चुग़ली meaning in Hindi
pronunciation: [ chugaeli ]
Examples
- ( इस शिक्षा में यह तथ्य निहित है कि छोटे-बड़े अधिकांश पाप ( झूठ , गाली-गलौज , दूसरों का अपमान , चुग़ली , परनिन्दा ( ग़ीबत ) , ग़लत आरोप , बुरी व गंदी वार्ता , दूसरों का चरित्र हनन आदि ) ज़बान से होते हैं ; और यौन-अनाचार , यौन-दुष्कर्म , अनैतिक व अवैध संभोग गुप्तांगों से ) ।
- ( इस शिक्षा में यह तथ्य निहित है कि छोटे-बड़े अधिकांश पाप ( झूठ , गाली-गलौज , दूसरों का अपमान , चुग़ली , परनिन्दा ( ग़ीबत ) , ग़लत आरोप , बुरी व गंदी वार्ता , दूसरों का चरित्र हनन आदि ) ज़बान से होते हैं ; और यौन-अनाचार , यौन-दुष्कर्म , अनैतिक व अवैध संभोग गुप्तांगों से ) ।
- अगर इसी बात को कहते समय अपने दाएँ व बाएँ इसलिए देखा जाए कि और कोई दूसरा सुनने वाला तो नहीं है फिर अपना मुँह सुनने वाले के कान के पास ले जाने की कोशिश में गर्दन थोड़ी आगे निकाली जाए , होठों परएक हल्की सी मुस्कुराहट के साथ एक आँख दबाकर बात कही जाए तो यह चुग़ली रूपी सूचना हो जाती है।
- गोया कि जो व्यक्ति पैशाब करते समय अपने कपड़े और शरीर को पैशाब के छींटे से सुरक्षित नहीं रखता तो अल्लाह तआला उसे क़ब्र की यातनाओं में लिप्त करेगा , इसी तरह जो व्यक्ति लोगों के बीच चुग़ली खा कर लोगों को आपस में लड़ाता है , उन के बीच दुशमनी और नफरत पैदा करता है तो ऐसे व्यक्ति को भी कब्र मै अल्लाह तआला यातनाए देगा .
- चुगली सुनने का परहेज़ ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाता और एक दिन ऐसा आता है कि परहेज़गार लोग भी होठों पर हल्की मुस्कराहट के साथ , चुग़ली रूपी सूचना को ग्रहण करने के लिए अपनी गर्दन आगे की ओर निकाल देते हैं क्योंकि उन्हें भी यह एहसास होने लगता है कि सूचना के बिना मनुष्य अधूरा रहता है इसलिए वे भी सूचनाओं के आदान प्रदान में लग जाते हैं भले ही प्रारम्भ में बड़े आदर्श की बातें करते हों।
- चुगली सुनने का परहेज़ ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाता और एक दिन ऐसा आता है कि परहेज़गार लोग भी होठों पर हल्की मुस्कराहट के साथ , चुग़ली रूपी सूचना को ग्रहण करने के लिए अपनी गर्दन आगे की ओर निकाल देते हैं क्योंकि उन्हें भी यह एहसास होने लगता है कि सूचना के बिना मनुष्य अधूरा रहता है इसलिए वे भी सूचनाओं के आदान प्रदान में लग जाते हैं भले ही प्रारम्भ में बड़े आदर्श की बातें करते हों।
- प्रिय रसूल स 0 अ 0 स 0 दो क़ब्रों के निकट से गुज़रे तो आप स 0 अ 0 स 0 ने फरमाया ” इन दोनों क़ब्र वालों को अज़ाब दी जा रही है और इन्हें किसी बड़े पाप के कारण अज़ाब नही दी जा रही है बल्कि पहले व्यक्ति को केवल इस कारण यातनाऐं दी जा रही है कि वह पैशाब करते समय पैशाब के छींटे से बचता नहीं था और दुसरा व्यक्ति लोगों के बीच चुग़ली खाता था।
- उनकी एक मशहूर कविता ‘दुनिया ' की भाषा में यही क्रीड़ाभाव देखा जा सकता है, लोग या तो कृपा करते हैं या ख़ुशामद करते हैं लोग या तो ईर्ष्या करते हैं या चुग़ली खाते हैं लोग या तो शिष्टाचार करते हैं या खिसियाते हैं लोग या तो पश्चात्ताप करते हैं या घिघियाते हैं न कोई तारीफ़ करता है न कोई बुराई करता है न कोई हंसता है न कोई रोता है न कोई प्यार करता है न कोई नफ़रत लोग या तो दया करते हैं या घमण्ड दुनिया एक फंफुदियायी हुई सी चीज़ हो गयी है।