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ठठेरी meaning in Hindi

pronunciation: [ thetheri ]
ठठेरी meaning in English

Examples

  1. मेरा यह कलम सप्रयास तो कविता की गहराई तक उतरने से रहा , ठठेरी , चितेरी , लुटेरी जैसे काफिये भिड़ाये जाने तक ही बात नहीं है ।
  2. डुमरांव ( कोर्ट) : नगर के बाईपास रोड कहे जानेवाले ठठेरी बाजार की आधी अधूरी सड़क बनने से मुहल्लेवासी आक्रोशित हैं, क्योकि बरसात आने से मुहल्लेवासी सहम जाते है.
  3. पालिका सदस्य पद के लिए निरालानगर से शशि तिवारी , विवेकनगर से अनुराग श्रीवास्तव , ठठेरी बाजार से दिनेश चौरसिया , शाहगंज से शंकुलता देवी , लालडिग्गी से देवकी जायसवाल , शास्त्रीनगर इंदिरा सिंह आदि ने पर्चा भरा।
  4. पालिका सदस्य पद के लिए निरालानगर से शशि तिवारी , विवेकनगर से अनुराग श्रीवास्तव , ठठेरी बाजार से दिनेश चौरसिया , शाहगंज से शंकुलता देवी , लालडिग्गी से देवकी जायसवाल , शास्त्रीनगर इंदिरा सिंह आदि ने पर्चा भरा।
  5. राम दयाल मन्दिर , ठठेरी बाजार , गल्ला मण्डी , बाटा गली , हनुमानगढी , कोतवाली के पीछे हनुमान मन्दिर , अमहट चैराहा स्थित शिव मन्दिर सहित शहर के तमाम मन्दिरों व मुहल्लो मे झांकियां सजाकर श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया।
  6. राम दयाल मन्दिर , ठठेरी बाजार , गल्ला मण्डी , बाटा गली , हनुमानगढी , कोतवाली के पीछे हनुमान मन्दिर , अमहट चैराहा स्थित शिव मन्दिर सहित शहर के तमाम मन्दिरों व मुहल्लो मे झांकियां सजाकर श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया।
  7. ठठेरी बाजार में जहां तीसरे दिन घोषित रूप से कपड़ा फाड़ होली खेली गई , वहीं कटरा , अल्लापुर , चौक , लोकनाथ , खुल्दाबाद , मुट्ठीगंज और मीरापुर चौराहों पर छोटी और बड़ी होली के दोनों दिन दोपहर बाद कपड़ा फाड़ होली हुई।
  8. चौखंभा स्थित विशाल गोपाल मंदिर के द्वार के आस पास लगने वाली दुकानों से माला-फूल , गोपाल जी के सुंदर वस्त्र , मोतियों की माला , केले के छोटे-छोटे खंभे , अशोक के पत्ते और ठठेरी बाजार से थोड़े बहुत खिलौने खरीद लिये जो वे खरीद सकते थे।
  9. क़ायदे से मुझे अपने घर और मोहल्ले से प्यार होना चाहिए था मगर इश्क़ मुझे बहादुरगंज , कोतवाली, घंटाघर, ठठेरी बाज़ार, बर्फवाली गली, सब्ज़ी मंडी, पत्थरगली, चुड़ैलीवाली गली, स्टेशन रोड गढ़ी, सराय वगैरह से है जहाँ गलियों के डेल्टा और मधुमक्खियों के छतों की तरह मकानों की भरमार है।
  10. दर्जनों भोजपुरी साहित्य कविता संग्रह एकांकी में यथा चितचोर , गीत मंजरी, जब से सूझ तब से बूझ एकांकी, श्री डुमरेजिन चालीसा, आपन देश आपन गीत, तिलक (एकांकी), बंगला देश(एकांकी) व बाल गीत माला आदि कालजयी साहित्य के रचयिता विश्वनाथ प्रसाद शैदा का जन्म नगर के ठठेरी बाजार में हुआ था।
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