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फफूँदी meaning in Hindi

pronunciation: [ fefunedi ]
फफूँदी meaning in English

Examples

  1. मूत्रालय में फफूँदी तक जम जाती है , बर्तन तब तक नहीं धुलते जब तक खाना सड़ ना जाए और कीड़े ना पड़ने लगें (ये अतिशयाक्ति नहीं है), गंदे संदे अंग वस्त्र (अंडर गार्मेंट्स) दुबारा पहनने पड़ते हैं।
  2. ऐसा समझा जाता है कि ऐतिहासिक तौर पर स्वाद बढ़ाने के लिए मक्खन को जमीन में दबा दिया जाता था , परन्तु दलदल मक्खन को ठंडा भी रखते होंगे जबकि दूब के जीवाणुरोधी गुण इसे फफूँदी से मुक्त रखते होंगे।
  3. यदि छत टपक रही हो , कपड़ों, खाद्य सामग्री आदि में फफूँदी लग रही हो, तब? याद आती है गुजरात के भूकम्प के बाद की वह पहली वर्षा जब पता चला था कि मकान में कितनी जगह अदृष्य दरारें पड़ गईं थीं।
  4. मूत्रालय में फफूँदी तक जम जाती है , बर्तन तब तक नहीं धुलते जब तक खाना सड़ ना जाए और कीड़े ना पड़ने लगें ( ये अतिशयाक्ति नहीं है ) , गंदे संदे अंग वस्त्र ( अंडर गार्मेंट्स ) दुबारा पहनने पड़ते हैं।
  5. मेरा लगाव इस चित्र से इसीलिए है कि एक तो मैं इस चित्र के बनाने के चार-पाँच साल बाद इन प्रतीकों के परस्पर संबन्ध और उनके महत्व को कुछ-कुछ समझ पाया था , दूसरे अब यह फफूँदी से खराब होना शुरू हो गया है।
  6. यदि छत टपक रही हो , कपड़ों , खाद्य सामग्री आदि में फफूँदी लग रही हो , तब ? याद आती है गुजरात के भूकम्प के बाद की वह पहली वर्षा जब पता चला था कि मकान में कितनी जगह अदृष्य दरारें पड़ गईं थीं।
  7. - नीरज मठपाल अगस्त ३१ , २०१० फफूँदी घर के किसी कोने में दरी पर यूँ ही पड़ी एक प्लेट ने उससे पूछा, मैं तीन महीनों से उल्टी गिरी हूँ फफूँदी का मैं अब घर बन चुकी हूँ मुझे कब स्वच्छ पानी का अमृत प्राप्त होगा? फफूँदी हँसने लगी।
  8. - नीरज मठपाल अगस्त ३१ , २०१० फफूँदी घर के किसी कोने में दरी पर यूँ ही पड़ी एक प्लेट ने उससे पूछा, मैं तीन महीनों से उल्टी गिरी हूँ फफूँदी का मैं अब घर बन चुकी हूँ मुझे कब स्वच्छ पानी का अमृत प्राप्त होगा? फफूँदी हँसने लगी।
  9. - नीरज मठपाल अगस्त ३१ , २०१० फफूँदी घर के किसी कोने में दरी पर यूँ ही पड़ी एक प्लेट ने उससे पूछा, मैं तीन महीनों से उल्टी गिरी हूँ फफूँदी का मैं अब घर बन चुकी हूँ मुझे कब स्वच्छ पानी का अमृत प्राप्त होगा? फफूँदी हँसने लगी।
  10. गेहूं में फसल सुरक्षा : बीज शोधन:गेहूँ की फसल में दुर्गन्धयुक्त कण्डुआ, करनालबंट, अनावृत कण्डुआ तथा सेहूँ रोगों का प्रारम्भिक संक्रमण बीज या भूमि अथवा दोनों माध्यम से होता है |रोग कारक फफूँदी, जीवाणु व सूत्र कृमि बीज की सतह पर सतह के नीचेया बीज के अन्दर, प्रसुप्ता अवस्था में मौजूद रहते हैं इसलिए जहाँ तालक सम्भव हो सोधित, उपचारित एवं प्रमाणित बीज हो बोना चाहिए| यदि सम्भव न हो तो निम्न उपाय अपनाये | गेहूँ की फसल में एकीकृत रोग
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