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गंभीरी meaning in Hindi

pronunciation: [ ganebhiri ]
गंभीरी meaning in English

Examples

  1. वाह ताऊ जी ! आज तो लगता गंभीरी व मुस्कान दोनों देवियों को प्रसन्न कर दिया | दोनों ही रचनाएँ एक से बढकर एक | रमलू सियार बोला - अबे शेर...हम तो वक्त के गुलाम हैं...और वक्त कभी ठहरता नही है..
  2. शाम को जैसे ही वह गंभीरी बीर से दर्शन करके घर में पहुंची तो उन्होंने पाया कि शुक्लाजी बिस्तर पर अधलेटे इंडिया टीवी पर पानी पर चलने वाले किसी बाबा के दर्शन कर रहे हैं और दोनों लड़कियां घर से ग़ायब हैं।
  3. गंभीरी घर ' ( हिंदी में ' बन्द कमरा ' ) उपन्यास दरअसल एक पाकिस्तानी मुस्लिम चित्रकार और भारतीय गृहिणी महिला के बीच इन्टरनेट के जरिये पनपा प्यार की कहानी है जिसे प्रमुख हिन्दू वादी संगठनों ने एतराज भी जताया है .
  4. एडवोकेट मदनलाल जैन ने बताया कि मुख्य कार्यक्रम के तहत भव्य जलयात्रा एवं शोभायात्रा दोपहर में ढूंचा बाजार स्थित बड़ा मंदिर जी श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ हुई , जो गंभीरी नदी पहुंची, वहां नंदीश्वर भगवान की पूजा कर जल कलश भरे गए ।
  5. 42 डिग्री पार के तापमान वाली दुपहरी में जब लोग एसी या कूलर से दूर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते , ऐसे समय भी 65 साल की काया वाला ईस्माइल नियारगर यहां गंभीरी नदी के सूखे पड़े पेटे में मेहनत से पेट भरने की जुगत कर रहा है।
  6. ( ‘ रेप तथा अन्य कहानियाँ ' ( 2011 ) के बाद राजपाल एंड साँस ने सरोजिनी साहू के चर्चित उपन्यास ‘ ( अंग्रेजी : ‘ The Dark Abode ' / ओडिया ‘ गंभीरी घर ' ) ' का हिंदी अनुवाद ‘ बंद कमरा ‘ शीर्षक से प्रकाशित किया है।
  7. ब्रज की पौराणिक काल से चली आ रही ' चौरासी कोस परिक्रमा' का ही भाग है भरतपुर, जहाँ की अधिकांश भूमि समतल मैदानी है, पर चार प्रमुख नदियों- रूपारेल, बाणगंगा, गंभीरी और पार्वती के कारण इसका कुछ हिस्सा दलदली/कछारी भी है, और घना के विकास में इन बरसाती जल स्रोतों का बड़ा हाथ है।
  8. यहॉ से पष्चिम की तरफ बंषीलाल खटीक के मकान तक , यहॉ से दक्षिण की तरफ सडक क्रोस कर दक्षिण पष्चिम मे स्थित बिजली की कैंची से शुरू होकर दाहिने हाथ पर बने मकानात, नगरपालिका पार्क को शामिल करते हुए दक्षिण मे ही सीधे चलते हुए भीलो की झोपडीया रा.प्रा.विद्यालय तक, यहॉ से पष्चिम की तरफ गंभीरी नदी के किनारे यहॉ से नदी के किनारे होते हुवे खडिया महादेव मंदिर के पीछे स्थित रास्ते तक।
  9. सुमनजी ! वागाँ में पधारया जाणे दुनिया में वास उडी़ नाम झगरपुर रोप लगायो,काची पाकी कलियाँ से लाड़ लड़ायो सुमनजी ! पोथी में लिखाया,जाणे जिवड़ा में प्रीत जड़ी मनख प्रेम का ओ भंडारी,मणियाँ लुटाई खोल पिटारी सुमनजी ! बोले मीठा बोल जाणे घी में मिसरी डली मालव धरती गेर गंभीरी, शिवमंगल की मन की नगरी सुमनजी ! उज्जेणी में रम्या जाणे जोगीड़ा की जोग धुणी ओ रे सुमन तू गरूवर प्यारो, देस धरम को कवि मनखारो सुमनजी ! गुण का पारस कर दे लोवा ने सोन कडी़.
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