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लाक्षा meaning in Hindi

pronunciation: [ laakesaa ]
लाक्षा meaning in English

Examples

  1. हानि से बचाव तथा लाभ एवं बरकत के लिए गोरोचन , लाक्षा , कुंकुम , सिंदूर , कपूर , घी , चीनी और शहद के मिश्रण से अष्टगंध बनाकर उसकी स्याही से नीचे चित्रित पंचदशी यंत्र बनाएं तथा देवी के 108 नामों को लिखकर पाठ करें।
  2. आपके बाबूजी की सारी रिपोर्ट्स गहराई से देख समझ ली हैं आप उन्हें निम्न औषधियां दें- १ . कांचनार गुग्गुल १ गोली + आरोग्यवर्धिनी १ गोली + लाक्षा पंचामृत १ गोली इन सबकी एक मात्रा बनाएं और दिन में दो बार गाय के दूध से दीजिये।
  3. बेशक प्रेम का कोई रूप न हो वो निराकार हो , लेकिन अभिवयक्ति जैसे -जैसे साकार होती जाती है मानदंडो की अलग-अलग लाक्षा गृह की कोठरियो से गुजरते हुए साबित करना पड़ता है की पारिवारिक मर्यादा , सामाजिक रीति-नियम कही प्रेम की ऊष्मा-आँच से गल कर ढीले तो नहीं पर जायेंगे।
  4. उन्हें आभास करा दिया है की तुम्हारे ही बीच में शकुनी , दुर्योधन और दुशासन लाक्षा गृह , चीर हरण , की तैय्यारी में जुटे हुए हैं जाग जाओ , सजग हो जाओ गांधारी ! संदेशात्मक रचना , शाधुवाद ! अवसर मिले एक नजर जागते रहो की और फिरा देना !
  5. इसके अलावा भी अन्य मिश्रणों का भी उल्लेख मिलता है जैसे- छह भाग कुष्ठ , दो भाग गुड़ , तीन भाग लाक्षा , पाँचवाँ भाग नखला , हरीतकी , राल समान अंश में , दपै एक भाग , शिलाजय तीन लव जिनता , नागरमोथा चार भाग , गुग्गुल एक भाग लेने से अति उत्तम धूप तैयार होती है।
  6. वह राज्यलक्ष्मी को प्राप्त कर लेता हैगोरोचन , लाक्षा, कुंकुम, सिन्दूर, कपूर, घी (अथवा दूध), चीनी और मधु- इन वस्तुओं को एकत्र करके इनसे विधि पूर्वक यन्त्र लिखकर जो विधिज्ञ पुरुष सदा उस यन्त्र को धारण करता है, वह शिव के तुल्य (मोक्षरूप) हो जाता हैभौमवती अमावास्या की आधी रात में, जब चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र पर हों, उस समय इस स्तोत्र को लिखकर जो इसका पाठ करता है, वह सम्पत्तिशाली होता है।।
  7. वह राज्यलक्ष्मी को प्राप्त कर लेता हैगोरोचन , लाक्षा, कुंकुम, सिन्दूर, कपूर, घी (अथवा दूध), चीनी और मधु- इन वस्तुओं को एकत्र करके इनसे विधि पूर्वक यन्त्र लिखकर जो विधिज्ञ पुरुष सदा उस यन्त्र को धारण करता है, वह शिव के तुल्य (मोक्षरूप) हो जाता हैभौमवती अमावास्या की आधी रात में, जब चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र पर हों, उस समय इस स्तोत्र को लिखकर जो इसका पाठ करता है, वह सम्पत्तिशाली होता है।।
  8. वह राज्यलक्ष्मी को प्राप्त कर लेता है॥19॥ गोरोचन , लाक्षा, कुङ्कुम, सिन्दूर, कपूर, घी (अथवा दूध), चीनी और मधु- इन वस्तुओं को एकत्र करके इनसे विधिपूर्वक यन्त्र लिखकर जो विधिज्ञ पुरुष सदा उस यन्त्र को धारण करता है, वह शिव के तुल्य (मोक्षरूप) हो जाता है॥20॥ भौमवती अमावास्या की आधी रात में, जब चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र पर हों, उस समय इस स्तोत्र को लिखकर जो इसका पाठ करता है, वह सम्पत्तिशाली होता है॥21॥
  9. वह राज्यलक्ष्मी को प्राप्त कर लेता है॥19॥ गोरोचन , लाक्षा, कुङ्कुम, सिन्दूर, कपूर, घी (अथवा दूध), चीनी और मधु- इन वस्तुओं को एकत्र करके इनसे विधिपूर्वक यन्त्र लिखकर जो विधिज्ञ पुरुष सदा उस यन्त्र को धारण करता है, वह शिव के तुल्य (मोक्षरूप) हो जाता है॥20॥ भौमवती अमावास्या की आधी रात में, जब चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र पर हों, उस समय इस स्तोत्र को लिखकर जो इसका पाठ करता है, वह सम्पत्तिशाली होता है॥21॥
  10. हमारे हिन्दू पूर्वजों ने त्रेता युग में समुद्र पर पुल बाँधा था , महाभारत काल में लाक्षा ग्रह का निर्माण किया था , पाटली पुत्र से ले कर तक्षशिला तक भव्य राज मार्ग का निर्माण कर दिखाया और विश्व के प्राचीनत्म व्यवस्थित नगरों को बसाया था , लेकिन आज उन्हीं के देश में विश्व की अन्दर अपनी पहचान के लिये प्राचीन इमारत केवल ताजमहल है जिस में मुमताज़ महल और शाहजहाँ की हड्डियाँ दफन हैं।
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