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पुष्पवृष्टि meaning in Hindi

pronunciation: [ pusepveriseti ]
पुष्पवृष्टि meaning in English

Examples

  1. जैसे मत्त गजराच मद से चारों ओर दिशाओं को सुगन्धित करता है , वैसे ही वसन्तऋतु पुष्पवृष्टि द्वारा चारों ओर दिशाओं को सुगन्धित कर चित्त को चंचल कर देती है।
  2. ) ( रोहिताश्व उठ खड़ा होता है और आश्चर्य से भवगान् को प्रणाम कर के माता पिता का मुंह देखने लगता है , आकाश से फिर पुष्पवृष्टि होती है ) ह.
  3. जैन मंदिर में नरेन्द्र जैन के साçन्नध्य में अभिषेक विघि , पूजा अर्चना , दोपहर में आचार्य विमलसागर के फोटो का अनावरण , दीपक स्थापना , पुष्पवृष्टि , अर्चना की गई।
  4. जैन मंदिर में नरेन्द्र जैन के साçन्नध्य में अभिषेक विघि , पूजा अर्चना , दोपहर में आचार्य विमलसागर के फोटो का अनावरण , दीपक स्थापना , पुष्पवृष्टि , अर्चना की गई।
  5. यहाँ तक कि कल जब उसे अदालत में पेश किया गया तो बड़ी संख्या में अदालत में जमा वकीलों ने उस पर पुष्पवृष्टि की और उसके समर्थन में नारे भी लगा ए .
  6. लगन लग गयी है , तो रात-भर जागना उसके बाएं हाथ का खेल है , जेठ की दुपहरी चैत की चांदनी है , सावन-भादों की झड़ी मंगलोत्सव की पुष्पवृष्टि है , श्मशान की निस्तब्धता , उद्यान का विहंग-कल कूजन है।
  7. भगवान के पीछे आभामण्डल , अशोकवृक्ष , देवों के द्वारा पुष्पवृष्टि , चौसठ चंवर , सिर के ऊपर तीन छत्र आदि अष्ट प्रातिहार्य प्रभु की श्रेष्ठता का ज्ञापन करा रहे थे तथा देखने वाले महान विभूति का चिन्तन कर अपने पापों का प्रक्षालन कर रहे थे।
  8. ह . : तो अब चलें उस से आधा कफन मांगे (आगे बढ़कर और बलपूर्वक आंसुओं को रोककर शैव्या से) महाभागे! स्मशान पति की आज्ञा है कि आधा कफन दिए बिना कोई मुरदा फूंकने न पावे सो तुम भी पहले हमें कपड़ा दे लो तब क्रिया करो (कफन मांगने को हाथ फैलाता है, आकाश से पुष्पवृष्टि होती है)।
  9. ह . : तो अब चलें उस से आधा कफन मांगे ( आगे बढ़कर और बलपूर्वक आंसुओं को रोककर शैव्या से ) महाभागे ! स्मशान पति की आज्ञा है कि आधा कफन दिए बिना कोई मुरदा फूंकने न पावे सो तुम भी पहले हमें कपड़ा दे लो तब क्रिया करो ( कफन मांगने को हाथ फैलाता है , आकाश से पुष्पवृष्टि होती है ) ।
  10. सीता ने अपनी निष्पापता साबित भी कर दी और उन्होंने खुद को भी नष्ट कर दिया , ऐसा क्यों किया ? क्यों नहीं वे प्रजा की जयजयकार और पुष्पवृष्टि के बीच फिर से अपने राम के साथ सुखमय जीवन बिताने को तैयार हुईं ? राम तो उन्हें निष्पाप मानते ही थे और सीता को भी इस बात का अखंड विश्वास था , ऐसा वाल्मीकि रामायण में कई बार स्पष्ट हो जाता है।
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