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फुसफुस meaning in Hindi

pronunciation: [ fusefus ]
फुसफुस meaning in English

Examples

  1. उस शाम मैंने उसे जी भर के देखा था और वो उतर गयी थी आँखों से होती हुई धमनियों में , शिराओं में और फिर फुसफुस करते ह्रदय में गतिमान होने लगी थी।
  2. दीदी को जैसे ही दो घड़ी की फुरसत मिलती , पड़ोस के ओझाजी की बेटी सुनीता और जेवनचा की लड़की फुलमति उसे घेर लेतीं और फुसफुस करके पता नहीं क्या-क्या सवाल करके दीदी को हलकान किये रहतीं.
  3. मैं हंसना चाहूंगा हंसी पकड़ नहीं आयेगी , मुर्दा फुसफुस में बुदबुदाऊंगा सब सही है, बेटा, स्वतंत्रता चाहनेवाले नैतिकता का ठेका अपने पास रखना चाहते हैं, इतिहास की विसंगतियों पर भारी पोथे हैं पर अपनी किताब कहां है?
  4. इस कारण फुसफुस ( फेफड़े ) के रोगों , क्षय ( तपेदिक ) , श्वास ( दमा ) , कास ( खांसी ) तथा कुष्ठ , प्लेग , भगन्दर आदि रोगों पर बहुत लाभदायक सिद्ध हुआ है ।
  5. दीदी को जैसे ही दो घड़ी की फुरसत मिलती , पड़ोस के ओझाजी की बेटी सुनीता और जेवनचा की लड़की फुलमति उसे घेर लेतीं और फुसफुस करके पता नहीं क्या-क्या सवाल करके दीदी को हलकान किये रहतीं .
  6. मटियाये धोती में प्राइमरी के मास्टर प्रसाद सर दीखते , हकबकाये हल्ला मचाये कि सूरन अगोरते सतपुतिया कीन रहे थे कहां भटक गए, कैसा कांटा है, बच्चा, किधर अझुरा दिया हमें? आदमी उनींदा फुसफुस बुदबुदाएगा अफ़्रीका, आह, कितने सारे संसारों घुमा दिया हमें..
  7. अधिकांश पार्श्वपथ ( शंट्स) द्रव को उदरावण गह्वर (वेण्ट्रीक्युलो-पेरिटोनियल शंट) में निकाल देते हैं लेकिन वैकल्पिक स्थानों में दाहिना अलिंद (वेण्ट्रीक्युलो-आर्टियल शंट ) फुसफुस गुहा (वेण्ट्रीक्युलो-प्लियुरल शंट ), और पित्ताशय की थैली शामिल हैं रीढ़ के कटिपरक रिक्त स्थान में भी एक पार्श्वपथ प्रणाली स्थापित की जा सकती है और सीएसएफ (
  8. अधिकांश पार्श्वपथ ( शंट्स) द्रव को उदरावण गह्वर (वेण्ट्रीक्युलो-पेरिटोनियल शंट) में निकाल देते हैं लेकिन वैकल्पिक स्थानों में दाहिना अलिंद (वेण्ट्रीक्युलो-आर्टियल शंट ) फुसफुस गुहा (वेण्ट्रीक्युलो-प्लियुरल शंट ), और पित्ताशय की थैली शामिल हैं रीढ़ के कटिपरक रिक्त स्थान में भी एक पार्श्वपथ प्रणाली स्थापित की जा सकती है और सीएसएफ (CSF) को उदरावण गह्वर लम्बर-पेरिटोनियल शंट की ओर पुनः निर्देशित किया जा सकता है.
  9. बदसूरत सुदर्शन हंसता हुआ जांघ खुजाकर कहेगा सब गुटका छाप हैं , गुरु, जीवन है न साहित्य, खाली प्रगतिशीलता है स्साली, और इतना बास छोड़ती है कि आदमी जांघ की जगह नाक खुजाने लगे!मैं हंसना चाहूंगा हंसी पकड़ नहीं आयेगी, मुर्दा फुसफुस में बुदबुदाऊंगा सब सही है, बेटा, स्वतंत्रता चाहनेवाले नैतिकता का ठेका अपने पास रखना चाहते हैं, इतिहास की विसंगतियों पर भारी पोथे हैं पर अपनी किताब कहां है?
  10. अम्मा एकदम्मे चुप लगाकर उठ जातीं और उस दिन रात में कभी कोई उनके मुंह से दबी आवाज़ में ज़रूर सुनता कि पांच बच्चा पैदा करके इस घर को दे दिया तब्बो बुढ़िया को सन्तोख नहीं है ! दीदी को जैसे ही दो घड़ी की फुरसत मिलती, पड़ोस के ओझाजी की बेटी सुनीता और जेवनचा की लड़की फुलमति उसे घेर लेतीं और फुसफुस करके पता नहीं क्या-क्या सवाल करके दीदी को हलकान किये रहतीं.
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