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आकबत meaning in Hindi

pronunciation: [ aakebt ]
आकबत meaning in English

Examples

  1. दूसरे सज्जन , जिनकी संगत में मैं ज्ञान की ग़ैर-हाज़िरी को भुलाये रखता था , रमेन्द्र त्रिपाठी थे , जो इन दिनों प्रशासनिक सेवाओं में शामिल हो कर उत्तर प्रदेश जैसे परम भ्रष्ट राज्य में अपनी आकबत बचाये रखने के फेर में इतने मुब्तिला रहते हैं कि कविता से केवल पढ़ने का रिश्ता रखते हैं।
  2. जान बचा कर अपने ससुर अबुबक्र के साथ पैदल मक्का से मदीना भाग कर आने का नाम हिजरत दिया गया और इस पर एक तारीखी सदी हिजरी बन गई मगर इनका पयंबरी नजरिया मुलाहेज़ा हो कि मुहाजिरीन की नियत क्या हो ? औरत या दुन्या ? दीन और आकबत नदारद जिस के दीवाने मुस्लमान है .
  3. इसी प्रकार मानूस ( परिचित ) , पिन्हां ( निहित ) , ताज़ीम ( सम्मान ) , आकबत ( परलोक ) , पैरहन ( वस्त्र ) , मुतमइन ( सन्तुष्ट ) , सबा ( समीर ) , शफक ( उषा ) , मुअज़्ज़न ( अज़ान देने वाला ) , अहले-मकतब ( स्कूल के विद्यार्थी ) , अज़मते - मुल्क ( देश-गौरव ) आदि कितने ही क्लिष्ट तथा दुर्बोध शब्द दुष्यन्त ने नि : संकोच अपनी गज़लों में प्रयुक्त किए हैं।
  4. इसी प्रकार मानूस ( परिचित ) , पिन्हां ( निहित ) , ताज़ीम ( सम्मान ) , आकबत ( परलोक ) , पैरहन ( वस्त्र ) , मुतमइन ( सन्तुष्ट ) , सबा ( समीर ) , शफक ( उषा ) , मुअज़्ज़न ( अज़ान देने वाला ) , अहले-मकतब ( स्कूल के विद्यार्थी ) , अज़मते - मुल्क ( देश-गौरव ) आदि कितने ही क्लिष्ट तथा दुर्बोध शब्द दुष्यन्त ने नि : संकोच अपनी गज़लों में प्रयुक्त किए हैं।
  5. पर हम तो दुनियादार हैं , हमारा काम तो तभी चलता है जब कपटदेव की मूर्ति हृदय पट में संस् थापित किए हुए उनके पुजारियों की गोष् ठी का सुख उठाते हुए मजे में दिन बिताते रहें और इसमें यदि विचारशक्ति आ सतावै तो उसके निवारणार्थ इस मंत्र का स् मरण कर लिया करें कि ' आकबत की खबर खुदा जाने , अब तो आराम से गुजरती है ' और सोच देखिए तो ऐसों से आगे के लिए क् या बुराई है।
  6. पर हम तो दुनियादार हैं , हमारा काम तो तभी चलता है जब कपटदेव की मूर्ति हृदय पट में संस् थापित किए हुए उनके पुजारियों की गोष् ठी का सुख उठाते हुए मजे में दिन बिताते रहें और इसमें यदि विचारशक्ति आ सतावै तो उसके निवारणार्थ इस मंत्र का स् मरण कर लिया करें कि ' आकबत की खबर खुदा जाने , अब तो आराम से गुजरती है ' और सोच देखिए तो ऐसों से आगे के लिए क् या बुराई है।
  7. …… . बाबुजी ने भी कहा पढ़ो ! उन्होंनें दू : सह दुःख झेले , किसानी से लेकर मास्टरी फिर एक ड्राफ्ट्समैन से उपकारी देवता बने , जिन्हें हमेशा अपनी मिट्टी से प्रेम रहा ! उनकी वाणी थी : “ आदमी के आपन आकबत कभी ना भूले के चाहीं ! ” मगर अफ़सोस हमें इस गौरव को दिल से महसूस करने से पहले ही निरंकुश दुनियां ने हमसे हमारा हक छीन लिया , फिर भी हाथ में दोना लेकर हमारे ही द्वार पर मँगते बने खड़े -दुर्भिक्ष- की परछाईं हैं !
  8. अगर तुम में से बीस आदमी साबित क़दम होंगे तो दो सौ पर ग़ालिब आ जाएँगे और अगर तुम में सौ होंगे तो एक हज़ार पर ग़ालिब आ जाएंगे . '' सूरह -इंफाल - ८ नौवाँ परा आयत ( ६ ४ ) मुहम्मदी अल्लाह अपने रसूल को गणित पढ़ा रहा है , मुसलमान कौम उसका हाफिज़ा करके अपने बिरादरी को अपाहिज बना रही और इन इंसानी खून खराबे की आयातों से अपनी आकबत सजा और संवार रही है , अपने मुर्दों को बख्शुवा रही है , इतना ही नहीं इनके हवाले अपने बच्चों को भी कर रही है .
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