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नुक़्स meaning in Hindi

pronunciation: [ nukes ]
नुक़्स meaning in English

Examples

  1. दूसरा एहतेमाल यह है के इसमें औरत की जज़्बाती फ़ितरत की तरफ़ इशारा है के इस मशविरे में जज़्बात की फ़रमानी का ख़तरा ज़्यादा है लेहाज़ा अगर कोई औरत इस नुक़्स से बलन्दतर हो जाए तो इससे मश्विरा करने में कोई हर्ज नहीं है।
  2. सवाल 648 : जब किसी ड्राइवर की गाड़ी में कोई नुक़्स हो जाये और वोह उसके पुर्ज़े और सामान लेने के लिये दूसरे शहर जाये तो क्या इस तरह के सफ़र में वोह पूरी नमाज़ पढ़ेगा या क़स्र , जबकि उस सफ़र में उसकी गाड़ी उसके साथ नहीं है ?
  3. और किसी समय आपने वादे की ख़िलाफ़ वर्ज़ि नहीं करता , किसी चीज़ को पैदा करना , रुज़ी देना , वजूद में लाना , किसी को क्षमा करना-माफ़ करना , करीम , व मेंहैरबा न. ....... है। सिफ़ाते जलाले ख़ुदा ख़ुदा हमेंशा से है और हमेंशा रहेगा वह समस्त नुक़्स व ऐब से पाक व पवित्र है।
  4. ज़ाहिर है के इस ख़ातून में किसी तरह का नुक़्स नहीं पाया जाता है जिसे जनाबे फ़ातेमा ( अ 0 ) और ऐसी औरत भी हो सकती है जिसमें सारे नक़ाएस पाए जाते हों और इन फ़ितरी नक़ाएस के साथ किरदारी और ईमानी नक़ाएस भी हों के यह औरत हर एतेबार से क़ाबिले लानत व मज़म्मत हो।
  5. ‘ अदबे-लतीफ़ ' ( नया साहित्य ) के वार्षिकांक ( 1944 ) में प्रकाशित 1 जनवरी , 1944 को लिखित अपने लेख ‘ अदबे-जदीद ' ( आधुनिक साहित्य ) में मंटो ने लिखा है : “ जिस नुक्स को मेरे नाम से मंसूब किया ( जोड़ा जाता ) है , दरअसल मौजूदा निज़ाम का नुक़्स है - मैं हंगामापसंद नहीं।
  6. और अगर बात उमूमी है तो औरत का शर होना उसकी ज़ात या उसके किरदार के नुक़्स की बुनियाद पर नहीं है बल्कि उसकी बुनियाद सिर्फ़ उसकी ज़रूरत और उसके सरापा का इन्सानी जिन्दगी पर तसल्लत है के मर्द किसी वक़्त भी उससे बेनियाज़ नहीं हो सकता है और इस तरह अकसर औक़ात उसके सामने सरे तस्लीम ख़म करने के लिये तैयार हो जाता है।
  7. 3 . बुख़ल नंग व आर है , और बुज़दिली नुक़्स व ऐब है , और ग़ुरबत मर्दे ज़ीरक व दाना की ज़बान को दलाएल की क़ूवत दिखाने से आजिज़ बना देती है और मुफ़लिस अपने ‘ ाहर में रह कर भी ग़रीबुल वतन होता है और इज्ज़ व दरमान्दगी मुसीबत है और सब्र व ‘ ाकीबाई ‘ ाुजाअत है और दुनिया से बेताल्लुक़ बड़ी दौलत है और परहेज़गारी एक बड़ी सिपर है।
  8. इसकी हक़ीक़त भी क़ाबिले तजज़िया हो जाती और इसकी मानवीयत भी अज़लियत से अलग हो जाती और इसके यहां भी अगर सामने की जहत होती तो पीछे की सिम्त होती और वह भी कमाल का तलबगार होता अगर उसमें नुक़्स पैदा हो जाता , उसमें मसनूआत की अलामतें पैदा हो जाती और वह मदलोल ( सारी चीज़े उसकी हस्ती की दलील ) होने के बाद ख़ुद दूसरे की तरफ़ ( दलील बन जाने ) रहनुमाई करने वाला हो जाता।
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