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तनक़ीद meaning in Hindi

pronunciation: [ tenkeid ]
तनक़ीद meaning in English

Examples

  1. सीधा-सीधा सच पर आ जाना , ,, बिना कोई हेर-फेर किये अदीबों / साहित्यकारों का यही तो फ़र्ज़ / कर्तव्य है और उसे आप बखूबी निभा रही हैं .... और .... आलोचना / तनक़ीद को आप सहज स्वीकारती हैं ..
  2. उसके मरसिए जब अनीस और दबीर और दूसरों ने लिखे तो एहतशाम हुसैन ने अपनी तहक़ीक़ से उस पर तनक़ीद लिखी , उसकी आलोचना लिखी तो उन्होंने कहा कि जितने हिन्दू संस्कार हैं वो इसके अंदर आ गए हैं .
  3. नए और पुराने चिराग , तनक़ीद क्या है, अदब और नज़रिया, (आलोचनात्मक निबंध) ख़्वाब बाकी है (आत्मकथा) आदि रचनाओं के रचयिता आले अहमद को उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी, साहित्य अकादमी, इक़बाल पुरस्कार तथा पद्म भूषण (१९९१) से सम्मानित किया जा चुका है।
  4. नए और पुराने चिराग , तनक़ीद क्या है, अदब और नज़रिया, (आलोचनात्मक निबंध) ख़्वाब बाकी है (आत्मकथा) आदि रचनाओं के रचयिता आले अहमद को उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी, साहित्य अकादमी, इक़बाल पुरस्कार तथा पद्म भूषण (१९९१) से सम्मानित किया जा चुका है।
  5. तनक़ीद कारों के लिए ये किताब बहुत काम की है उन्हें अपने आप से उलझने का सामान मिल सकता है और बड़े - बड़े नक्काद इसी सोच में गोते लगा सकते है कि दीपक गुप्ता ऐसे शे ' र कह कैसे गया।
  6. तरक़्क़ी पसंद तनक़ीद : हक़ीकत और नज़रिया पर आधारित प्रथम सत्र की अध् यक्षता करते हुए अक़ील रिज़वी ने कहा कि साहित् य में समाज की सच् चाई और काव् य सुन् दरता नहीं है तो साहित् य का कोई मतलब नहीं है।
  7. आपको असीमित बधाइयाँ - इस प्रस्तुति के लिये और शायर और शायरी दोनो के उत्कृष्ट मूल्याँकन और सार्थक विवेचना के लिये - तब्सरानिगार तो खैर और भी बहुत से है लेकिन जिस खूबी के साथ आप तनक़ीद करते हैं उसकी मिसाल नहीं ! !
  8. सत्र की शुरूआत दिल् ली से आईं अर्जुमन् द आरा के आधार वक् तव् य से हुआ , उन् होंने कहा कि साहित् य का अध् ययन आधारगत होता है जो वैज्ञानिक तौर पर करना चाहिए तरक् क़ी पसंद तनक़ीद ने यही शिक्षा दी है।
  9. वाह वा दानिश जी , आप की ग़ज़ल का हमेशा इंतज़ार रहता है, बेहद खूबसूरत मतला कहा है............मज़ा आ गया “नयापन आज का, माना, ज़रूरी है...............” वाह वा ये शेर “हमेशा हम निभाएं तौर दुनिया के.........”, “बिना मतलब मेरी तनक़ीद कर-कर के...........” बहुत खूब निभाए हैं.
  10. नीरज भाई ! ! आपको असीमित बधाइयाँ - इस प्रस्तुति के लिये और शायर और शायरी दोनो के उत्कृष्ट मूल्याँकन और सार्थक विवेचना के लिये - तब्सरानिगार तो खैर और भी बहुत से है लेकिन जिस खूबी के साथ आप तनक़ीद करते हैं उसकी मिसाल नहीं !!
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