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अपरस meaning in Hindi

pronunciation: [ apers ]
अपरस meaning in English

Examples

  1. दाद हो , इनाई हो , खजुरी हो , उकवत हो , अपरस हो , एक्जीमा हो , छाजन हो तथा ऐसे ही अन्य कठिन व पुराने चर्म रोगों की दवा - हमारी परचार गाड़ी के पास से मुफ़्त लगवाइए ! सिर्फ़ खाज थोड़ै ।
  2. अ-नति ( नम्रता का अभाव ) : अनति ( थोड़ा ) , अ-परस ( जिसे किसी ने न छुआ हो ) : अपरस ( एक चर्म रोग ) , भू-तत्व ( पृथ्वी-तत्व ) : भूतत्व ( भूत होने का भाव ) आदि समस्त पदों की भी यही स्थिति है।
  3. अ-नति ( नम्रता का अभाव ) : अनति ( थोड़ा ) , अ-परस ( जिसे किसी ने न छुआ हो ) : अपरस ( एक चर्म रोग ) , भू-तत्व ( पृथ्वी-तत्व ) : भूतत्व ( भूत होने का भाव ) आदि समस्त पदों की भी यही स्थिति है।
  4. ज़रा सोचिये कि अपरस गर्सित यह तबका जब सिर्फ एक नेक कार्य को पटरी पर से उतारने के लिए इतने सारे प्रपंच , गंदी चालें , और दोयम दर्जे की हरकतें कर सकते है तो पिछले ६ ५ सालों में इन्होने क्या-क्या खेल नहीं रचाए होंगे ? यह असाध्य रोग निरंतर विकराल रूप धारण करते जा रहा है।
  5. यदि कोई व्यक्ति किसी भी तरह के कुष्ठ रोग - गलित कुष्ठ , सफ़ेद कुष्ठ , वादी कुष्ठ , ग्रंथि कुष्ठ , उकवत , अपरस , एक्जीमा , संक्रामक खुजली , भगंदर तथा जीर्ण व्रण ( Ulcer ) या अर्बुद ( Cancer ) rog से पीड़ित हो तो उसे पारद शिवलिंग की उपासना अवश्य ही करनी चाहि ए.
  6. यदि कोई व्यक्ति किसी भी तरह के कुष्ठ रोग - गलित कुष्ठ , सफ़ेद कुष्ठ , वादी कुष्ठ , ग्रंथि कुष्ठ , उकवत , अपरस , एक्जीमा , संक्रामक खुजली , भगंदर तथा जीर्ण व्रण ( Ulcer ) या अर्बुद ( Cancer ) rog से पीड़ित हो तो उसे पारद शिवलिंग की उपासना अवश्य ही करनी चाहि ए.
  7. यूं तो ' अपरस' शब्द अपने आप में बहुत व्यापक अर्थ समेटे हुए है, लेकिन इस आलेख की पृष्ठ-भूमि में इस शब्द के आम इस्तेमाल होने वाले और गौर करने लायक जो प्रमुख अर्थ मौजूद है, वे है ; अपने को सर्वोपरि समझने वाला, घमंडी, स्वार्थी, अपने बड़ों का आदर न करने वाला, अकारण भय पैदा करने वाला और नसीहत देने वाला इंसान।
  8. यूं तो ' अपरस' शब्द अपने आप में बहुत व्यापक अर्थ समेटे हुए है, लेकिन इस आलेख की पृष्ठ-भूमि में इस शब्द के आम इस्तेमाल होने वाले और गौर करने लायक जो प्रमुख अर्थ मौजूद है, वे है ; अपने को सर्वोपरि समझने वाला, घमंडी, स्वार्थी, अपने बड़ों का आदर न करने वाला, अकारण भय पैदा करने वाला और नसीहत देने वाला इंसान।
  9. फोड़ा , फुंसी , उकवत , अपरस , एक्जीमा , दिनाय , खाज , खुज़ली , सफ़ेद कुष्ठ , गलित कुष्ठ तथा कील मुंहासे आदि से लेकर अर्बुद , भगंदर , कर्कट ( कैंसर ) आदि सब यदि कुंडली में - राहू लग्नेश के साथ छठे भाव में बैठा हो तथा लग्न में कोई शत्रु ग्रह बैठा हो चाहे वह भले ही स्वाभाविक शुभ ग्रह ही क्यों न हो , श्वेत कुष्ठ होगा .
  10. फोड़ा , फुंसी , उकवत , अपरस , एक्जीमा , दिनाय , खाज , खुज़ली , सफ़ेद कुष्ठ , गलित कुष्ठ तथा कील मुंहासे आदि से लेकर अर्बुद , भगंदर , कर्कट ( कैंसर ) आदि सब यदि कुंडली में - राहू लग्नेश के साथ छठे भाव में बैठा हो तथा लग्न में कोई शत्रु ग्रह बैठा हो चाहे वह भले ही स्वाभाविक शुभ ग्रह ही क्यों न हो , श्वेत कुष्ठ होगा .
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