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बाहरी अंग meaning in Hindi

pronunciation: [ baaheri anega ]
बाहरी अंग meaning in English

Examples

  1. शरीर के बाहरी अंग , जैसे स्तन , जनन अंग , त्वचा आदि और भीतरी अंग , जैसे आंतें , मलाशय , गर्भाशय , हड्डी आदि अंगों में हुए कैंसर की चिकित्सा के लिए शल्य चिकित्सा का सहारा लिया जाता है।
  2. शरीर के बाहरी के अंगों के विभिन्न लक्षण : शरीर के बाहरी अंग कमजोर होना , शरीर का लड़खड़ाना , चलते समय ऐसा प्रतीत होना कि जैसे खाली स्थान पर पैर रख रहा हो तथा कमजोरी आदि होने पर डियुबांयसिया औषधि का उपयोग लाभकारी होता है।
  3. शरीर का बाहरी अंग : - शरीर के कई अंगों की चाल धीमी हो जाती है , अंगों में कंपन होने लगता है , अंगों में फड़कन होने लगती है , बांहों तथा पैरों की गति सुस्त हो जाती है , कभी-कभी तो रोगी अपने पैर को घसीटकर चलता है।
  4. शरीर के बाहरी अंग से सम्बंधित लक्षण : पैरों की सूजन , हाथ-पैरों का ठण्डा होना , गठिया का दर्द , जोड़ों पर सफेद चमकदार सूजन , मांसपेशियों की दुर्बलता , रात को उंगलियों की सूजन तथा टांगों में बिजली के करंट के समान महसूस होना आदि विकारों में डिजिटैलिस औषधि का उपयोग किया जाता है।
  5. शरीर से बाहरी अंग से सम्बंधित लक्षण- रोगी के शरीर के सारे अंगों का अकड़ सा जाना , गठिया के रोग के साथ शरीर के सारे जोड़ों का अकड़ जाना , शरीर में भयंकर झटके लगने के साथ स्फुरण और कंपन होना , रोगी की पीठ का धनुष के आकार में टेढ़ा हो जाना , मांसपेशियों में आघात पहुंचना।
  6. शरीर के बाहरी अंग से सम्बंधित लक्षण- रोगी के शरीर के अंगों में गठिया का दर् द उठना और झटके से लगना , गृध्रसी ( सायटिका ) का दर्द जो रोगी के खड़े होने पर या पैर जमीन पर रखने से बढ़ जाता है तथा घूमने से कम हो जाता है , रोगी अगर बैठा रहता है तो उसकी पैर की एड़ी में दर्द होने लगता है।
  7. शरीर के बाहरी अंग से सम्बन्धित लक्षण : - रोगी के कंधें में गड़ने जैसा दर्द होता है , बाजू के भाग में दर्द होता है , पिण्डलियों में ऐंठन सी होती है , हाथ तथा पैरों की उंगलियों में दर्द होता है , हाथों और पैरों में ऐसी अनुभूति होती है कि जैसे कई चीटियां रेंग रही हों तथा इसके साथ ही झनझनाहट , जलन और दर्द होता है।
  8. शरीर बाहरी अंग से सम्बंधित लक्षण : पूरे शरीर में से खट्टी सी गंध आना , शरीर के अंगों के किसी एक भाग जैसे गर्दन , सिर , छाती , जननेन्द्रिय , हाथ-पैर , घुटने आदि पर पसीना आना , ठण्डा पसीना आना , पैरों के तलवों में दरार पड़ जाना , पैरों के पंजों का बिल्कुल गीला रहना आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को कल्केरिया कार्बोनिका-ओस्टरियेरम औषधि देने से आराम मिलता है।
  9. शरीर के बाहरी अंग से सम्बंधित लक्षण- रोगी के हाथों की हथेलियों और पैरों के तलुवों में जलन सी होना , रोगी को अपने हाथ-पैर कमजोर से महसूस होते है , रोगी को हाथ-पैरों में दबाव के साथ खिंचाव और जलन सी महसूस होती है , रोगी को अपने शरीर में इतनी ज्यादा कमजोरी महसूस होती है कि अगर वह कुर्सी या जमीन पर बैठने की कोशिश करता है तो गिर पड़ता है , रोगी अगर सुबह के समय घूमने जाता है तो उसे रास्ते में कई बार बैठना पड़ता है।
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