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तोटक meaning in Hindi

pronunciation: [ totek ]
तोटक meaning in English

Examples

  1. तोटक नाम का आद्य शंकराचार्य जी का शिष्य , जिसे अन्य शिष्य अज्ञानी , मूर्ख कहते थे , उसने आचार्यदेवो भव सूत्र को दृढ़ता से पकड़ लिया।
  2. और आपको पता ही होगा कि तोटकाचार्य का तो नाम ही उनके प्रसिद्ध तोटक के आधार पर हुआ था , जिसने आचार्य शंकर को काफ़ी प्रभावित किया था।
  3. अरे ! बोले तोटक क्या कर रहा है ? दौड़ता हुआ आया…, जल्दी आ ! तो हाथ में बर्तन था और राख थी, गुरूजी का बर्तन माँझ रहा था ।
  4. अरे ! बोले तोटक क्या कर रहा है ? दौड़ता हुआ आया … , जल्दी आ ! तो हाथ में बर्तन था और राख थी , गुरूजी का बर्तन माँझ रहा था ।
  5. गुरुगोविन्दाचार्य को पाकर शंकराचार्यजी तथा शंकराचार्य जी को पाकर तोटक अपने को बड़भागी मानते हैं , श्री जनार्दन स्वामी को पाकर एकनाथ जी और एकनाथ जी को पाकर पूरणपोड़ा अपने को बड़भागी मानते हैं तो श्री समर्थ को पाकर शिवाजी अपने को बड़भागी मानते हैं।
  6. गुरु गोविंदपादाचार्य को पाकर शंकराचार्य जी अपने को बड़भागी मानते हैं तथा शंकराचार्य जी को पाकर तोटक अपने को बड़भागी मानते हैं , श्री जनार्दन स्वामी को पाकर एकनाथ जी और एकनाथजी को पाकर पूरणपोड़ा अपने को बड़भागी मानते हैं तो श्री समर्थ को पाकर शिवाजी अपने को बड़भागी मानते हैं।
  7. देश के उत्तरी भाग में हिमालय के शिखर पर ज्योतिर्मठ , पूरब स्थित उडीसा की जगन्नाथपुरीमेंगोवर्धनपीठ, दक्षिण के रामेश्वरम्धाममें श्रृंगेरीपीठ एवं पश्चिम के गुजरात स्थित द्वारकाधीशदरबार में द्वारकापीठकी स्थापना करके उन्होंने अपने चार योग्य शिष्यों-पद्मपाद,सुरेश्व तोटक एवं हस्तामालकआचार्यो को मठाधिपतिनियुक्त कर उन्हें देश को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
  8. 174 मात्रिक सम छंद है - तोमर , चौपई , चौपाई , शृंगार , रोला , रूपमाला , गीतिका , हरिगीतिका , सोरठाा , उल्लाला 175 मात्रिक विषम छंद है- कुण्डलिया , दोहा , रोला , छप्पय 176 वर्णिक सम छंद है- इंद्रवज्रा , उपेन्द्र वज्रा , उपजाति , वंशस्थ , भुजंग प्रयात , तोटक , दु्रतविलम्बित , वसंततिलका , शिखरणी , मंदाक्रांता , मतगयंद , मालती 177 ' किसको पुकारे , यहां रोकर अरण्य बीच , चाहे जो करो शरण्य शरण तिहारे है ' में छंद है - कवित्त 178 दिवस का अवसान समीप था।
  9. 174 मात्रिक सम छंद है - तोमर , चौपई , चौपाई , शृंगार , रोला , रूपमाला , गीतिका , हरिगीतिका , सोरठाा , उल्लाला 175 मात्रिक विषम छंद है- कुण्डलिया , दोहा , रोला , छप्पय 176 वर्णिक सम छंद है- इंद्रवज्रा , उपेन्द्र वज्रा , उपजाति , वंशस्थ , भुजंग प्रयात , तोटक , दु्रतविलम्बित , वसंततिलका , शिखरणी , मंदाक्रांता , मतगयंद , मालती 177 ' किसको पुकारे , यहां रोकर अरण्य बीच , चाहे जो करो शरण्य शरण तिहारे है ' में छंद है - कवित्त 178 दिवस का अवसान समीप था।
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