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अक्षमाला meaning in Hindi

pronunciation: [ akesmaalaa ]
अक्षमाला meaning in English

Examples

  1. एक अन्य ध्यान में सिद्धिविनायकको अपने हाथों में दंत , अक्षमाला , परशु और मोदक से भरा हुआ पात्र लिए दिखाया गया है , जिसमें उनकी सूँड का अग्रभाग लड्डू पर लगा हुआ है।
  2. एक अन्य ध्यान में सिद्धिविनायकको अपने हाथों में दंत , अक्षमाला , परशु और मोदक से भरा हुआ पात्र लिए दिखाया गया है , जिसमें उनकी सूँड का अग्रभाग लड्डू पर लगा हुआ है।
  3. उपादान - ' दण्डकमण्डकु , अक्षमाला , कृष्णमृगचर्म आदि के धारण कर लेने अथवा जटाजूट होकर संन्यास ग्रहण कर लेने से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी ' - इस रूप में सन्तुष्ट हो जाना उपादान नामक तुष्टि है ।
  4. उपादान - ' दण्डकमण्डकु , अक्षमाला , कृष्णमृगचर्म आदि के धारण कर लेने अथवा जटाजूट होकर संन्यास ग्रहण कर लेने से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी ' - इस रूप में सन्तुष्ट हो जाना उपादान नामक तुष्टि है ।
  5. महाकाली से यों कहकर महालक्ष्मी ने अत्यन्त शुद्ध सत्त् वगुण के द्वारा दूसरा रूप धारण किया , जो चन्द्रमा के समान गौरवर्ण था॥ 14 ॥ वह श्रेष्ठ नारी अपने हाथों में अक्षमाला , अङ्कुश , वीणा तथा पुस्तक धारण किये हुए थी।
  6. सदैव प्रसन्न मुख वाली हाथों में अक्षमाला , फरसा , गदा , बाण , वज्र , कमल , धनुष , कुण्डिका , दंड शक्ति , खड्ग , ढाल , शंख , घंटा , मधुपात्र , शूल पाश और चक्र धारण किए हुए हैं।
  7. गणपति की इस प्रतिमा में ऊपरी दांये हाथ में परशु , ऊपरी बांये हाथ में टूटा हुआ एक दंत , नीचे दांये हाथ में अभय मुद्रा में अक्षमाला धारण किए हुए तथा नीचे बांये हाथ में मोदक धारण किए हुए आयुध के रूप में अलंकृत है।
  8. जो अपने हाथों में अक्षमाला , फरसा, गदा, बाण, वज्र, पद्म, धनुष, कुण्डिका, दंड, शक्ति, खडग, ढाल, घंटा, मधुपात्र, त्रिशूल, पाश और सुदर्शनचक्र धारण कराती हैं, जिनका वर्ण अरुण है, तथा जो लाल कमल पर विराजमान हैं, उन भगवती महिषासुरमर्दिनी भगवती महालक्ष्मी जी का मैं भजन करता हूँ!
  9. क्या सरस्वती के आइकॉन की धर्मेतर और शिक्षण-विशिष्ट व्याख्याएँ संभव ही नहीं हैं ? क्या सरस्वती की पहचान “ कुमतिध्वंसकारिणीम् '' के रूप में नहीं है ? क्या उसे ‘‘ ज्ञानाकरां ” नहीं कहा गया ? सरस्वती का आइकॉन अक्षमाला , अंकुश , वीणा और पुस्तक लिए हुए है।
  10. अब उनके दाहिनी ओर के निचले हाथों से लेकर बायीं ओर के निचले हाथों तक में क्रमश : जो अस्त्र हैं, उनका वर्णन किया जाता है॥10॥ अक्षमाला, कमल, बाण, खड्ग, वज्र, गदा, चक्र, त्रिशूल, परशु, शङ्ख, घण्टा, पाश, शक्ति दण्ड, चर्म (ढाल), धनुष, पानपात्र और कमण्डलु- इन आयुधों से उनकी भुजाएँ विभूषित हैं।
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