ , ००० नहीं है , केवल ७ , ००० ही है ।
  3. पुराणों को निम्नलिखित चार श्रेणियों में विभक्त किया गया है- * महापुराण - प्रमुख पुराण , * उपपुराण - अन्य पुराण, * स्थलपुराण - विशिष्ट स्थलों से संबंधित पुराण और * कुलपुराण - वंशों से संबंधित पुराण।
  4. नारद जी का अनेक ग्रंथों में वर्णन प्राप्त होता है तथा नारद जी के ज्ञान संबंधी अनेक धर्म ग्रंथ देखे जा सकते हैं जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं - नारद पांचरात्र , नारद महापुराण , नारद के भक्तिसूत्र , नारद-परिव्राजकोपनिषद , बृहन्नारदीय उपपुराण संहिता अट्ठारह महापुराणों में एक नारदोक्त पुराण , बृहन्नारदीय पुराण के नाम से विख्यात है .
  5. जहाँ पंडित लोग विद्यार्थियों को ऋक् , यजुः साम , अथर्व , महाभारत , रामायण , पुराण , उपपुराण , स्मृति , न्याय , व्याकरण , सांख्य , पातंजल , वैशषिक , मीमांसा , वेदांत , शैव , वैष्णव , अलंकार , साहित्य , ज्योतिष इत्यादि शास्त्रा सहज पढ़ाते हुए मूर्तिमान गुरु और व्यास से शोभित काशी की विद्यापीठता सत्य करते हैं।
  6. जहाँ पंडित लोग विद्यार्थियों को ऋक् , यजुः साम , अथर्व , महाभारत , रामायण , पुराण , उपपुराण , स्मृति , न्याय , व्याकरण , सांख्य , पातंजल , वैशषिक , मीमांसा , वेदांत , शैव , वैष्णव , अलंकार , साहित्य , ज्योतिष इत्यादि शास्त्रा सहज पढ़ाते हुए मूर्तिमान गुरु और व्यास से शोभित काशी की विद्यापीठता सत्य करते हैं।
  7. यह ऋग्वेद के प्रथम मंडल के प्रथम सूक्त में ही स्पष्ट कर दिया गया है और इसके स्पष्टीकरण के लिए चरों वेद , अठारह पुराण , ब्राह्मण , उपनिषद , उपपुराण , रामायण , महाभारत इत्यादि ग्रंथों कि रचना कि गई , फिर भी या तो प्रश्न उलझता ही गया अथवा उसे जानबूझ कर राक्षसी उद्देश्यों कि प्राप्ति के लिए उलझा दिया गया | वैसे भी स्थूल बुद्धि , सूक्ष्म चीजों को कैसे ग्रहण कर सकती है ?
  8. यह ऋग्वेद के प्रथम मंडल के प्रथम सूक्त में ही स्पष्ट कर दिया गया है और इसके स्पष्टीकरण के लिए चरों वेद , अठारह पुराण , ब्राह्मण , उपनिषद , उपपुराण , रामायण , महाभारत इत्यादि ग्रंथों कि रचना कि गई , फिर भी या तो प्रश्न उलझता ही गया अथवा उसे जानबूझ कर राक्षसी उद्देश्यों कि प्राप्ति के लिए उलझा दिया गया | वैसे भी स्थूल बुद्धि , सूक्ष्म चीजों को कैसे ग्रहण कर सकती है ?
  9. में सांख्य को निरीश्वर ही कहा गया है तथा पराशर उपपुराण के कुछ श्लोकों के आधार पर भी सांख्य को अन्य शास्त्रों के साथ कुछ अंशों में श्रुति विरोधी और सेश्वर ब्रह्म मीमांसा शास्त्र को सर्वांश में श्रुतिसम्मत कहने से सांख्य के अनीश्वरवाद का आभास मिल जाता है तथापि कुर्म आदि पुराणों तथा पराशर आदि उप पुराण का समय बहुत बाद का होने के कारण ये कथन बौद्ध दर्शन से प्रभावित सांख्य के विषय में किये गए प्रतीत होते हैं |
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