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दुखपूर्ण meaning in Hindi

pronunciation: [ dukhepuren ]
दुखपूर्ण meaning in English

Examples

  1. हस्तरेखा शास्त्र के आधार पर हाथ की रेखाओं से जीवन के सभी रंग सामने आ जाते हैं लेकिन आइए जानें किन विषम रेखाओं के कारण मनचाहे साथी से विवाद होने के बाद भी समस्त वैवाहिक जीवन उतार-चढ़ाव के भंवर में फंसकर दुखपूर्ण हो जाता है।
  2. हस्तरेखा शास्त्र के आधार पर हाथ की रेखाओं से जीवन के सभी रंग सामने आ जाते हैं लेकिन आइए जानें किन विषम रेखाओं के कारण मनचाहे साथी से विवाद होने के बाद भी समस्त वैवाहिक जीवन उतार-चढ़ाव के भंवर में फंसकर दुखपूर्ण हो जाता है।
  3. Free Will vs God is the Doer प्रश्न : आखिर सर्वप्रिय रचता परमात्मा ने आत्माओं की रचना कर अपनी ही रचना को इस दुखपूर्ण संसार में दुःख झेलने के लिए क्यों अकेला छोड़ दिया ? उत्तर : एक दृष्टांत हाज़िर है इस जिज्ञासा के शमन हेतु -एक बहुत धनवान व्यक्ति था।
  4. सब उसी पर निर्भर करता है ! कई बार हम इतने खुश होते है कि अगर उस समय हमारा कोई मित्र कि सी दुखपूर्ण घटना का ज़िक्र करता है तो हम बड़े सहज और सरल ढंग से लेते हैं और उसे भी उस घटना से बाहर निकलने के उपाय बताते हैं या निका लने की कोशिश करते है ...
  5. और अगर द्रौपदी ने अपनी मां की छवि अपनी सास में ढूंढनी चाही तो उसे दुखपूर्ण धोखे के साथ बहुपति विवाह में धकेल दिया गया जिसकी वजह से वह अनेक अश्लील अफवाहों का शिकार बनी ‚ जिसकी दुर्भाग्यपूर्ण अति तब हुई जब कर्ण ने भरी सभा में उसे वेश्या कहा कि जिसका वस्त्रयुक्त और वस्त्रविहीन होना कोई मायने नहीं रखता।
  6. जीवन के कुछ अनुभव , कठिनाईयां , हमारी आंखों को दुखपूर्ण आंसुओं से भर देती हैं , और आंसुओं के धुधंलेपन में हम कुछ स् पष् ट देख नहीं सकते और हम यिर्मयाह नबी की तरह चिल् ला उठते हैं , कि भला होता मेरा सिर जल ही जल , और मेरी आंखें आंसुओं का सोता होती कि मैं रात दिन अपने मरे हुए लोगों के लिये रोता रहता।
  7. संशप्तकों से युद्ध समाप्त करके जब अर्जुन वापस आया तो वह दुखपूर्ण समाचार सुनकर मूर्च्छित हो उठा और अभिमन्यु के लिए आर्त्त स्वर से रुदन करने लगा | श्रीकृष्ण ने उसे काफी धैर्य बंधाया , लेकिन अर्जुन का संताप किसी प्रकार भी दूर नहीं हुआ | प्रतिशोध की आग उसके अंतर में धधकने लगी और जब तक जयद्रथ को मारकर उसने अपने बेटे के खून का बदला न ले लिया , तब तक उसको संतोष नहीं आया |
  8. भी व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन काल में उसके मन के भीतर समय की सतहों का एक पहाड़ सा निर्मित होता रहता है | अनुकूल घटनाएं ठोस धरातल का निर्माण करती है , समय की सतह का , और प्रतिकूल अथवा दुखपूर्ण घटनाएं , सदैव चूँकि भावनाओं से परिपूर्ण होती हैं , अतः इनसे निर्मित समय की सतह आंशिक रूप से तरल सी होती हैं | होने वाली घटनाओं के क्रम में ही समय की परत एक दूसरे के ऊपर स्थापित होती चली जाती हैं |
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