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ढेंचा meaning in Hindi

pronunciation: [ dhenechaa ]
ढेंचा meaning in English

Examples

  1. गोबर , कम्पोस्ट अथवा अन्य प्रकार की प्राणिज खादों और सनई , ढेंचा आदि हरी खाद , अमोनियम सल्फेट और सुपरफॉस्फेट आदि का भी खाद के रूप में पर्याप्त प्रयोग किया जाता है।
  2. गोबर , कम्पोस्ट अथवा अन्य प्रकार की प्राणिज खादों और सनई , ढेंचा आदि हरी खाद , अमोनियम सल्फेट और सुपरफॉस्फेट आदि का भी खाद के रूप में पर्याप्त प्रयोग किया जाता है।
  3. इसके अलावा इस साल की शुरुआत में बहुचर्चित ढेंचा बीज घोटाले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात करने के बावजूद इस दिशा में गंभीरता न दिखा कर भी वह अपने रुख से पलटती ही दिखी .
  4. इसके अलावा इस साल की शुरुआत में बहुचर्चित ढेंचा बीज घोटाले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात करने के बावजूद इस दिशा में गंभीरता न दिखा कर भी वह अपने रुख से पलटती ही दिखी .
  5. नाइट्रोजन देनेवाली कुछ वस्तुएँ ये हैं : -(क) जीवजनिक (ऑर्गैनिक) स्रोत : गोबर, लीद, मूत्र, कूड़ा कर्कट आदि की खाद; खली तथा हरी फसलें जो खाद के रूप में काम में आ सकती हैं, जैसे सनई, तिनपतिया (क्लोवर) मूँग, ढेंचा आदि।
  6. नाइट्रोजन देनेवाली कुछ वस्तुएँ ये हैं : -(क) जीवजनिक (ऑर्गैनिक) स्रोत : गोबर, लीद, मूत्र, कूड़ा कर्कट आदि की खाद; खली तथा हरी फसलें जो खाद के रूप में काम में आ सकती हैं, जैसे सनई, तिनपतिया (क्लोवर) मूँग, ढेंचा आदि।
  7. 7 . भूमि में नाइट्रोजन की पूर्ति- दलहन वर्ग की फसलों को, जैसे सनई, ढेंचा, मूँग इत्यादि, भूमि में तीन या चार वर्ष में एक बार जोत देने से, न केवल कार्बनिक पदार्थ ही मिलते हैं अपितु नाइट्रोजन भी मिलता है, क्योंकि इनकी जड़ की छोटी-छोटी गाँठों में नाइट्रोजन स्थापित करने वाले जीवाणु होते हैं।
  8. 7 . भूमि में नाइट्रोजन की पूर्ति- दलहन वर्ग की फसलों को, जैसे सनई, ढेंचा, मूँग इत्यादि, भूमि में तीन या चार वर्ष में एक बार जोत देने से, न केवल कार्बनिक पदार्थ ही मिलते हैं अपितु नाइट्रोजन भी मिलता है, क्योंकि इनकी जड़ की छोटी-छोटी गाँठों में नाइट्रोजन स्थापित करने वाले जीवाणु होते हैं।
  9. 7 . भूमि में नाइट्रोजन की पूर्ति - दलहन वर्ग की फसलों को , जैसे सनई , ढेंचा , मूँग इत्यादि , भूमि में तीन या चार वर्ष में एक बार जोत देने से , न केवल कार्बनिक पदार्थ ही मिलते हैं अपितु नाइट्रोजन भी मिलता है , क्योंकि इनकी जड़ की छोटी-छोटी गाँठों में नाइट्रोजन स्थापित करने वाले जीवाणु होते हैं।
  10. 7 . भूमि में नाइट्रोजन की पूर्ति - दलहन वर्ग की फसलों को , जैसे सनई , ढेंचा , मूँग इत्यादि , भूमि में तीन या चार वर्ष में एक बार जोत देने से , न केवल कार्बनिक पदार्थ ही मिलते हैं अपितु नाइट्रोजन भी मिलता है , क्योंकि इनकी जड़ की छोटी-छोटी गाँठों में नाइट्रोजन स्थापित करने वाले जीवाणु होते हैं।
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