मानव वध meaning in Hindi
pronunciation: [ maanev vedh ]
Examples
- अतः अभियुक्तगण हत्या की कोटि मे न आने वाले आपराधिक मानव वध के दोशी पाये जाते है जिसके फलस्वरूप अभियुक्तगण पर लगाया गया भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304 सपठित धारा 34 का आरोप साबित होता है।
- अतः अभियुक्त का कार्य हत्या की श्रेणी मे न आने वाले आपराधिक मानव वध की श्रेणी मे आता है और अभियुक्त का अपराध धारा 302 भा0द0सं0 से दण्डनीय न होकर धारा 304 ( भाग-2) भा0द0सं0 के अन्तर्गत दण्डनीय है।
- वध यदि भारतीय दण्ड विधान के प्रावधान धारा-299 एवं 300 का; डनतकमतद्ध अवलोकन किया जाए तो यह स्पष्ट है कि प्रत्येक हत्या; ब्नसचंइसमी वउपबपकमद्धी वउपबपकमद्ध आपराधिक मानव; ब्नसचंइसम भी है जबकि प्रत्येक आपराधिक मानव वध हत्या; डनतकमतद्ध नहीं है।
- जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बुधवार को सदोष मानव वध के मामले में सगे भाई सूर्यदेव यादव और श्री नारायण को सात वर्ष की कड़ी कैद तथा प्रत्येक को सात हजार रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया।
- जहां तक मृतका सोमवती का आपराधिक मानव वध किये जाने का प्रष्न है , पत्रावली पर मृतका सोमवती के षव की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट क-11 है, जिससे यह सिद्ध है कि मृतका सोमवती की मृत्यु सिर में मृत्यु पूर्व आयी चोटों के कारण हुई।
- विचारण हेतु प्रष्न यह भी है कि क्या अभियुक्त द्वारा उक्त आपराधिक कार्य ऐसी परिस्थितियों में किया गया कि यदि उसके उस कृत्य से चुटैल की मृत्यु हो जाती तो अभियुक्त हत्या की कोटि में न आने वाले आपराधिक मानव वध का दोशी होता ?
- आजीवन कारावास सजा काट रहे व्यक्ति द्वारा मानव वध करने पर केवल मृत्यु दण्ड संबंधी प्रावधान धारा- 303 भा . द.स ं . का मिटठू बनाम पंजाब राज्य ए. आई . आर . 1983 सुप्रीम कोर्ट 473 के मामले में विलोपित किया गया है ।
- सुप्रीम कोर्ट ने पहले साल 1996 में आरोपियों के ऊपर से हत्या की श्रेणी में नहीं आने वाले मानव वध की धारा यानी आईपीसी 304 ( पार्ट 2) हटा दी और मामूली लापरवाही से हुई मौत की धारा यानी आईपीसी 304 (ए) लगाने का निर्देश दिया।
- उसे भारतीय दंड विधान की मानव वध की धारा में अपराधी घोषित कर मृत्युदंड दे देते , दुनिया को इससे क्या लेना-देना ? अरबों रुपए उस पर खर्च हो रहा है और वह हमारे न्याय तंत्र की गली-गलियारों का इस्तेमाल करके सजा भुगतने से बचा है।
- ' पर वह कानून है कहां , जो अपना काम करे ? भारतीय दंड संहिता में हत्या की सजा के लिए धारा 302 है , जो लालच , वासना , ईर्ष्या , आवेश जैसी भावनाओं में बह कर किए गए मानव वध के लिए होती है।