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निदाघ meaning in Hindi

pronunciation: [ nidaagh ]
निदाघ meaning in English

Examples

  1. और उसी समय निदाघ , दत्तात्रेय, कात्यायन, भारद्वाज, कपिला, वशिष्ठ और पिप्प्लाद ऋषि वहां पहुंचते हैं और वह भी कालाग्निरूद्र से रूद्राक्ष को धारण करने के नियम को जानने की इच्छा प्रकट करते हैं.
  2. और उसी समय निदाघ , दत्तात्रेय , कात्यायन , भारद्वाज , कपिला , वशिष्ठ और पिप्प्लाद ऋषि वहां पहुंचते हैं और वह भी कालाग्निरूद्र से रूद्राक्ष को धारण करने के नियम को जानने की इच्छा प्रकट करते हैं .
  3. पहाड़ के कवि को मारतंड की प्रचंडता का भान कहाँ ? उसे तो रवि मक्खन के गोले जैसा ही लगेगा- हँसता निदाघ रवि अंबर में माखन के कंदुक सा उज्ज्वल हिम वाष्पों का मृदु पट बुनती सुर धनु वितरित किरणें शीतल।।
  4. पत्थर पर टूटने को और जेल मेंकास लेने कोजब निदाघ मेंऔर और श्यामा तू मुझमें एक हुईपका , इतना पीलाकि केसरिया लाल होता हुआरस सेफटता, फूटा सर पर खरबूजकंठ पर बही लम्बी लम्बी धारें मैं एकदम गिरने को दुनिया कीसबसे ऊंची ईमारत की छत से
  5. जाबालोपनिषद छठे भाग में अनेकों ऋषि मुनियों का उदाहरण दिया गया है जिसमें से , श्वेतकेतु , ऋभु , आरूणि , दुर्वासा , निदाघ , जड़भरत , दत्तात्रेय , संवर्तक तथा रैवतक आदि योग्य संन्यासी हुए यह सभी संन्यास के मह्त्व को दर्शाते हैं .
  6. जाबालोपनिषद छठे भाग में अनेकों ऋषि मुनियों का उदाहरण दिया गया है जिसमें से , श्वेतकेतु , ऋभु , आरूणि , दुर्वासा , निदाघ , जड़भरत , दत्तात्रेय , संवर्तक तथा रैवतक आदि योग्य संन्यासी हुए यह सभी संन्यास के मह्त्व को दर्शाते हैं .
  7. कथा कहानी में बीते पल दिन ढलते औ रातों में मौसम की मार न छू पाती जाड़ा गर्मी बरसातों में अब तो मौसम डसने लगते शिशिर शरीर कँपा जाता है आता निदाघ तन झुलसाता सावन भादों तरसाता है कोई कथा सुनाओ माँ झूमे मन-बगिया अमराई सी !
  8. प्रियव्रत के वंश का वर्णन द्वीपों और वर्षों का वर्णन पाताल और नरकों का कथन , सात स्वर्गों का निरूपण अलग अलग लक्षणों से युक्त सूर्यादि ग्रहों की गति का प्रतिपादन भरत चरित्र मुक्तिमार्ग निदर्शन तथा निदाघ और ऋभु का संवाद ये सब विषय द्वितीय अंश के अन्तर्गत कहे गये हैं।
  9. प्रियव्रत के वंश का वर्णन द्वीपों और वर्षों का वर्णन पाताल और नरकों का कथन , सात स्वर्गों का निरूपण अलग अलग लक्षणों से युक्त सूर्यादि ग्रहों की गति का प्रतिपादन भरत चरित्र मुक्तिमार्ग निदर्शन तथा निदाघ और ऋभु का संवाद ये सब विषय द्वितीय अंश के अन्तर्गत कहे गये हैं।
  10. उनके यहां मन्ना डे का आत्मिक आलोड़न नहीं , तलत का कातर भाव या रफी की रूमानी रुलाइयां भी नहीं , एक ऐसा तत्व वैशिष्ट्य है , जिसे व्याख्याओं से नहीं , व्यंजनाओं से ही पकड़ा जा सकता है , जैसे ग्रीष्म की दुपहरियां , ऊंघता निदाघ , सांझ के लंबे साये , झुटपुटे में गुमी किरणों , घड़ी का झूलता पेंडुलम , रेडियो पर रवींद्र संगीत या कतबों के सामने सुबकती मोमबत्तियां।
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