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पंचमुख meaning in Hindi

pronunciation: [ penchemukh ]
पंचमुख meaning in English

Examples

  1. अन्ना के आंदोलन की खबरों को देशी मीडिया ने तो समर्थन दिया ही विदेशी मीडिया भी पंचमुख से उनकी प्रशंसा करने में पीछे नहीं रहा।
  2. श्री हनुमान जी के बहु रूपों में से एक रूप है श्री पंचमुख आंजनेयर स्वामी जी का जो तमिलनाडू के कुम्बकोनम नामक स्थान पर विराजमान है।
  3. शेष जी भी अपने सहस्र मुख से जिसका वर्णन नहीं कर सकते , शंकर जिसको अपने पंचमुख से नहीं कह सकते,चारो वेदों के ज्ञाता, जगत के रचनाकार ब्रम्ह चार मुख से,
  4. मानवीकरण में वायु प्राण , दस दिशाएं पंचमुख महादेव के दस कान , हृदय सारा विश्व , सूर्य नाभि या केन्द्र और अमृत यानी जल युक्त कमण्डलु हाथ में रहता है।
  5. पंचमुख रूप ” में विग्रह स्थापित है , जो अत्यंत भव्य एवं दर्शनीय है | यहाँ पर प्रचलित कथाओं के अनुसार जब अहिरावण तथा उसके भाई महिरावण ने श्री राम जी को [ ... ]
  6. इस पूरे मंदिर परिसर में कोटिलिंगेश्वर के मुख्य मंदिर के अलावा 11 मंदिर और भी हैं , जिनमें ब्रह्माजी , विष्णुजी , अन्न्पूर्णेश्वरी देवी , वेंकटरमानी स्वामी , पांडुरंगा स्वामी , पंचमुख गणपति , राम-लक्ष्मण-सीता के मंदिर मुख्य रूप से विराजमान हैं .
  7. इस पूरे मंदिर परिसर में कोटिलिंगेश्वर के मुख्य मंदिर के अलावा 11 मंदिर और भी हैं , जिनमें ब्रह्माजी , विष्णुजी , अन्न्पूर्णेश्वरी देवी , वेंकटरमानी स्वामी , पांडुरंगा स्वामी , पंचमुख गणपति , राम-लक्ष्मण-सीता के मंदिर मुख्य रूप से विराजमान हैं .
  8. दो विपरीत छोरों पर बने दो मुख वाले . इसके अतिरिक्त `त्रिमुख 'या` पंचमुख' इत्यादि अवनद्ध वाद्यों के पूर्णगोला-~ कार ढाँचो में यद्यपि एक ही ओर तीन या पाँच मुख बने होते हैं, तथापि इन वाद्यों का प्रत्यक्ष प्रचलन में व्यवहार ने होने के कारणइन्हें अपवाद ही समझना चाहिए.
  9. सृष्टि के वृध्दि करने हेतु भगवान पंचमुख विष्वकर्मा के सघोजात नामवाले पूर्व मुख से सामना दूसरे वामदेव नामक दक्षिण मुख से सनातन , अघोर नामक पश्चिम मुख से अहिंमून , चौथे तत्पुरुष नामवाले उत्तर मुख से प्रत्न और पाँचवे ईशान नामक मध्य भागवाले मुख से सुपर्णा की उत्पत्ति शास्त्रो में वर्णित है।
  10. अगर मै बोलने पर आउं तो सच बात तो मुझे कहनी ही पड़ेगी कि हम जब सभ्यता की बडाई में पंचमुख है , उन्नत तकनीक और सैकड़ों उद्योग , संस्कृति , दर्शन , विज्ञान की सफलता के साथ-साथ महासमारोह के साथ , एक असभ्य , बर्बर प्रथा भी जिन्दा है जिसका नाम है-पुरूषतन्त्र ।
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