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अवह meaning in Hindi

pronunciation: [ avh ]
अवह meaning in English

Examples

  1. चाहे अवह शब्द में स्वयं कोई ऐसा संकेत न हो , जिसके आधार पर हम इसे शौरसेनी का परवर्ती रुप मानें, फिर भी इतना तो कहा जा सकता है कि यह अपभ्रंश के विकास की परवर्ती भाषा का वाचक शब्द है, और यह भी स्पष्ट है कि यह सार्वजनीन रुप था।
  2. अगर सरकार वास्तव में इस खेल में शामिल है , अगर अवह खुद को उखाड़ फेंकने में सहयोग कर रहही है, अगर जन लोकपाल उसके कारपोरेट समर्थक एजेंडा और विश्व-बैंक निर्देशित सुधारों के कार्यक्रमों के अनुकूल है, तो क्यों नहीं उसने शुरू में ही जन लोकपाल के मसौदे को स्वीकार कर लिया?
  3. वर्षकृत्य आदि ग्रन्थ जहाँ एक ओर इनके गहन पाण्डित्य के साथ इनके युगद्रष्टा एवं युगस्रष्टा स्वरुप का साक्षी है तो दूसरी तरफ कीर्तिलता , एवं कीर्तिपताका महाकवि के अवह भाषा पर सम्यक ज्ञान के सूचक होने के साथ-साथ ऐतिहासिक साहित्यिक एवं भाषा सम्बन्धी महत्व रखनेवाला आधुनिक भारतीय आर्य भाषा का अनुपम ग्रन्थ है।
  4. त्य आदि ग्रन्थ जहाँ एक ओर इनके गहन पाण्डित्य के साथ इनके युगद्रष्टा एवं युगस्रष्टा स्वरुप का साक्षी है तो दूसरी तरफ कीर्तिलता , एवं कीर्तिपताका महाकवि के अवह भाषा पर सम्यक ज्ञान के सूचक होने के साथ-साथ ऐतिहासिक साहित्यिक एवं भाषा सम्बन्धी महत्व रखनेवाला आधुनिक भारतीय आर्य भाषा का अनुपम ग्रन्थ है।
  5. चाहे अवह शब्द में स्वयं कोई ऐसा संकेत न हो , जिसके आधार पर हम इसे शौरसेनी का परवर्ती रुप मानें , फिर भी इतना तो कहा जा सकता है कि यह अपभ्रंश के विकास की परवर्ती भाषा का वाचक शब्द है , और यह भी स्पष्ट है कि यह सार्वजनीन रुप था।
  6. * जो दिल्ली पुलिस हो कर अच्छी तरह जानते हैं कि दिल्ली के ऑटो न तो सवारी की बतायी जगह जाते हैं , न ही सेफ हैं , फिर भी “ लड़की बस में क्यों गयी ऑटो में क्यों नहीं ” का प्रलाप करते हैं , अवह भी एक लड़के के साथ , अकेली नहीं थी वह ।
  7. * जो दिल्ली पुलिस हो कर अच्छी तरह जानते हैं कि दिल्ली के ऑटो न तो सवारी की बतायी जगह जाते हैं , न ही सेफ हैं , फिर भी “ लड़की बस में क्यों गयी ऑटो में क्यों नहीं ” का प्रलाप करते हैं , अवह भी एक लड़के के साथ , अकेली नहीं थी वह ।
  8. संस्कृत में रचित इनकी पुरुष परीक्षा , भू-परिक्रमा , लिखनावली , शैवसर्वश्वसार , शैवसर्वश्वसार प्रमाणभूत पुराण-संग्रह , गंगावाक्यावली , विभागसार , दानवाक्यावली , दुर्गाभक्तितरंगिणी , गयापतालक एवं वर्षकृत्य आदि ग्रन्थ जहाँ एक ओर इनके गहन पाण्डित्य के साथ इनके युगद्रष्टा एवं युगस्रष्टा स्वरुप का साक्षी है तो दूसरी तरफ कीर्तिलता , एवं कीर्तिपताका महाकवि के अवह भाषा पर सम्यक ज्ञान के सूचक होने के साथ-साथ ऐतिहासिक साहित्यिक एवं भाषा सम्बन्धी महत्व रखनेवाला आधुनिक भारतीय आर्य भाषा का अनुपम ग्रन्थ है।
  9. सृष्टि ने हर व्यक्ति के मन की गहराईओं में ऐसी संपत्ति रखी है , हमें केवल एक चाहियेसंकेट शब्द चाहिए , और यह है अवह शब्द जिसका आप सबको संकेत दे सकते हैं , “ चिंता मत करिये ” | ब्रह्माण्ड में एक शक्ति है , एक ऊर्जा है जो आपको आपके माता पिता से , मित्रों से या जीवन साथी से भी अधिक प्रेम करती है | एक क्षेत्र है , एक ऊर्जा है जो आपका ख्याल रखती है | आपको केवल शांत रहना है |
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