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मेघमाला meaning in Hindi

pronunciation: [ meghemaalaa ]
मेघमाला meaning in English

Examples

  1. आजकल तो स्त्री कवियों की कमी नहीं हैं , उन्हें अब पुरुष कवियों का दीन अनुकरण न कर अपनी रचनाओं में क्षितिज पर उठती हुई मेघमाला को दाड़ी मूंछ के रूप मेें देखना चाहिए।
  2. विचित्र वनों , मेघमाला सदृश पर्वमालाओं, सरिताओं तथा सरवरों के नयनाभिराम दृश्यों को निरखते हुये तथा दो दिन महर्षि अगस्त्य के भाई के आश्रम में विश्राम करने के पश्चात् वे अगस्त्य मुनि के आश्रम के निकट जा पहुँचे।
  3. विचित्र वनों , मेघमाला सदृश पर्वमालाओं, सरिताओं तथा सरवरों के नयनाभिराम दृश्यों को निरखते हुये तथा दो दिन महर्षि अगस्त्य के भाई के आश्रम में विश्राम करने के पश्चात् वे अगस्त्य मुनि के आश्रम के निकट जा पहुँचे।
  4. दूसरी जातियों के लोग भी इस पुस्तक को पढ़ कर मेघमाला का अध्ययन करें और अपने आपको मेघ के रंग में रंग सकते हैं अर्थात ' इन्सान ' बन सकते हैं यह मेघ माला का जपना है.
  5. नदी की कल्लोल , सागर-वृक्ष का प्रकम्प , अत्युच्च शैल की गम्भीरता , विस्तीर्ण मरु प्रान्तर की भीषणता , मेघमाला की घन-गम्भीर नीलिमा , निबिड वनभूमि की अपरिच्छिन्न निस्तब्धता , सब ही मनुष्य की चित्तवृत्ति का संगठन करती हैं।
  6. नदी की कल्लोल , सागर-वृक्ष का प्रकम्प , अत्युच्च शैल की गम्भीरता , विस्तीर्ण मरु प्रान्तर की भीषणता , मेघमाला की घन-गम्भीर नीलिमा , निबिड वनभूमि की अपरिच्छिन्न निस्तब्धता , सब ही मनुष्य की चित्तवृत्ति का संगठन करती हैं।
  7. विचित्र वनों , मेघमाला सदृश पर्वमालाओं , सरिताओं तथा सरवरों के नयनाभिराम दृश्यों को निरखते हुये तथा दो दिन महर्षि अगस्त्य के भाई के आश्रम में विश्राम करने के पश्चात् वे अगस्त्य मुनि के आश्रम के निकट जा पहुँचे।
  8. विचित्र वनों , मेघमाला सदृश पर्वमालाओं , सरिताओं तथा सरवरों के नयनाभिराम दृश्यों को निरखते हुये तथा दो दिन महर्षि अगस्त्य के भाई के आश्रम में विश्राम करने के पश्चात् वे अगस्त्य मुनि के आश्रम के निकट जा पहुँचे।
  9. खड़ी बोली और बोली में ब और व के अन्तर से पुल्लिंग , स्त्रीलिंग के अन्तर से बादल का वादल और वादली, बादलो, बादली है, संस्कृत से बरसे जलहर, जीमूत, जलधर, जलवाह, व्योमचर, मेघ, मेघाडंबर, मेघमाला, मुदिर, महीमण्डल जैसे नाम भी हैं।
  10. जैसे प्रभात का सूर्य तरंगाकृति मेघमाला को क्रमश : सुवर्णरंग से रंजित कर स्वयं प्रदीप्त होता है, दिग्मण्डल को आलोकित करता है, स्थल, जल, कीट-पतंग सबको प्रफुल्ल करता है- वैसे ही उस शांत देह में आनंदमयी शोभा का संचार हो रहा था।
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