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पैंजनी meaning in Hindi

pronunciation: [ painejni ]
पैंजनी meaning in English

Examples

  1. जब से काजल डिठौना हुआ , हो गया जो भी होना हुआ ! झम झमाझम हुई देहरी , छम छमाछम बिछौना हुआ बिन पखावज बिना पैंजनी , पाँव ख़ुद छन छनाने लगे !!
  2. जब से काजल डिठौना हुआ , हो गया जो भी होना हुआ ! झम झमाझम हुई देहरी , छम छमाछम बिछौना हुआ बिन पखावज बिना पैंजनी , पाँव ख़ुद छन छनाने लगे !! नैन में जबसे...
  3. बैलों की पगही , गाड़ी की पैंजनी और जुआं ( जिस पर बैल अपना कन्धा रखते हैं ) सँभाले जाते . लढीहा ( बैलगाड़ी ) की इस तरह पूरी साज-सज्जा होती और हम सब कतकी की सुबह का बेसब्री से इंतज़ार करते .
  4. हो सकता है , उसकी अनिच्छा को मान देने की खातिर मां ने इंद्र भैया के बच्चे को देने के लिए कोई उपहार तलाश लिया हो और उसकी पैंजनी की डिबिया यथावत् अलमारी में रख दी हो ! बड़ी देर तक कुछ खभो-खभा रही थीं अलमारी में।
  5. उमड़ता है बांसुरी का इक सुर अजाने मन की गहन गुफ़ा में शिरा में आकर लगे मचलने हैं ज्वार पल पल ही शिंजिनी के पलक पे आ कर टिकी हुइ है बड़े वज़न की लो एक गठरी औ पैंजनी से झनक रहे हैं बदन में स्वर जैसे सनसनी के
  6. चित्रकारी करे , कैनवस कर धरा रख नियंत्रण चले वक्त की चाल पर सॄष्टि का पूर्ण आधार बन कर रहे लिख कहानी अमिट काल के भाल पर मिल मलय में चढ़े शीश पर ईश के और प्रक्षाल दे पाहुने पांव को पनघटॊं की खनकती बने पैंजनी सुंदर शब्द चित्र है यह ..
  7. गूँजती राह में पैंजनी की खनक याकि गागर थकी एक सोई हुई हों सहेली सी बतिया रही चूड़ियां या कि तन्हा हो नथ एक खोई हुई नैन के आंगनों में सपन बैठ कर नींद के साथ शतरंज हों खेलते और चुप इक किनारे खड़ी हो निशा बीते दिवसों का भारी वज़न झेलते
  8. घूँघटों से छन रही हैं जो निरन्तर ज्योत्सनायें वे हुईं हैं भावभीनी नज़्म की हरदम प्रणेता पैंजनी का सुर , मिला संगीत पीतल के कलश का नाचता है जोड़ कर आवाज़ अपनी कंठ स्वर से झिलमिलाती ओढ़नी , गोटे जड़ी उड़ती हवा में ढल गई है शेर में हर एक वह मेरी गज़ल के
  9. शब्द से बंधने लगी है एक सावन की बदरिया राग देकर तान में जाती मुझे गाती कजरिया कह रही है पैंजनी यमुना किनारे की कथा को बाँसुरी से कर रहा लगता इशारे कुछ संवरिया अक्षरों में ढल गये हैं पुष्पपत्रों के तुहिन कण और लगता काव्य , बन कर एक सरिता बह रहा है
  10. चाँदनी , फूल की गंध , पुरबाईयाँ ; सोचता मैं रहा , प्रीत करके लिखूँ पैंजनी और लहरों की अँगड़ाईयाँ , बांसुरी का मैं संगीत करके लिखूँ रूक गई पर कलम आपके नाम पर , पॄष्ठ पर मैने प्रारंभ में जो लिखा आपके नाम में सब समाहित हुआ , शेष क्या ? फिर जिसे गीत करके लिखूँ
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