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दिनबदिन meaning in Hindi

pronunciation: [ dinebdin ]
दिनबदिन meaning in English

Examples

  1. दिनबदिन शिक्षा एक व्यवसाय के रूप में विकसित होता जा रहा है जैसे कि आज चिकित्सा क्षेत्र भी मानवता से विरत शुद्ध व्यवसाय में परिवर्तित हो चुका है .
  2. मेरे विचार से भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने में भारतीय चुनाव आयोग की अहम भूमिका है और जिस की वजह से भारत में संस्थाएँ दिनबदिन मज़बूत हो रही हैं .
  3. पिछले दिनों भजनलाल द्वारा फरीदाबाद जिले के एक वरिष्ठ पंजाबी कांग्रेस नेता से मुलाकात की चर्चाएं थीं , वही भजनलाल के बड़े पुत्र चंद्रमोहन की हजकां में शामिल होने की चर्चाएं भी दिनबदिन चलती रहती हैं।
  4. उधर यूनीसेफ का कहना है कि विकासशील देशों में ग़रीब घरों के बच्चों के मरने की संभावना अमीर घरों के बच्चों की तुलनामें दोगुनी होती है। इन गरीब परिवारों की स्थिति दिनबदिन नाजुक होती जा रही है।
  5. हो गये रिश्ते आलपिन जैसे . दिलो-दिमाग़ डस्टबिन जैसे.मन में अंबार कामनाऒं का,अब तो जीना हुआ कठिन जैसे.होड़ जोखिम की और पैसे की,लोग हैं बोतलों के जिन्न जैसे.आज उनका दीदार जम के हुआ,आज का दिन है खास दिन जैसे.साल दर साल उम्र खो बैठे,लम्हा-लम्हा या दिनबदिन...
  6. हो गये रिश्ते आलपिन जैसे . दिलो-दिमाग़ डस्टबिन जैसे.मन में अंबार कामनाऒं का,अब तो जीना हुआ कठिन जैसे.होड़ जोखिम की और पैसे की,लोग हैं बोतलों के जिन्न जैसे.आज उनका दीदार जम के हुआ,आज का दिन है खास दिन जैसे.साल दर साल उम्र खो बैठे,लम्हा-लम्हा या दिनबदिन
  7. जीवित प्राणियों की संख्या धरती पर दिनबदिन बड़ती ही जा रही है और साथ ही पानी की खपत भी , हम पानी की खपत करने में हमेशा से आगे रहे हैं परंतु पानी को बचाने में या पानी को कैसे पैदा किया जाये उसके लिये प्रयत्नशील नहीं हैं।
  8. जीवित प्राणियों की संख्या धरती पर दिनबदिन बड़ती ही जा रही है और साथ ही पानी की खपत भी , हम पानी की खपत करने में हमेशा से आगे रहे हैं परंतु पानी को बचाने में या पानी को कैसे पैदा किया जाये उसके लिये प्रयत्नशील नहीं हैं।
  9. हमारे इतने विशाल लोकतंत्र में जहाँ दिनबदिन महंगाई दर का ग्राफ बढ़ रहा है , लोगों का जीना मुहाल हो रहा है , ऐसे में अगर हमारे मंत्री-संतरी या बाबू लोग अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए 100 - 200 करोड़ रुपए नम्बर दो का बना लेते हैं , तो क्या बुरा करते हैं .
  10. पहले बोलते थे तुम्हारे शब्द सुनता था मेरा मौन - उन स्वरों में मुखरित उपालंभ ; वह बेपरवाह जुमले भी जो उछल जाते थे - मेरी तरफ . ...... इरादतन धीरे धीरे चुकने लगे तुम्हारे शब्द ; होते गए अर्थहीन - सब सन्दर्भ- प्रसंग और मेरा मौन ........... धैर्य और त्याग की लपटों में तपता रहा , निखरता रहा दिनबदिन .......
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