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लोक प्रतिनिधि meaning in Hindi

pronunciation: [ lok pertinidhi ]
लोक प्रतिनिधि meaning in English

Examples

  1. अगर इस मूकता को वाणी न मिली तो लोक फिर से बेगार करेगा , जानवरों की तरह काम के बदले आधा पेट भोजन या आधा शरीर ढकने को कपड़ा मिल गया तो बहुत है वरना हमारे लोक प्रतिनिधि देश बचाओ अभियान चला कर स्वयं को बचाने में लगे हुए हैं।
  2. टी . एन. शेषन (पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त) वह शख्स है जिन्होने पहली बार लोक प्रतिनिधि अधिनियम १९५१ के अधीन रहते हुए उन्ही अधिकारो के साथ अपने से पूर्व चुनाव आयुक्तों से हटकर पहली बार चुनावो के प्रचार खर्चे पर सफलता पूर्वक प्रतिबंध लगाकर चुनाव आयोग की महत्ता स्थापित और सिद्ध की थी।
  3. टी . एन . शेषन पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त वह शख्स है जिन्होने पहली बार लोक प्रतिनिधि अधिनियम १ ९ ५ १ के अधीन रहते हुए उन्ही अधिकारो के साथ अपने से पूर्व चुनाव आयुक्तों से हटकर पहली बार चुनावो के प्रचार खर्चे पर सफलता पूर्वक प्रतिबंध लगाकर चुनाव आयोग की महत्ता स्थापित और सिद्ध की थी।
  4. इसी समय सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की बेन्च ने मनोहर जोशी बनाम नितिन भाउराव पाटिल ( ए 0आई 0आर 0 1996 एस 0सी 0 796) मुकदमे में मुम्बई हाईकोर्ट के उस फैसले को उलट दिया जिसमें शिवसेना प्रत्याशी को लोक प्रतिनिधि अधिनियम 1951 के अन्तर्गत साम्प्रदायिक उन्माद भड़काने वाला भाषण देने के लिए चुनाव लड़ने हेतु अयोग्य घोषित किया गया था।
  5. एक वाक्य और उद्धृत करता हूं डा 0 राम मनोहर लोहिया का , जब उन्होंने ग्वालियर की महारानी के खिलाफ सुक्खो रानी को चुनाव मैदान में उतारा था , ‘‘ लोकतंत्र में लोक प्रतिनिधि का चुनाव होता है और यही कारण है कि ग्वालियर के चुनाव में एक तरफ है ग्वालियर की महारानी तो दूसरी तरफ है हमारी उम्मीदवार हैं सुक्खो रानी।
  6. 2004 के आम चुनाव में सर्वाधिक सीट्स के साथ सत्ता में आने वाली कांग्रेस ने चुनाव श्रीमती सोनिया गाँधी की अध्यक्षता में लड़ा था , परन्तु देश के प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने डॉ मनमोहन सिंह की घोषणा कर सबको चौंकाया तथा सरदार जी को भी बाग़ बाग़ कर दिया जबकि वो कभी लोकसभा का चुनाव जीत कर लोक प्रतिनिधि नहीं बन सके थे।
  7. इसी समय सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की बेन्च ने मनोहर जोशी बनाम नितिन भाउराव पाटिल ( ए 0 आई 0 आर 0 1996 एस 0 सी 0 796 ) मुकदमे में मुम्बई हाईकोर्ट के उस फैसले को उलट दिया जिसमें शिवसेना प्रत्याशी को लोक प्रतिनिधि अधिनियम 1951 के अन्तर्गत साम्प्रदायिक उन्माद भड़काने वाला भाषण देने के लिए चुनाव लड़ने हेतु अयोग्य घोषित किया गया था।
  8. हमारे देस में अभी तक मनुष्य जाती के प्राणी को ही लोक प्रतिनिधि बनने का हक था… . .पुरुष और महिला दोनों एही मनुष्य प्राणी में आते थे अभी महिला ओ के लिए भी आरक्षण दे के एक नयी प्राणी की जाती बना कर उसको ३३ प्रतिशत का टुकड़ा फेंका जा रहा है ….और हमारे सुग्न्य नेता लोग अपने आप को महिला जाती का ६७ प्रतिशत हक छीन कर अपने आप को बहुत उदार और उद्दाम दिखा रहे है ! …
  9. धन और बाहुबल का जो ज़ोर आज दिख रहा है वह समाप्त हो जाएगा और सही मायने में लोक प्रतिनिधि चुनने में योग्यता और कर्मठता ही कसौटी होंगें न कि यह क्षमता कि प्रत्याशी कितना धन चुनावों में इनवेस्ट कर सकता है . लोकतंत्र की कसौटी निर्बल और सबल दोनों को योग्यता के आधार पर समान अवसर और प्लेट्फॉर्म उपलब्ध करा सकने में सक्षम होने में है न कि सींकिया पहलवानों को रिंग में केवल समान अवसर के पाखण्ड प्रदर्शन के लिए मुहम्म्द अली सरीखे धन पशुओं के सामने उतारने में.
  10. पाठ्यक्रम आवश्यकतानुरूप तय कर दिए जायें और यह परीक्षा पास करने के बाद ही कोई भी व्यक्ति सिविल सेवा परीक्षा में बैठ सके , या लोक प्रतिनिधि के रूप में चुनावों में खडा हो सके, कंपनियों में एच.आर. या मनाग्मेंट में शामिल हो सके, ताकि परीक्षा में समानता, कोर्स में समानता, कही किसी को असंतोष का बोध तो न हो., जैसे चार साल सेल्फ स्टडी में गंवाते हैं, फिर भी यदि असफल रहे तो कैरियर ही चौपट दिखाई देता है, फिर तो ये नहीं तो वो सही, कैरियर तो सामने रहेगा, पढाई निरर्थक तो न जायेगी.चन्द्र मोहन गुप्त.जयपुर
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