वैदूर्य meaning in Hindi
pronunciation: [ vaidurey ]
Examples
- वज्रमुक्ता , पद्मराग , मरकत , इन्द्रनीली , वैदूर्य , पुष्पराग , कंकेतन , पुलक , रुधिरक्ष , भीष्म , स्फटिक तता प्रवाल इन 13 प्रकार के जवाहरातों से नागरिक के कई अलंकार बनते हैं।
- वज्रमुक्ता , पद्मराग , मरकत , इन्द्रनीली , वैदूर्य , पुष्पराग , कंकेतन , पुलक , रुधिरक्ष , भीष्म , स्फटिक तता प्रवाल इन 13 प्रकार के जवाहरातों से नागरिक के कई अलंकार बनते हैं।
- “ आचार्य वाराह मिहिर ” भावार्थ - शनि ग्रह वैदूर्य रत्न अथवा बाणफूल या अलसी के फूल जैसे निर्मल रंग से जब प्रकाशित होता है तो उस समय प्रजा के लिए शुभ फल देता है।
- दान : उड़द , कंबल , कस्तूरी , वैदूर्य मणि , लहसुनिया , काला फूल , तिल , तेल , रत्न , सोना , लोहा , बकरा , शास्त्र , सात प्रकार के अन्न , दक्षिणा।
- दान : उड़द , कंबल , कस्तूरी , वैदूर्य मणि , लहसुनिया , काला फूल , तिल , तेल , रत्न , सोना , लोहा , बकरा , शास्त्र , सात प्रकार के अन्न , दक्षिणा।
- वैदूर्य , बज्र , नीलम , मोती , हीरा आदि रत्नों से अलंकृत छज्जे , वेदियां तथा फर्श जगमगा रहे थे और उन पर बैठे हुए कबूतर और मोर अनेक प्रकार के मधुर शब्द कर रहे थे।
- ऐसा कहा जाता है कि निम्बार्क दक्षिण भारत में गोदावरी नदी के तट पर वैदूर्य पत्तन के निकट ( पंडरपुर ) अरुणाश्रम में श्री अरुण मुनि की पत्नी श्री जयन्ति देवी के गर्भ से उत्पन्न हुए थे।
- Fri , 20 Jul 2007 10:39:41 GMT http://hindi.webdunia.com/religion/astrology/ratna/0704/21/1070421141_1.htm मुख्य रत्न http://hindi.webdunia.com/religion/astrology/ratna/0704/21/1070421140_1.htm हीरा, मोती, माणिक्य, पन्ना, नीलम, पुखराज, मूँगा (प्रवाल), गोमेद, वैदूर्य, सुलेमानी पत्थर, वैक्रान्त, यशद, फीरोजा Fri, 20 Jul 2007 10:40:48 GMT http://hindi.webdunia.com/religion/astrology/ratna/0704/21/1070421140_1.htm रत्न परिचय http://hindi.webdunia.com/religion/astrology/ratna/0704/21/1070421138_1.htm रत्न प्रकृति प्रदत्त एक मूल्यवान निधि है।
- ( 1) वज्र (2) मरकत (3) पद्रमराज (4) वैदूर्य (5) विमलक (6) स्फटिक (7) सौगन्धिक (8) शंख (9) इन्द्रनील (10) कर्केतर (11) रुधिर (12) पुलक (13) राजमणि (14) शशिकान्त (15) गोमेदक (16) महानील (17) पुष्पराग (18) ज्योतिरस (19) मुक्ता (20) ब्रह्ममणि (21) सम्यक (22) प्रवाल।
- द्वारका के आठ राजमार्ग और सोलह चौराहे थे जिन्हें शुक्राचार्य की नीति के अनुसार बनाया गया था ( ' अष्टमार्गां महाकक्ष्यां महाषोडशचत्वराम् एव मार्गपरिक्षिप्तां साक्षादुशनसाकृताम् ' महाभारत सभा पर्व 38 ) द्वारका के भवन मणि , स्वर्ण , वैदूर्य तथा संगमरमर आदि से निर्मित थे।