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अन्धड़ meaning in Hindi

pronunciation: [ anedhed ]
अन्धड़ meaning in English

Examples

  1. मौसी की किसी अन्धड़ द्वारा झकझोरी जाती दुबली देह को देखता हुआ शेखर भी बिना हिले रो उठता है-फिर एकाएक विस्मरण की राख में से त्रिवेणी की धारा से धुला हुआ नया बोध कहता है कि शशि की हार नहीं हुई।
  2. सुनो मेरे प्यार- यह काल की अनन्त पगडंडी पर अपनी अनथक यात्रा तय करते हुए सूरज और चन्दा , बहते हुए अन्धड़ गरजते हुए महासागर झकोरों में नाचती हुई पत्तियाँ धूप में खिले हुए फूल , और चाँदनी में सरकती हुई नदियाँ
  3. अचिन्त्य- चिन्तन का शिकार लोकमानस तो बेतरह तबाह हो ही रहा है , इस अन्धड़ से उनकी आँखों में भी धूलि भर गई है , जो पुण्य परमार्थ की बात सोचने और उस दिशा में कुछ कर सकने की परिस्थितियों में हैं।
  4. दलित कवि मलखान सिंह के शब्दों को उधार लेकर कहूं तो अन्धड़ भरे दिनों से जूझते हुए मौसम को जूता दिखा लोगों ने चीख कर कहा था कि धरती बदलती है , बदलते हैं आकाश , हवाओं के रूख , चिड़ियों के पंख।
  5. अन्धड़ में पता लगेगा : गर्मी के शुरुआती दिनों के अन्धड़ में शहरों की लाइनें अस्त-व्यस्त हो जाती हैं , उस वक्त ग्रामीण क्षेत्रों में क्या हाल होंगे , जो खम्बे खड़े किए गए हैं , उनमें ‘ मानक स्तरÓ की अनदेखी की गई है।
  6. अन्धड़ में पता लगेगा : गर्मी के शुरुआती दिनों के अन्धड़ में शहरों की लाइनें अस्त-व्यस्त हो जाती हैं , उस वक्त ग्रामीण क्षेत्रों में क्या हाल होंगे , जो खम्बे खड़े किए गए हैं , उनमें ‘ मानक स्तरÓ की अनदेखी की गई है।
  7. आज मैं क्या दूसरी भूल करने जा रहा हूँ ? उसने सम्हलकर कहा-हाँ चलूँगी , बाबू ! मैंने गहरी दृष्टि से उसके मुँह की ओर देखा , तो अन्धड़ नहीं , किन्तु एक शीतल मलय का व्याकुल झोंका उसकी घुँघराली लटों के साथ खेल रहा था।
  8. इस खिलवाड़ में समय नष्ट करते रहने की अपेक्षा उपयुक्त यही है कि विचार- क्रान्ति का तूफानी सरंजाम जुटाया जाय और उसे इतना प्रबल बनाया जाय कि जो कुछ भी कचरा जहाँ भी गया है , वह अन्धड़ के साथ उड़ता और कहीं से कहीं पहुँचता जाता दिखाई पड़े।
  9. किसान अपने समूचे परिवार के साथ दिन-रात खेतों में मेहनत करता है और ईश् वर है कि कभी सूखा लाकर , कभी अतिवृष् िट लाकर , कभी अन्धड़ चला कर तो कभी पाला लाकर उसकी फसल नष् ट कर देता है और किसान को सपरिवार भूखों मरना पड़ता है।
  10. वह यह जल्दी नहीं समझ सकता कि उजड़े स्वर्ग का कँपना है सन् 1857 की हलचल का पूरब से बढ़ते बढ़ते दिल्ली तक पहुँचना , नासूर है बहादुरशाह, नासूर का निकलना है बहादुरशाह का लाल किला छोड़ना और भूडोल और अन्धड़ है दिल्ली पर कब्जा करनेवाले बलवाइयों के साथ अंगरेजों का घोर युध्द।
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