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गोभिल meaning in Hindi

pronunciation: [ gaobhil ]
गोभिल meaning in English

Examples

  1. [ 12 ] आपस्तम्ब * , शांखायन * , बौधायन * , भारद्वाज * एवं गोभिल * गृह्यसूत्र तथा याज्ञवल्क्य * , आपस्तम्बधर्मसूत्र * स्पष्ट कहते हैं कि वर्षों की गणना गर्भाधान से होनी चाहिए।
  2. गोभिल गृह्यसूत्र [ 182 ] ने यह कहकर आरम्भ किया है कि रात्रि अष्टका की देवता है , किन्तु इतना जोड़ दिया है कि देवता के विषय में अन्य मत भी हैं , यथा - अग्नि , पितर , प्रजापति , ऋतु या विश्वे-देव।
  3. ( पर्यायवाची - अमा, अमावस, अमवसा, कुहू, दर्श, मावस, मासांत, सिनीवाली, सूयदुसंगम) नूतन चन्द्रमा का दिन, वह समय जब कि सूर्य और चन्द्रमा दोनों संयुक्त रहते हैं, प्रत्येक चान्द्र मास के कृष्ण पक्ष का पन्द्रहवाँ दिन - ‘सूर्याचन्द्रमसोः यः परः संन्निकर्षः साऽमावस्या - गोभिल., चन्द्रमा की सोलहवीं कला।
  4. गोभिल गृ . सू . के अनुसार “ मेधाजनन ' संस्कार के समय पिता शिशु को मधुघृत का प्राशन कराकर उसके कान में कहता था “ तू वेद है ' तथा उसके साथ उसका एक नाम भी रखता था , जिसे अभिचार भय से गुप्त रखा जाता था।
  5. * बड़नगरा , विशनगरा , भटनागर , नागर , माथुर , मूलगाँवकर इत्यादि स्थानवाचक नाम हैं , * वंश के पूर्व पुरुष के नाम , जैसे- सान्याल ( शाण्डिल्य ) , नारद , विशष्ठ , कौशिक , भारद्वाज , काश्यप , गोभिल ये नाम वंश या गोत्र के सूचक हैं।
  6. * बड़नगरा , विशनगरा , भटनागर , नागर , माथुर , मूलगाँवकर इत्यादि स्थानवाचक नाम हैं , * वंश के पूर्व पुरुष के नाम , जैसे- सान्याल ( शाण्डिल्य ) , नारद , विशष्ठ , कौशिक , भारद्वाज , काश्यप , गोभिल ये नाम वंश या गोत्र के सूचक हैं।
  7. उल्लेख्य है कि नामकरण की समयावधि के विषय में प्राचीन सूत्रकारों तथा स्मृतिकारों में बड़ा मतभेद पाया जाता है , यथा - आश् व. शांखा . , गोभिल , खादिर , काठक एवं वृहदारण्यकोपनिषद् के मत से कतिपय धर्मशास्रोकारों के मत से भी शिशु का नामकरण जन्म के दिन ही कर दिया जाना चाहिए।
  8. उल्लेख्य है कि नामकरण की समयावधि के विषय में प्राचीन सूत्रकारों तथा स्मृतिकारों में बड़ा मतभेद पाया जाता है , यथा - आश् व. शांखा . , गोभिल , खादिर , काठक एवं वृहदारण्यकोपनिषद् के मत से कतिपय धर्मशास्रोकारों के मत से भी शिशु का नामकरण जन्म के दिन ही कर दिया जाना चाहिए।
  9. उल्लेख्य है कि नामकरण की समयावधि के विषय में प्राचीन सूत्रकारों तथा स्मृतिकारों में बड़ा मतभेद पाया जाता है , यथा - आश् व. शांखा . , गोभिल , खादिर , काठक एवं वृहदारण्यकोपनिषद् के मत से कतिपय धर्मशास्रोकारों के मत से भी शिशु का नामकरण जन्म के दिन ही कर दिया जाना चाहिए।
  10. तो सुनि ए . .. मनु ने स्त्रियों के संबंध में जो व्यवस्था दी है उसे आगे चलकर याज्ञवल्क्य , अत्रि , वशिष्ठ , विष्णु , कण्व , गौतम , प्रजापति , बोधायन , गोभिल , नारद , प्रचेता , जाबालि , शौनक , उपमन्यु , दक्ष , कश्यप , शांदिल्य , कात्यायन , पराशर आदि आदि सभी स्मृतिकारों ने समर्थन किया है।
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