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अपाठ्य meaning in Hindi

pronunciation: [ apaathey ]
अपाठ्य meaning in English

Examples

  1. वैसे कई लंबी कविताएं भी मैंने लिखी हैं , लेकिन अब जब सब कुछ सर्वथा अपाठ्य होता जा रहा है , ऐसे में स्वरचित लंबी कविताओं का सार्वजनिक प्रकटीकरण मुझे एकदम गैरजरूरी लगता है।
  2. अप्रासंगिक जानकारी , ज्यामितीय डिजाइन, गणितीय गणना, खगोलीय संरेखण की अपाठ्य अव्यवस्था एक झूठी ठोस वस्तुओं, बजाय अमर आत्माओं के आधार पर आध्यात्मिकता का हिस्सा हैं, क्रम में भ्रमित करने के लिए और पृथ्वी पर है
  3. हमारे यहाँ या तो सामाजिक-राजनीतिक , गुरु-गंभीर , उत्तर-आधुनिक , जादुई यथार्थ के उपन्यास हैं जिनमें से अधिकांश अपाठ्य या बोगस हैं या फिर फ़ुटपाथ या रेल्वे स्टालों पर बिकनेवाले लोकप्रिय किन्तु नितांत विकलमस्तिष्क क़िस्से .
  4. क्या यह सही नहीं है कि कई लोगों के लिये कबीर अपाठ्य लगते होंगे या फरीद या नानक ? नानक को केदारनाथ सिंह जी ने पढ़ा है क्या ? पढ़ा है तो कुछ लिखा भी है क्या ?
  5. यानी ये ऐसी कविताएं हैं जिन्हें कवि ही लिखते हैं और कवि ही उनके पाठक होते हैं। . ....कवि और आलोचकों का एक अन्य तबका ऐसा है जो कविता को गूढ़ ,अबूझ , अपाठ्य ,असहज और अगेय बनाने की वकालत करता है।
  6. यानी ये ऐसी कविताएं हैं जिन्हें कवि ही लिखते हैं और कवि ही उनके पाठक होते हैं। . ....कवि और आलोचकों का एक अन्य तबका ऐसा है जो कविता को गूढ़ ,अबूझ , अपाठ्य ,असहज और अगेय बनाने की वकालत करता है।
  7. जिन दोस्तों ने साथ जीने-मरने की क़समें खाई थीं एक दिन वे ही हो जाते हैं लापता और फिर कभी नहीं लौटते , धीरे-धीरे धूसर और अपाठ्य हो जाती हैं उनकी अनगढ़ कविताएँ और दुःख , उनके चेहरे भी ठीक-ठीक याद नहीं रहते।
  8. यानी ये ऐसी कविताएं हैं जिन्हें कवि ही लिखते हैं और कवि ही उनके पाठक होते हैं। . .... कवि और आलोचकों का एक अन्य तबका ऐसा है जो कविता को गूढ़ , अबूझ , अपाठ्य , असहज और अगेय बनाने की वकालत करता है।
  9. यानी ये ऐसी कविताएं हैं जिन्हें कवि ही लिखते हैं और कवि ही उनके पाठक होते हैं। . .... कवि और आलोचकों का एक अन्य तबका ऐसा है जो कविता को गूढ़ , अबूझ , अपाठ्य , असहज और अगेय बनाने की वकालत करता है।
  10. बहुत दार्शनिक या वैचारिक ढंग के साथ बहुत भाषा या बहुत कम भाषा लेकर , इन कविताओं पर समालोचनानुमा कुछ करने में इनकी मूल संवेदना और सौंदर्य की प्रखरता और सत्य के आगे समालोचकीय कर्म के अपाठ्य होकर नष्ट हो जाने का संकट है।
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