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सूता meaning in Hindi

pronunciation: [ sutaa ]
सूता meaning in English

Examples

  1. गीत में आगे वह अपनी मां से हाथ का बहुंटा , घेंच का सूता , माथे की टिकुली , कान की खूंटी और हाथ की ककनी आदि की मांग करती है।
  2. इन हार्मोनों के असर से मनुष्यों को कैंसर जैसे रोग होते हैं तो उनसे वे गाय-भैंस गम्भीर रोगों का शिकार क्यों नही बनेगे ? आपका गौवंश पहले 15-18 बार नए दूध होता था, अब 2-4 बार सूता है।
  3. ध्यान दें कि जिस हार्मोन के असर से मनुष्यों को कैंसर जैसे रोग होते हैं उनसे वे गाय-भैंस गम्भीर रोगो का शिकार क्यों नही बनेगे ? आपका गौवंश पहले 15-18 बार नए दूध् होता था, अब 2-4 बार सूता है।
  4. सेंट बनाने के लिए इसे पकड़कर बैंतों से सूता जाता है , ताकि पीड़ा से उद्विग्न होकर उसकी यौन ग्रंथि स्रावित हो, फिर तेज धारदार चाकू से उसका वह स्राव खरोंच-खरोंचकर सुगंमिात सेंट बनाकर सुंदर बोतलों में पैकिंग हुआ आपके सामने आता है।
  5. गरल भुजंगल समकर सूता पार्वती रस में ला सूता रगडत रगडत होवे खार कंचन होत न लागे बार * रसायन शास्त्र के आदि ग्रन्थों में पारद को शंकर जी का वीर्य और गन्धक को पार्वती जी का रज कहा गया है . ..
  6. गरल भुजंगल समकर सूता पार्वती रस में ला सूता रगडत रगडत होवे खार कंचन होत न लागे बार * रसायन शास्त्र के आदि ग्रन्थों में पारद को शंकर जी का वीर्य और गन्धक को पार्वती जी का रज कहा गया है . ..
  7. लिनेन का प्रयोग चादरों एवं स्नान वस्त्रों ( मेज़पोश, तश्तरी तौलिये, चादरें आदि), गृह एवं वाणिज्यिक सज्जा सामग्रियों (वॉलपेपर, वॉल कवरिंग, असबाब, पर्दे आदि), परिधान सामग्रियों (सलवार, वस्त्र, स्कर्ट, शर्ट आदि) से लेकर औद्योगिक उत्पादों (सामानों, कैनवस, सिलाई का सूता आदि) तक के लिए होता है.
  8. लिनेन का प्रयोग चादरों एवं स्नान वस्त्रों ( मेज़पोश, तश्तरी तौलिये, चादरें आदि), गृह एवं वाणिज्यिक सज्जा सामग्रियों (वॉलपेपर, वॉल कवरिंग, असबाब, पर्दे आदि), परिधान सामग्रियों (सलवार, वस्त्र, स्कर्ट, शर्ट आदि) से लेकर औद्योगिक उत्पादों (सामानों, कैनवस, सिलाई का सूता आदि) तक के लिए होता है.
  9. क्या है हिन्दू होने का मतलब , माथे पर तिलक लगाना , हाँथ में सूता बंधना , ढोगी बाबाओं से आशीर्वाद लेना , मंदिर जाना , जातिवाद का ढोंग फैलाना , अपनी संस्कृति को छोड़ कर पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण करना क्या यही है हिंदुत्व ?
  10. कॉलेजिया बाबा भी कहानी बढ़िया पसारते हैं मिलाने आता है सूता से सूता मगर छाती में नहीं उठता है कोई अंधड़ और पुजापा भी बहुत फैलाते हैं बहुत नक्सा बाँधते हैं सरग-नरक का सारा मोह-माया धरती पर चू जाने के बाद जब खह-खह जल जाएगा देह का भूसा और इस घाट रहेंगे हम और उस घाट तुम फगुनिया की माई तो फिर किसे फिकिर कि सरग मिला या नरक।
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