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जाति पाँति meaning in Hindi

pronunciation: [ jaati paaneti ]
जाति पाँति meaning in English

Examples

  1. इनकी बानी में भी वे ही प्रसंग हैं , जो निर्गुणमार्गियों की बानियों में साधारणत : आया करते हैं ; जैसेईश्वर की व्यापकता , सतगुरु की महिमा , जाति पाँति का निराकरण , हिंदू मुसलमानों का अभेद , संसार की अनित्यता , आत्मबोध इत्यादि।
  2. इनकी बानी में भी वे ही प्रसंग हैं , जो निर्गुणमार्गियों की बानियों में साधारणत : आया करते हैं ; जैसेईश्वर की व्यापकता , सतगुरु की महिमा , जाति पाँति का निराकरण , हिंदू मुसलमानों का अभेद , संसार की अनित्यता , आत्मबोध इत्यादि।
  3. वर्तमान काल मेँ जाति पाँति का भेदभाव न रखकर अत्याचारियो आतड़्कवादियो और भ्रष्टाचारियो के विरुद्ध अस्त्र उठाने की प्रेरणा देने वालो मे सर्वश्रेष्ठ मूलपुरुष श्रीपरशुराम जी की जयन्ती हम सभी को मनाते हुए एकजुट होकर अत्याचार भ्रष्टाचार और आतड़्कवाद से लोहा लेने के लिए कृतसड़्कल्प होना है ।
  4. उत्तर- गरुड़ पुराण में लिखा है कि यह गरुड़ पुराण सूत जी ने ऋषियों को सुनाया था और विष्णु भगवान ने गरुड़ से कहा था . होगा . मगर सूत जी कौन थे ? यह स्वयं इतिहास से समझ लो . यहाँ जाति पाँति का प्रश्न नहीं है .
  5. खाने के कारण न तो स्कूलों में छात्रों की संख्या में इजाफा हुआ है ना कुपोषण खत्म हुआ और सरकार का तीसरा तर्क जिसमें की कुछ दम लगता था ( कि बच्चे साथ खाएंगे तो जाति पाँति की संरचना ध्वस्त होगी ) वह भी वैसे ही धराशई हो गया यह आप गांव की घोर सवर्ण मानसिकता देखकर जान सकते हैं ।
  6. परिणामतः केरल का एक नया इतिहास बना जो साम्राज्यों और युद्धों का इतिहास है , भाषा और साहित्य के विकास का इतिहास है, विदेशी सेनाओं के आगमन तथा उनके दीर्घकालीन उपनिवेश बन जाने का इतिहास है, जाति पाँति और शोषण का इतिहास है, शिक्षा में हुई प्रगति और वैज्ञानिक क्षेत्रों में हुई तर्क्की का इतिहास है, व्यापारिक प्रगति और सामाजिक नबजागरण और जनतांत्रिक संस्थाओं के आविर्भावों का इतिहास है ।
  7. बात उन दिनों की है जब हम रहते थे गाँव में और खेलते थे इमली की छाँव में तब कई मित्र थे मेरे जो घंटों रहते थे घेरे तब जाति पाँति का नहीं था ज्ञान तब नहीं था कोई हिन्दू या मुसलमान तब हम सब थे भाई भाई वे दिन , कितने सुहाने और नेक थे जब हम सब एक थे तब नहीं थी बिजली की रोशनी केवल एक दीप टिमटिमाता था जो अंधकार में राह दिखाता था ।
  8. : : सुभाष यादव भारती :: मेरा गाँव बात उन दिनों की है जब हम रहते थे गाँव में और खेलते थे इमली की छाँव में तब कई मित्र थे मेरे जो घंटों रहते थे घेरे तब जाति पाँति का नहीं था ज्ञान तब नहीं था कोई हिन्दू या मुसलमान तब हम सब थे भाई भाई वे दिन, कितने सुहाने और नेक थे जब हम सब एक थे तब नहीं थी बिजली की रोशनी केवल एक दीप टिमटिमाता था जो अंधकार में राह दिखाता था ।
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