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गुन्डा meaning in Hindi

pronunciation: [ gaunedaa ]
गुन्डा meaning in English

Examples

  1. जिस तरह मुहल्ले मे रहने वाले किसी गुन्डे को मुहल्ले के ही कुछ लोग इसलिये पटाकर रखते है कि उससे न सिर्फ उनका बचाव होगा बल्कि अन्य पडोसियो को मौका पडने पर डराने धमकाने के काम भी वो गुन्डा आता है।
  2. परा-परा ठुठी पीपर , आवथीक, जाथीक, जम जाल, हिरा जाल, रेंगा जाल, केंवटा बीरा, जाले मारी, ले चली, ओकासी, ढेंकासी, आलो सुनी, पालो सुनी, डगर भुला, कंपनी, जंपनी, दे तो हरदी गुन्डा, धोआ चाउर, हमर चिन्ता, आवथीक, जाथीक, ठाढ़ कर देथव, सिद्ध गुरु
  3. जब कोई गुन्डा पुलिस के हाथों मारा जाये ( तो क्या गोली चलाने वाले अफ़सर को पाप लगेगा ? या वो उस गुन्डे की मौत का निमित्त था ) प्लीज इस पर भी अपनी राय जरुर पेश करें ? दिल्ली से .. ।
  4. अबही बानी नादान का संगीतमय मुहूर्त सम्पन्न शिव भक्त विनय आनंद करेंगे शिवचर्चा भोजपुरी सिनेमा में भी सक्रीय नेहा श्री पाखी का स्पेशल गाना आग में जले प्रवेशलाल मैं माचिस की तिल्ली हू आग लगा दूँगी ग्लोरी राजवीर का संगीतमय मुहूर्त निरहुआ की वर्दी वाला गुन्डा
  5. इतना सब होने के बावजूद यहां न तो एक बार भी हरियाणा के विधायकों द्वारा किए गए ' आयाराम गयारामÓ जैसा खेल हुआ न ही उत्तरप्रदेश अथवा बिहार के कतिपय हिस्सों में चुनाव बूथों को लूटने की जैसी घटनाएं हुई हैं , तभी तो प्रसिद्ध कवि श्री सूर्यकुमार पांडेय ने अपनी एक कविता में अपने उद्गार निम्न प्रकार से प्रकट किए हैं- ' कतहुं सुरक्षा-चक्र न टूटा , गुन्डा एकहु बूथ न लूटा .
  6. इतना सब होने के बावजूद यहां न तो एक बार भी हरियाणा के विधायकों द्वारा किए गए ' आयाराम गयारामÓ जैसा खेल हुआ न ही उत्तरप्रदेश अथवा बिहार के कतिपय हिस्सों में चुनाव बूथों को लूटने की जैसी घटनाएं हुई हैं , तभी तो प्रसिद्ध कवि श्री सूर्यकुमार पांडेय ने अपनी एक कविता में अपने उद्गार निम्न प्रकार से प्रकट किए हैं- ' कतहुं सुरक्षा-चक्र न टूटा , गुन्डा एकहु बूथ न लूटा .
  7. तन पर सफ़ेद कुर्ता ऒर द्दोती साजॆ ! !राक्षसी प्रबृति के लोगो ने राजनिति का किया हॆ खंड्न ! फ़ॆली गुन्डा गर्दी हुआ समाज मे खन्ड्न!!विद्या वीहिन लोग हुए राजनिति मे अति चातूर ! कहते है मै हूँ जनता की सेवा करने को आतूर !!चरित्र वीहिन हो गया है सब नेता ! समाज के जितने भी अवगुण सब इनमे बस लेता !!भोली सकल लेकर जनता के सन्मुख आवा ! जीत चुनाव पाँच साल फिर नही कबहू मुँख दिखावा !!महाकाल रुप धरि सब कुछ लीए डकारे ! हमरे देश का कानून सुबह शाँम झाडू मारे इनके दुवारे !!
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