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आकाशमंडल meaning in Hindi

pronunciation: [ aakaashemnedl ]
आकाशमंडल meaning in English

Examples

  1. लेकिन मणिमहेश में कैलाश पर्वत के पीछे से जब सूर्य उदय होता है तो सारे आकाशमंडल में नीलिमा छा जाती है और सूर्य के प्रकाश की किरणें नीले रंग में निकलती हैं जिनसे पूरा वातावरण नीले रंग के प्रकाश से ओतप्रोत हो जाता है।
  2. यदि गहराई से देखें , तो पायेंगें कि हमारे आसपास जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह सब एक अदृश्य शक्ति द्वारा नियन्त्रित है, यहाँ तक कि स्वयं काल(समय) भी. आकाशमंडल में ग्रहों के द्वारा उनके अपनी कक्षा में परिभ्रमण की गति के अनुसार हर क्षण नये-नये संयोग बनते रहते हैं.
  3. फिर एक दिन बरसात में नीले- नीले बादलों से आकाशमंडल के छा जाने पर बड़ी- बड़ी बूँदों से मूसलाधार बारिश बरसने लगा और फिर वृक्ष के नीचे बैठे हुए बंदरों को ठंडी के मारे थर थर काँपते हुए देख कर पक्षियों ने दया से विचार कहा- अरे भाई बंदरों , सुनों :-
  4. चलिए , अब बात करते हैं भिन्न भिन्न गंडमूल नक्षत्रों में जन्म लेने पर जीवन पर पडने वाले प्रभाव के बारे में. आ रम्भ करते हैं अश्विनी नक्षत्र से:- अश्विनी नक्षत्र:- अश्विनी नक्षत्र 3 तारों का समूह है, जो आकाशमंडल में जनवरी के प्रारम्भ में, सूर्यास्त के बाद, सिर पर दिखाई देता है.
  5. फिर एक दिन बरसात में नीले- नीले बादलों से आकाशमंडल के छा जाने पर बड़ी- बड़ी बूँदों से मूसलाधार बारिश बरसने लगा और फिर वृक्ष के नीचे बैठे हुए बंदरों को ठंडी के मारे थर थर काँपते हुए देख कर पक्षियों ने दया से विचार कहा- अरे भाई बंदरों , सुनों : -
  6. अब आते मैं मुद्दे की बात पर , हमारे सबसे पास के तारे अल्फा सेंतुरी का प्रकाश हम तक लगभग ४ वर्ष मैं आता है, तो जो ब्रह्माण्ड हम आज देखते हैं वो तो जाने कितने लाख प्रकाश वर्ष बाद हम तक पहुंचा है, मतलब हम कई लाख वर्ष पहले के आकाशमंडल को देखते हैं, तो हम जो
  7. इटली के ज्योतिषी गैलिलीओं गैलिली ( सन् 1564 - 1642 ) ने सन् 1612 में आकाशमंडल के अध्ययन में पहली बार दूरदर्शी का प्रयोग किया ; किंतु जब तक दूरदर्शी की रचना में समुचित उन्नति नहीं हुई , इसके उपयोग से भी ग्रहपृष्ठों के अध्ययन के अतिरिक्त कोई और विशेष महत्वपूर्ण सूचना न प्राप्त की जा सकी।
  8. भरत ने सोलह भूमिचारियों और सोलह आकाशचारियों का वर्णन करके दस आकाशमंडल और उस भौम मंडल के अभिनय का परिचय देते हुए गति के अभिनय का विस्तार से वर्णन किया है कि किस भूमिका के व्यक्ति की मंच पर किस रस में , कैसी गति होनी चाहिए, किस जाती, आश्रम, वर्ण और व्यवसाय वाले को रंगमंच पर कैसे चलना चाहिए तथा रथ, विमान, आरोहण, अवरोहण, आकाशगमन आदि का अभिनय किस गति से करना चाहिए।
  9. भरत ने सोलह भूमिचारियों और सोलह आकाशचारियों का वर्णन करके दस आकाशमंडल और उस भौम मंडल के अभिनय का परिचय देते हुए गति के अभिनय का विस्तार से वर्णन किया है कि किस भूमिका के व्यक्ति की मंच पर किस रस में , कैसी गति होनी चाहिए, किस जाती, आश्रम, वर्ण और व्यवसाय वाले को रंगमंच पर कैसे चलना चाहिए तथा रथ, विमान, आरोहण, अवरोहण, आकाशगमन आदि का अभिनय किस गति से करना चाहिए।
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