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प्रकृति विरुद्ध meaning in Hindi

pronunciation: [ perkeriti virudedh ]
प्रकृति विरुद्ध meaning in English

Examples

  1. इतना ही नहीं , अब तो सरकारी तंत्र बाढ के समाधान के रूप में नदियों को आपस में जोडने का तर्क प्रस्तुत करता है , पर यह बिल्कुल अव्यवहारिक और प्रकृति विरुद्ध योजना है .
  2. आप मनुष्यों की भाषा तभी बदल सकते हैं जब जुलू या हबशी की रपूत का कई आदमी इन देशों में पैदा कर सकें या उससे भी बढ़कर कोई दूसरा प्राकृतिक अनर्थ जो सर्वथा प्रकृति विरुद्ध है कर सकें।
  3. आप मनुष्यों की भाषा तभी बदल सकते हैं जब जुलू या हबशी की रपूत का कई आदमी इन देशों में पैदा कर सकें या उससे भी बढ़कर कोई दूसरा प्राकृतिक अनर्थ जो सर्वथा प्रकृति विरुद्ध है कर सकें।
  4. आ ० vivan जी प्रिय मित्र , परस्पर सम या विषम लिंगी व्यक्तियों के मध्य आकर्षण सहज मैत्री और आध्यात्मिक भाव प्रेम का परिचायक है , इसके विपरीत सम्लेंगिक योनाचार प्रकृति विरुद्ध निक्रस्त्तम अभिव्यक्ति है , व्यभिचार है …
  5. इसके अलावा तकलीफ होती है लोगों से जो हिन्दी ब्लॉग जगत को साफ़ सुधरा रखने की कोशिश में दुबले होते रहते हैं , ये प्रकृति विरुद्ध है , ये प्रयास सफल नहीं हो सकते ब्लॉग जैसे मुक्त क्षेत्र में ... पीरियड
  6. • शक्ति का विकास करो : महावीर • सामायिक से मन-वचन की शुद्धि • गुरु चरण से निकलते हैं सारे तीर्थ • प्रकृति विरुद्ध कार्य से कष्ट संभव • बाधाओं से पार पाने वाला ही भक्त • सत्य-अंहिसा पर ही टिका है जगत
  7. ने भी सूचित किया कि उसने उसका ( पुत्री का ) भी छः वर्षों से नियमित रूप से , कामुक व प्रकृति विरुद्ध अपराध सहित , शोषण किया और जब बर्मियो ने जे . के साथ संसर्ग किया तब वह उपस्थित थीं |
  8. उलटे जब कभी आपके कहीं चोट लग जाए या हड्डी टूट जाए तो यह तुरन्त उसे ठीक करने के काम में जुट जाती है और यह भी आप जान लें कि यह जीवन शक्ति कभी आपको दंड नहीं देती , बशर्ते कि हम कोई लापरवाही न करें , प्रकृति विरुद्ध कार्य नहीं करें।
  9. उलटे जब कभी आपके कहीं चोट लग जाए या हड्डी टूट जाए तो यह तुरन्त उसे ठीक करने के काम में जुट जाती है और यह भी आप जान लें कि यह जीवन शक्ति कभी आपको दंड नहीं देती , बशर्ते कि हम कोई लापरवाही न करें , प्रकृति विरुद्ध कार्य नहीं करें।
  10. जब वह असावधानी से या गलती से प्रकृति विरुद्ध मार्ग पर चलने लगता है तो उसके शरीर में विजातीय द्रव्य की मात्रा बढ़ने लगती है , जिसके फलस्वरूप देह में तरह- तरह के विष उत्पन्न होने लगते हैं और वातावरण में पाये जाने वाले हानिकारक कीटाणुओं का भी उस पर आक्रमण होने लगता है ।।
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