वृष्य meaning in Hindi
pronunciation: [ verisey ]
Examples
- यह उत्तेजक , वाजीकारक, यौनशक्ति बनाए रखने वाली, कामोत्तेजक, त्रिदोष नाशक, आक्षेपहर, वातशूल शामक, दीपक, पाचक, रुचिकर, मासिक धर्म साफ़ लाने वाली, गर्भाशय व योनि संकोचन, त्वचा का रंग उज्ज्वल करने वाली, रक्तशोधक, धातु पौष्टिक, प्रदर और निम्न रक्तचाप को ठीक करने वाली, कफ नाशक, मन को प्रसन्न करने वाली, वातनाड़ियों के लिए शामक, बल्य, वृष्य, मूत्रल, स्तन (दूध)
- “” रसोनो बृंहणो वृष्य : स्गिAधोष्ण : पाचर : सर : । “” अर्थात् लहसुन वृहण ( सप्तधातुओं को बढ़ाने वाला , वृष्य - वीर्य को बढ़ाने वाला ) , रस , रक्त , माँस , मेद , अस्थि , म ” ाा , शुक्र स्निग्धाकारक , उष्ण प्रकृत्ति वाला , पाचक ( भोजन को पचाने वाला ) तथा सारक ( मल को मलाशय की ओर धकेलने वाला ) होता है।
- “” रसोनो बृंहणो वृष्य : स्गिAधोष्ण : पाचर : सर : । “” अर्थात् लहसुन वृहण ( सप्तधातुओं को बढ़ाने वाला , वृष्य - वीर्य को बढ़ाने वाला ) , रस , रक्त , माँस , मेद , अस्थि , म ” ाा , शुक्र स्निग्धाकारक , उष्ण प्रकृत्ति वाला , पाचक ( भोजन को पचाने वाला ) तथा सारक ( मल को मलाशय की ओर धकेलने वाला ) होता है।
- “” रसोनो बृंहणो वृष्य : स्गिAधोष्ण : पाचर : सर : । “” अर्थात् लहसुन वृहण ( सप्तधातुओं को बढ़ाने वाला , वृष्य - वीर्य को बढ़ाने वाला ) , रस , रक्त , माँस , मेद , अस्थि , म ” ाा , शुक्र स्निग्धाकारक , उष्ण प्रकृत्ति वाला , पाचक ( भोजन को पचाने वाला ) तथा सारक ( मल को मलाशय की ओर धकेलने वाला ) होता है।
- रसायन ( बुढापे को रोकने वाली और व्याधिक्षम्त्व बढाने वाली ) ६ बृंहणीय ( शरीर को मोटा करने वाली ) वृष्य , बल्य , वातशामक , विषनाशक , गुल्म ( बाय का गोला ) , प्लीहारोग , यकृत विकार , कफ़रोग नाशक , ज्वरहर , ग्रन्थि नाशक ( टुमर , सीस्ट , ) नाशक , जले हुए मे लाभकारी , त्वचा के लिये हितकर , पैतिक और रक्त्ज रोगों का नाशक।
- दोषों के शामक जैसे-अमला , कंटकारी, आदि, दूषक जैसे-यवक मंदक आदि विष, स्व्स्थ्क वृत्ति कर जैसे वृष्य रसायन आदि, यद्यपि दोष शामक पदार्थ भी कभी दूषक हो जाते हैं, जैसे अधिक आमला के सेवन से अग्नि मंद हो जाती है, धातु दूषक विष भी दोष हर होते हैं,-विषम उदरहरम. इनका भी मिथ्या योग,अयोग,अतियोग, ही निंदनीय है, प्राय: जो पदार्थ जैसा है, वैसा मानना चाहिए, मणि के रहते अग्नि भी दाहक नहीं होता, इससे उसका दाहक गुण नष्ट नहीं होता इसी से इन्द्रियों को दोष्नाशक आदि प्रायिक देखना चाहिए.