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गेरुई meaning in Hindi

pronunciation: [ gaerue ]
गेरुई meaning in English

Examples

  1. गेहूँ की फसल में एकीकृत रोग प्रबंधन : प्रमुख रोग : ( १ ) काली गेरुई ( २ ) भूरी गेरुई ( ३ ) पीली गेरुई ( ४ ) करनाल बंट ( ५ ) अनावृत कण्डुआ ( ६ ) सेहूँ ( ७ ) स्पाट ब्लाच ( ८ ) काली गेरुई अपनाई जाने वाली प्रमुख क्रियाएं : मृदा उपचार : बुवाई से पूर्व जैव कवकनाशी ( ट्राईकोडरमा प्रजाति आधारित ) के द्वारा २ .
  2. गेरुई तथा रतुआ रोग : यह भूरे पीले एवं काले रंग की होती है , काली गेरुई पत्ती एवं तना दोनों पर ही लगते है , इन सब की रोकथाम के लिए मैन्कोजेब 2.0 किलोग्राम या जिनेब 2.5 किलोग्राम का छिडकाव प्रति हेक्टर की दर से करना चाहिए अथवा प्रोपिकोनजाल 25 % ई.स ी . को 1 / 2 लीटर 1000 लीटर पानी में मिलकर प्रति हेक्टर की दर से छिडकाव करना चाहिएI
  3. गेरुई तथा रतुआ रोग : यह भूरे पीले एवं काले रंग की होती है , काली गेरुई पत्ती एवं तना दोनों पर ही लगते है , इन सब की रोकथाम के लिए मैन्कोजेब 2.0 किलोग्राम या जिनेब 2.5 किलोग्राम का छिडकाव प्रति हेक्टर की दर से करना चाहिए अथवा प्रोपिकोनजाल 25 % ई.स ी . को 1 / 2 लीटर 1000 लीटर पानी में मिलकर प्रति हेक्टर की दर से छिडकाव करना चाहिएI
  4. आर्थिक कारणों कवकनाशी के छिड़काव की आम संस्तुति नही की जाती है | केवल उन परिस्थितियों में जिनमे गेहूँ की पैदावार कम से कम २५-३० कुंतल प्रति हेक्टेयर होने व गेरुई का प्रकोप होने की प्रबल सम्भावनामें मैकोजेब २ . ० किग्रा. या जिनेब २.५ किग्रा. प्रति हेक्टेयर का छिड़काव किया जा सकता है | पहला छिड़काव रोग दिखाई देते ही तथा दूसरा छिड़काव १० दिन के अंतर पर करना चाहिए | एक साथ झुलसा, रतुआ तथा करनाल बंटतीनो रोगों की असंका होने पर प्रोपीकोनेजोल (२५ प्रतिशत ई.
  5. मसूर की फसल के रोग जैसे की उकठा रोग , गेरुई रोग, ग्रीवा गलन, मूल गलन प्रमुख हैI इस रोग से फसल को बचाने के लिए बुवाई से पूर्व बीज को थीरम नामक रसायन 2.5 ग्राम मात्रा या 4 ग्राम ट्राईकोडरमा से प्रति किलोग्राम बीज दर से उपचारित करके ही बुवाई करनी चाहिएI फसल को मृदा जनित रोगों जैसे ग्रीवा गलन मूल गलन आदि के बचाव के लिए भूमि में 5 किलो ट्राईकोडरमा पाउडर को गोबर की खाद में मिलाकर मिट्टी में मिला देनी चाहिएI जिससे की रोगों का प्रकोप न हो सकेI
  6. मसूर की फसल के रोग जैसे की उकठा रोग , गेरुई रोग, ग्रीवा गलन, मूल गलन प्रमुख हैI इस रोग से फसल को बचाने के लिए बुवाई से पूर्व बीज को थीरम नामक रसायन 2.5 ग्राम मात्रा या 4 ग्राम ट्राईकोडरमा से प्रति किलोग्राम बीज दर से उपचारित करके ही बुवाई करनी चाहिएI फसल को मृदा जनित रोगों जैसे ग्रीवा गलन मूल गलन आदि के बचाव के लिए भूमि में 5 किलो ट्राईकोडरमा पाउडर को गोबर की खाद में मिलाकर मिट्टी में मिला देनी चाहिएI जिससे की रोगों का प्रकोप न हो सकेI
  7. मसूर की फसल के रोग जैसे की उकठा रोग , गेरुई रोग , ग्रीवा गलन , मूल गलन प्रमुख हैI इस रोग से फसल को बचाने के लिए बुवाई से पूर्व बीज को थीरम नामक रसायन 2.5 ग्राम मात्रा या 4 ग्राम ट्राईकोडरमा से प्रति किलोग्राम बीज दर से उपचारित करके ही बुवाई करनी चाहिएI फसल को मृदा जनित रोगों जैसे ग्रीवा गलन मूल गलन आदि के बचाव के लिए भूमि में 5 किलो ट्राईकोडरमा पाउडर को गोबर की खाद में मिलाकर मिट्टी में मिला देनी चाहिएI जिससे की रोगों का प्रकोप न हो सकेI
  8. मसूर की फसल के रोग जैसे की उकठा रोग , गेरुई रोग , ग्रीवा गलन , मूल गलन प्रमुख हैI इस रोग से फसल को बचाने के लिए बुवाई से पूर्व बीज को थीरम नामक रसायन 2.5 ग्राम मात्रा या 4 ग्राम ट्राईकोडरमा से प्रति किलोग्राम बीज दर से उपचारित करके ही बुवाई करनी चाहिएI फसल को मृदा जनित रोगों जैसे ग्रीवा गलन मूल गलन आदि के बचाव के लिए भूमि में 5 किलो ट्राईकोडरमा पाउडर को गोबर की खाद में मिलाकर मिट्टी में मिला देनी चाहिएI जिससे की रोगों का प्रकोप न हो सकेI
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